HDFC Mutual Fund New Fund Offer : एचडीएफसी म्यूचुअल फंड ने एक नया फंड ऑफ फंड लॉन्च किया है। एचडीएफसी इनकम प्लस आर्बिट्राज ओमनी एफओएफ (HDFC Income Plus Arbitrage Omni FOF) के नाम से लॉन्च की गई इस ओपन-एंडेड स्कीम का मकसद घरेलू आर्बिट्राज फंड और डेट-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड स्कीम्स में निवेश करना है। कंपनी के मुताबिक यह स्कीम निवेशकों को तुलनात्मक रूप से स्टेबल रिटर्न देने पर फोकस करेगी। साथ ही इसे टैक्स के लिहाज से भी एफीशिएंट बनाया गया है। इस न्यू फंड ऑफर में सब्सक्रिप्शन 27 फरवरी 2026 से 11 मार्च 2026 तक खुला रहेगा।

स्कीम की निवेश रणनीति क्या है

यह स्कीम अपने पोर्टफोलियो को दो हिस्सों में बांटकर चलाएगी। कम से कम 35 प्रतिशत हिस्सा आर्बिट्राज स्कीम्स में लगाया जाएगा, जबकि डेट-ओरिएंटेड स्कीम्स और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश 65 प्रतिशत से कम रहेगा। फंड मैनेजमेंट टीम ब्याज दरों की स्थिति, आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी, यील्ड कर्व, सिस्टम में लिक्विडिटी और कैश व फ्यूचर्स मार्केट के बीच आर्बिट्राज स्प्रेड जैसे फैक्टर्स को ध्यान में रखकर एसेट एलोकेशन में बदलाव करेगी। 

FOF के इस इनवेस्टमेंट स्ट्रक्चर के कारण इसे इक्विटी फंड जैसा टैक्स ट्रीटमेंट मिलने की संभावना रहेगी, जिसमें निवेश को 24 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर 12.5 प्रतिशत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स लगेगा। इसके अलावा, फंड ऑफ फंड स्ट्रक्चर में स्कीम्स के बीच अंदरूनी स्विचिंग पर टैक्स नहीं लगता, जिससे निवेशकों पर बार-बार टैक्स का बोझ नहीं पड़ेगा।

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डायनैमिक एसेट एलोकेशन

HDFC एसेट मैनेजमेंट कंपनी के एमडी और सीईओ नवनीत मुनोट ने कहा,“आज के फिक्स्ड इनकम माहौल में निवेशक ऐसे समाधान चाहते हैं, जिनमें इनकम की संभावना हो और जोखिम को भी समझदारी से संभाला जाए। यह स्कीम आर्बिट्राज और डेट-ओरिएंटेड स्कीम्स के बीच डायनैमिक एलोकेशन की सुविधा देती है, ताकि बेहतर यील्ड हासिल करने की कोशिश की जा सके और उतार-चढ़ाव को सीमित रखा जाए।”

आर्बिट्राज और डेट में निवेश पर फोकस

फंड मैनेजर प्रवीण जैन के अनुसार,“महंगाई का आउटलुक फिलहाल कमजोर है और सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी हुई है। हमें लगता है कि निगेटिव फैक्टर्स काफी हद तक मौजूदा यील्ड में शामिल किए जा चुके हैं। ऐसे में मीडियम टर्म में यील्ड के नीचे आने की गुंजाइश बनती है। गैर-एएए कॉरपोरेट बॉन्ड्स (Non-AAA corporate bonds) और एएए कॉरपोरेट बॉन्ड्स (AAA corporate bonds) के बीच स्प्रेड अभी ज्यादा है, जिससे आगे चलकर स्प्रेड कंप्रेशन की संभावना बनती है। ऐसे माहौल में यह स्कीम निवेशकों के लिए टैक्स-एफीशिएंट तरीके से आर्बिट्राज और डेट में निवेश का एक जरिया बन सकती है।”

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बेंचमार्क और फंड मैनेजमेंट

इस स्कीम का बेंचमार्क 40 प्रतिशत निफ्टी 50 आर्बिट्राज इंडेक्स (NIFTY 50 Arbitrage Index TRI) और 60 प्रतिशत निफ्टी शॉर्ट ड्यूरेशन डेट इंडेक्स (NIFTY Short Duration Debt Index) रखा गया है। इसका मतलब है कि परफॉर्मेंस को आर्बिट्राज और शॉर्ट ड्यूरेशन डेट मार्केट दोनों से तुलना करके देखा जाएगा। फंड को प्रवीण जैन और भव्येश दिवेचा (Bhavyesh Divecha) मैनेज करेंगे। दोनों का अनुभव डेट और आर्बिट्राज से जुड़े सेगमेंट में रहा है।

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क्या हैं रिस्क फैक्टर

आर्बिट्राज और डेट में निवेश पर फोकस करने वाली इस स्कीम में निवेश के साथ जोखिम भी जुड़ा हुआ है। आर्बिट्राज के मौके बाजार के हालात पर निर्भर करते हैं। अगर कैश और फ्यूचर्स मार्केट के बीच अंतर कम हो जाए, तो रिटर्न पर असर पड़ सकता है। वहीं, ब्याज दरों में बदलाव और क्रेडिट रिस्क का असर डेट इनवेस्टमेंट के रिटर्न पर पड़ सकता है। रिस्कोमीटर के मुताबिक इस स्कीम को “हाई रिस्क” कैटेगरी में रखा गया है।

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किन निवेशकों के लिए सही है स्कीम

ऐसे निवेशक इस स्कीम में निवेश पर विचार कर सकते हैं, जो बैंक एफडी से थोड़ा बेहतर रिटर्न पाने की उम्मीद रखते हैं, लेकिन इक्विटी में सीधे उतार-चढ़ाव से बचना चाहते हैं। टैक्स के लिहाज से यह उन लोगों को आकर्षित कर सकती है, जो अपने निवेश को 2 साल या उससे ज्यादा समय तक बनाए रख सकते हैं।

NFO की बड़ी बातें

  • ओपन-एंडेड फंड ऑफ फंड स्कीम
  • मिनिमम 35 प्रतिशत निवेश आर्बिट्राज स्कीम्स में
  • डेट और मनी मार्केट में निवेश 65 प्रतिशत से कम
  • एनएफओ अवधि: 27 फरवरी 2026 से 11 मार्च 2026
  • मिनिमम इनवेस्टमेंट : 100 रुपये
  • एग्जिट लोड : 18 महीने से पहले पैसे निकालने पर 1 प्रतिशत 
  • टैक्स ट्रीटमेंट : 24 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर 12.5% LTCG टैक्स 
  • रिस्क लेवल : हाई रिस्क (High Risk)

(डिस्क्लेमर : इस आर्टिकल का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना है, किसी स्कीम में निवेश की सलाह देना नहीं। निवेश का कोई भी फैसला पूरी जानकारी हासिल करने के बाद और सेबी रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर की सलाह लेकर ही करें।)