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‘भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग का अमेरिकी अर्थव्यवस्था और नौकरियों में बड़ा योगदान’

नासकॉम के अध्यक्ष ने कहा कि फिलहाल में यह बातचीत चल रही है कि भारतीय आईटी कर्मचारी अमेरिका आते हैं और यहां अमेरिकी नागरिकों की नौकरी ले लेते हैं।

Author वॉशिंगटन | March 3, 2017 8:05 PM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया जा रहा है। (एक्सप्रेस फाइल)

एच1बी वीजा को लेकर अमेरिका में जारी बहस राजनीतिक और भावनात्मक हो गई है क्योंकि तथ्यों और धारणाओं के बीच ‘बहुत बड़ा अंतर’ है। सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के संगठन नासकॉम ने कहा है कि भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और नौकरियों के सृजन में बहुत बड़ा योगदान दिया है। नासकॉम के अध्यक्ष आर. चंद्रशेखर ने कहा कि फिलहाल में यह बातचीत चल रही है कि भारतीय आईटी कर्मचारी अमेरिका आते हैं और यहां अमेरिकी नागरिकों की नौकरी ले लेते हैं। सामान्यत: वह अमेरिकी कर्मचारियों का स्थान लेते हैं क्योंकि उन्हें कम वेतन मिलता है। यहां तक कि उच्च कुशलता रखने वालों को भी ज्यादा तनख्वाह नहीं मिलती जो वाकई में अमेरिकियों की नौकरी ले रहे हैं।

चंद्रशेखर यहां एक सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग संगठन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने आए हैं। वह यहां अमेरिका की नयी सरकार के सदस्यों के साथ कामकाजी वीजा को कम किए जाने और दोनों देशों के बीच कुशल कार्मिकों के प्रवाह इत्यादि मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह की है। इसके लिए भावनात्मक उदाहरणों को सुनाया जाता है जो हकीकत से कोसों दूर होते हैं। उनका मानना है कि इनका प्रतिरोध करने वाले तथ्यों और कहानियों को सही पहचान नहीं मिलती है। यदि आप हकीकत का रुख करें तो आपको एक अलग ही परिदृश्य नजर आएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार के आंकड़े ही इस संबंध में एक अलग तस्वीर पेश करते हैं।

चीनी अखबार ने दिखाया सरकार को आईना, लिखा- भारतीय प्रतिभाओं को नजरअंदाज कर चीन ने की बड़ी गलती

चीन के सरकारी मीडिया ने शुक्रवार (24 फरवरी) को कहा कि चीन ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के विशेषज्ञों को ‘नजरअंदाज करने की गलती’ की है। चीनी मीडिया का कहना है कि चीन को अपनी नवोन्मेषी योग्यता को बरकरार रखने के लिए भारत के हाई-टेक हुनर को आकर्षित करना चाहिए था। सरकारी अखबार ग्लोबल टाईम्स ने एक लेख में कहा, ‘चीन ने भारतीय हुनर को नजरअंदाज करने और अमेरिका एवं यूरोप से आने वाले हुनर को ज्यादा अहमियत देने की गलती की है।’ सत्ताधारी कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चीन के एक समूह द्वारा संचालित इस अखबार ने कहा, ‘चीन ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के हुनरमंद लोगों को यहां काम करने के लिए आकर्षित करने की दिशा में शायद ज्यादा मेहनत नहीं की है।’

यह अखबार हाल के कुछ महीनों में लगभग नियमित आधार पर भारत की आलोचना वाले लेख छापता रहा है। हालांकि उसका यह दुर्लभ लेख सकारात्मक रुख रखने वाला है। इसमें कहा गया कि ‘पिछले कुछ वर्षों में चीन ने तकनीकी नौकरियों में अभूतपूर्व उछाल देखा है क्योंकि देश विदेशी अनुसंधान एवं विकास केंद्रों के लिए एक आकर्षक स्थान बन गया है।’ लेख में कहा गया, ‘हालांकि अब कुछ हाई-टेक कंपनियां अपना ध्यान चीन से हटाकर भारत की ओर लगा रही हैं। इसके पीछे की वजह भारत में श्रमबल की लागत तुलनात्मक रूप से कम होना है। अपनी नवोन्मेषी योग्यता को बरकरार रखने के लिए भारत से हाई-टेक हुनरमंद लोगों को आकर्षित करना चीन के समक्ष मौजूद विकल्पों में से एक हो सकता

H-1B वीजा पर पाबंदी को लेकर पीएम मोदी चिंतित; कहा- “भारतीय पेशेवरों पर पाबंदी सही कदम नहीं होगा”

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