HEALTH INSURANCE NEW RULES: अब इन बीमारियों पर क्लेम देने से इनकार नहीं कर सकेगी कंपनी! जानें नियमों में क्या हुए बदलाव

मानसिक दिक्कतें, जेनेटिक बीमारियां, न्यूरो संबंधी बीमारियां और एक्सक्लूजन वाली बीमारियां भी हेल्थ इंश्योरेंस में शामिल की गई हैं।

सांकेतिक तस्वीर।

इंश्योरेंस रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDA) ने हेल्थ इंश्योरेंस पर नई गाइडलाइन जारी की है। यह गाइडलाइन 1 अक्टूबर से लागू हो चुकी है। IRDA की नई गाइडलाइन गंभीर बीमारियों में भी इंश्योरेंस क्लेम की छूट देती है। गाइडलाइन्स के मुताबिक अब एचआईवी/एड्स, किडनी और लीवर फेल जैसी गंभीर बीमारी पर भी इंश्योरेंस क्लेम किया जा सकेगा। मानसिक दिक्कतें, जेनेटिक और न्यूरो संबंधी बीमारियां भी हेल्थ इंश्योरेंस में शामिल की गई हैं।

इसके अलावा मानसिक विकार से जुड़ी बीमारियों पर भी पॉलिसीधारक क्लेम कर सकेंगे। नए नियम के मुताबिक मानसिक बीमारी या मनोवैज्ञानिक विकार या न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों, यौवन या रजोनिवृत्ति से संबंधित बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को हेल्थ इंश्योरेंस का फायदा देने से मना नहीं किया जा सकता है।

इंश्योरेंस रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ने ऐसी 12 बीमारियों की लिस्ट बनाई है। इस लिस्ट में शामिल किसी भी बीमारी के होने पर कोई भी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी किसी पॉलिसीधारक को हेल्थ इंश्योरेंस देने से मना नहीं कर सकती।

इसके अलावा खतरनाक गतिविधियां के दौरान इंजरी और बीमारी होने पर भी हेल्थ इंश्योरेंस मुहैया करवाया जाएगा। हालांकि इसमें एडवेंचर स्पोर्ट्स को शामिल नहीं किया गया है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई शख्स कोयला सेक्टर या न्यूक्लियर पॉवर प्लांट में काम करता है तो कंपनी यह कहकर उसे हेल्थ बीमा देने से इनकार नहीं कर सकती कि वह पहले से ही खतरनाक वातावरण में काम करते हैं।

ऐसे में अगर किसी ने हेल्थ इंश्योरेंस करवाया हुआ है और उसे इस परिस्थिति में कोई गंभीर बीमारी घेर लेती है तो इंश्योरेंस कंपनी उसे बीमा क्लेम करने से मना नहीं कर सकती। ध्यान रहे इन सभी नियमों का फायदा तभी मिलेगा जब हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी बीमारी से पहले ली गई हो न कि बीमारी के बाद।

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