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भारत में विमानन क्षेत्र ‘दोहरा मैराथन’ है, यहां कारोबार करना मुश्किल: एयरएशिया

एयरएशिया के प्रमुख ने कहा कि भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने जो कहा था उसका 80 प्रतिशत विमानन नीति के मसौदे में पूरा कर दिया है।
Author नई दिल्ली | July 17, 2016 20:15 pm
निजी विमानन कंपनी एयरएशिया। (पीटीआई फोटो)

एयरएशिया समूह के प्रमुख टोनी फर्नांडिस का मानना है कि भारत में संरक्षणवादी नीतियों तथा ‘निहित स्वार्थों’ की वजह से कारोबार करना मुश्किल है, लेकिन उनकी संयुक्त उद्यम वाली विमानन कंपनी यहां लंबे समय तक टिकी रहेगी। एयरएशिया इंडिया की धीमी वृद्धि का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि यहां विमानन क्षेत्र ‘दोहरा मैराथन’ है, फर्राटा दौड़ नहीं। एयरलाइंस की वृद्धि योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर फर्नांडिस ने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि हम माल्या की तरह अचानक अंदर घुस कर अफरा-तफरी मचाएं और पकड़े जाए। अब हमारे पास एक नागर विमानन नीति है, यह नीति इस बारे में स्पष्ट है कि हमें क्या करना है। इसलिए हमसे इस बारे में कुछ साल बाद बात करें।’

एयरएशिया के प्रमुख ने कहा कि भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने जो कहा था उसका 80 प्रतिशत विमानन नीति के मसौदे में पूरा कर दिया है। उन्होंने कहा कि यहां कारोबार करना मुश्किल है और कई निहित स्वार्थ हैं जो कि पुरानी कंपनियों को खुश करने का प्रयास करते हैं। एयरएशिया (बेरहाद) समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने पिछले सप्ताह ब्रिटेन में फार्नबोरो इंटरनेशनल एयरशो के मौके पर कहा, ‘कम से कम उन्होंने घरेलू विमानन कंपनियों के लिए विदेशी उड़ानों के नियमों में बदलाव किया है। अब स्पष्ट है कि हमें क्या करना है।’

फर्नांडिस को एशिया में कम बजट एयरलाइंस का दिग्गज माना जाता है। उन्होंने भारत सरकार की आकाश में संरक्षणवादी नीतियों की आलोचना की, साथ ही नई नागर विमानन नीति विशेषरूप से 5-20 नियम को समाप्त करने की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘एयरलाइंस को संरक्षण न दें। अधिक विमान उड़ान अधिकार दें। देश में पर्यटन को प्रोत्साहन दें और अधिक रोजगार के अवसरों का सृजन करें। मुझे लगता है कि नरेंद्र मोदी सरकार इस दिशा में काफी साहसी कदम उठा रही है और निहित स्वार्थों तथा संरक्षणवाद से निपट रही है।’ एयरएशिया की भारत में धीमी प्रगति के सवाल पर फर्नांडिस ने कहा कि इस बात को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी कि नीति क्या होगी। ‘यह फर्राटा दौड़ नहीं है, यह मैराथन है। भारत में तो यह डबल मैराथन है। ऐसे में मुझे लगता है कि हम समझदार हैं, सतर्क हैं और धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं।’

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