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लोन फ्रॉड: पुनर्वास केंद्र और खाली मकान दिखा ले लिया 8100 करोड़ का लोन, शक के दायरे में गुजराती कारोबारी

बताया जा रहा है कि संदेसरा परिवार नाइ​जीरिया में है। संदेसरा परिवार पर आरोप हैं कि उन्होंने करीब 200 फर्जी कंपनियां बनाकर 8,100 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम को हवाला के जरिए खुर्दबुर्द कर दिया और बैंक को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया।

प्रवर्तन निदेशालय

एक आवासीय चॉल, एक विस्थापित झुग्गी केंद्र और एक खाली इमारत। ये वो जगहें हैं जो बैंक की आॅ​डिट टीम को स्टर्लिंग समूह के संदेसरा परिवार के मालिकान वाली कंपनियों के पते के तौर पर दी गईं थीं। कागजों पर ये कंपनियां न सिर्फ फल-फूल रहीं थीं बल्कि करोड़ों का मुनाफा दे रहीं थीं। इनमें से कई पते फर्जी भी पाए गए हैं।

ईटी ने इस संबंध में रिपोर्ट प्रकाशित की है। ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, बताया जा रहा है कि संदेसरा परिवार नाइ​जीरिया में है। संदेसरा परिवार पर आरोप हैं कि उन्होंने करीब 200 फर्जी कंपनियां बनाकर 8,100 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम को हवाला के जरिए खुर्दबुर्द कर दिया और बैंक को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया। बैंक के द्वारा किए गए फरेंसिक आॅडिट के अलावा प्रवर्तन निदेशालय ने संदेसरा परिवार के मालिकान वाली संपत्तियों की सूची तैयार की है। इस सूची में वह संपत्तियां भी शामिल हैं जो उन्होंने टैक्स हैवन देशों में इकट्ठी की हैं। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय ने संदेसरा परिवार के द्वारा बैंक से कर्ज लेकर उसे ठिकाने के लिए सात चरणों वाले तरीके का खुलासा किया है।

जांच एजेंसियां संदेसरा परिवार के द्वारा स्थापित की गई फर्जी कंपनियों में कई सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी तलाश रही है। कई अधिकारियों के द्वारा इन कंपनियों में निवेश के भी साक्ष्य पाए गए हैं। ये भी उम्मीद है कि सरकारी अफसरों या अन्य को कथित तौर पर संदेसरा परिवार के द्वारा कथित तौर रिश्वत भी दी जा रही थी। फिलहाल मुख्य बातों पर जांच जारी है।

जांच के प्रमुख बिंदुओं में संदेसरा परिवार द्वारा विदेशों या भारत में किए गए निवेश, सरकारी कर्मचारियों द्वारा किए गए निवेश के अलावा रिश्वत मामला, भ्रष्टाचार की संभावना और अन्य संबंधित मुद्दे शामिल हैं। ये सभी बिंदु अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में स्थानीय कोर्ट में दाखिल की गई सीबीआई की चार्जशीट में दर्ज किए गए हैं। इस जांच के दायरे में बैंक के पूर्व निदेशक भी हैं, जिन्होंने संदेसरा परिवार को कर्ज दिया था। ईडी ने कोर्ट में एसबीआई और आंध्रा बैंक, मुंबई के द्वारा संदेसरा ग्रुप की कंपनियों की फरेंसिक आॅडिट जांच रिपोर्ट भी दाखिल की है।

आॅडिट टीम ने पाया कि कागजों पर बड़ा टर्नओवर देने वाली कंपनियां झुग्गियों, स्लम विस्थापन केंद्र और खाली इमारतों में चल रहीं थीं। एजेंसी ने ये स्वीकार किया है कि लोन के पैसों का अन्य मदों में दुरुपयोग किया गया। जबकि जरूरी जानकारियों का खुलासा कभी नहीं किया गया। लोन की रकम को कैश के तौर पर निकाला गया और ऐसी कंपनियों को दे दिया गया, जिनका कभी कोई अस्तित्व था ही नहीं। इसके अलावा इन फर्जी कंपनियों के निदेशकों (संदेसरा परिवार) को किए गए अनुचित भुगतान का जिक्र भी 300 पेज की चार्जशीट में किया गया है।

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