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रिटायर होने वाले हैं HDFC बैंक के सीईओ आदित्य पुरी, कई छोटे बैंकों से ज्यादा है संपत्ति, जानें- पूरा सफर

एचडीएफसी बैंक की मार्केट वैल्यूएशन 5.87 लाख करोड़ रुपये है, जो कि उसकी पैरेंट कंपनी से ज्यादा है। एचडीएफसी बैंक की पैरेंट कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड का मार्केट कैपिटलाइजेशन 3.09 लाख करोड़ रुपये है।

aditya puriएचडीएफसी बैंक के सीईओ आदित्य पुरी

दुनिया के टॉप 100 ब्रैंड्स में जगह बनाने वाले एचडीएफसी बैंक के सीईओ और एमडी आदित्य पुरी इस साल अक्टूबर में रिटायर होने वाले हैं। देश के सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले बैंकर आदित्य पुरी ने एचडीएफसी बैंक में अपने 842 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। आदित्य पुरी पर यह शेयर कई सालों तक एंप्लॉयी स्टॉक ऑप्शन के जरिए आए थे। पुरी की संपदा कई नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के कैपिटलाइजेशन से ज्यादा है, जैसे- मैग्मा फिनकॉर्प, सेंट्रम कैपिटल, कैपिटल इंडिया फाइनेंस, पीएनबी गिल्ट्स, मुथूट कैपिटल सर्विसेज और 5paisa कैपिटल। आइए जानते हैं, कैसी रही है आदित्य पुरी की लाइफ…

70 वर्षीय आदित्य पुरी का करियर एक कॉरपोरेट लीडर के तौर पर प्रेरणा देने वाला है। लंबे समय तक एक ही संस्था में काम करते हुए और देश के सबसे ज्यादा वेतन हासिल करने वाले सीईओ के तौर पर पहचान बनाने वाले आदित्य पुरी ने एचडीएफसी में काम करते हुए बड़ी संपत्ति भी तैयार की है। 1990 के शुरुआती दशक में आदित्य पुरी ने सिटिबैंक मलयेशिया की नौकरी छोड़कर ग्रीनफील्ड बैंक में काम करने के लिए भारत का रुख किया था, जो एचडीएफसी द्वारा प्रमोटेड था। इसके बाद अगले करीब ढाई दशक तक पुरी ने लगातार बैंक को मजबूत किया और आज एचडीएफसी बैंक देश के उन बैंकों में से एक है, जिनका एनपीए न्यूनतम है।

फिलहाल एचडीएफसी बैंक की मार्केट वैल्यूएशन 5.87 लाख करोड़ रुपये है, जो कि उसकी पैरेंट कंपनी से ज्यादा है। एचडीएफसी बैंक की पैरेंट कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड का मार्केट कैपिटलाइजेशन 3.09 लाख करोड़ रुपये है। बैंक को मजबूती देने के साथ ही वह देश के सबसे ज्यादा सैलरी पाने वालें बैंकिंग सीईओ के तौर पर उभरे हैं। वित्त वर्ष 2019-20 में उन्हें सालाना 18.9 करोड़ रुपये की आय हुई थी। आदित्य पुरी की लीडरशिप में एचडीएफसी बैंक ने खुद को डिजिटल बैंक के तौर पर भी स्थापित किया है।

…जब बैंक के मुखिया से कहा, रोज कॉल न करें: किसी बैंक के सीईओ के तौर पर सबसे लंबे समय तक काम करने वाले आदित्य पुरी को अपनी शर्तों पर काम करने के लिए जाना जाता है। 1980 के दशक की बात है। उस दौर में आदित्य पुरी सिटीबैंक के दिल्ली के काम को देखते थे और पूरे भारत में नानू पमनानी उसके हेड थे। पमनानी काम की धुन में लगे रहने वाले शख्स थे और सहयोगियों को टास्क देकर काम लेते थे। इसी सिलसिले में वह अकसर फोन कॉल्स किया करते थे। इसी तरह बुलाने पर एक दिन आदित्य पुरी ने पमानानी से कहा था कि आखिर वह कितना मुनाफा चाहते हैं? पमनानी जब तक कुछ बोलते पुरी ने खुद ही कहा, यदि 50 फीसदी से ज्यादा प्रॉफिट हो तो? पमनानी को यह बात बहुत अच्छी लगी, लेकिन पुरी ने एक शर्त रखी कि आप मुझसे हर दिन रिपोर्ट मांगना बंद करेंगे।

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