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मुकेश अंबानी से डील के फ्यूचर पर संकट? किशोर बियानी के खिलाफ जेफ बेजोस के मुकदमे पर शुरू हुई सुनवाई

अमेजॉन ने रिटेलर कंपनी फ्यूचर ग्रुप पर आरोप लगाते हुए कहा था कि कंपनी ने 24,713 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां रिलायंस इंडस्ट्रीज को बेचकर ई-कॉमर्स कंपनी के साथ किए करार का उल्लंघन किया है।

kishore biyani jeff bezosकिशोर बियानी और जेफ बेजोस

किशोर बियानी के फ्यूचर ग्रुप की ओर से रिलायंस से डील किए जाने के खिलाफ सिंगापुर की आर्बिट्रेशन कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। दुनिया की दिग्गज रिटेल कंपनी अमेजॉन की याचिका पर यह सुनवाई शुरू हुई है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक जल्दी ही इस पर सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर का फैसला आ सकता है। दरअसल अमेजॉन ने रिटेलर कंपनी फ्यूचर ग्रुप पर आरोप लगाते हुए कहा था कि कंपनी ने 24,713 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां रिलायंस इंडस्ट्रीज को बेचकर ई-कॉमर्स कंपनी के साथ किए करार का उल्लंघन किया है। फ्यूचर ग्रुप और रिलायंस के बीच यह डील 29 अगस्त, 2020 को हुई थी।

हाल ही में इस मामले पर 16 अक्तूबर को सिंगापुर के पूर्व अटॉर्नी जनरल वी.के. राजह ने सुनवाई की थी। वे अमेजॉन बनाम फ्यूचर बनाम रिलायंस मध्यस्थता मामले में एकमात्र मध्यस्थ थे। राजह सर्वोच्च न्यायालय की अपील में न्यायाधीश के रूप में भी काम कर चुके हैं। सूत्रों के अनुसार यह सुनवाई पांच घंटे तक चली थी। इसमें भारत के सॉलिसिटर जनरल के रूप में कार्य कर चुके वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम अमेजॉन की तरफ से पेश हुए। जबकि फ्यूचर कूपन (फ्यूचर की अनलिस्टेड फर्मों में से एक) की ओर से सिंगापुर के दविंदर सिंह पेश हुए। हरीश साल्वे फ्यूचर रिटेल (आरआईएल द्वारा अधिग्रहित) के लिए पेश हुए।

सूत्रों की मानें तो अमेजॉन ने इस मामले से संबंधित प्रश्नों का जवाब नहीं दिया। हालांकि इससे पहले सिएटल स्थित कंपनी ने कहा था कि फ्यूचर ग्रुप ने आरआईएल के साथ सौदा करने से पहले इसकी अनुमति नहीं ली है। विश्लेषकों का मानना है कि कि फ्यूचर-आरआईएल सौदे ने अमेजॉन की ऑफलाइन खुदरा बिक्री की योजना के लिए बाधा पैदा की थी। जिससे आरआईएल के लिए बड़े अवसर खुले। विश्लेषकों के अनुसार, 1.2 ट्रिलियन का मात्र 7 प्रतिशत रीटेल मार्केट ऑनलाइन है जिसमें भी अमेजॉन, फ्लिपकार्ट और रिलायंस के जियोमार्ट एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इसके अलावा अब शेष 93 प्रतिशत ऑफलाइन पर भी सभी की नजर है।

विश्लेषकों का यह भी मानना है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों के कारण अमेजॉन सीधे संपत्ति अर्जित नहीं कर सकता है। इसी के चलते वह Shoppers Stop और Future जैसी कंपनियों के साथ छोटे सौदे कर एक भागीदार के रूप में काम कर रहा है। फॉरेस्टर रिसर्च के एक वरिष्ठ पूर्वानुमान विश्लेषक सतीश मीणा ने कहा, ‘अमेजॉन अधिक ऑफलाइन संपत्ति प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है ताकि जब एफडीआई में बदलाव हो, तो वे इन परिसंपत्तियों को हासिल करने की बेहतर स्थिति में हों।’

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