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ये चीजें हो सकती हैं सस्ती, GST काउंसिल घटा सकता है मौजूदा टैक्स रेट

GST Tax Rate Structure: कस्टर्ड पाउडर पर वर्तमान में 28 प्रतिशत का जीएसटी लागू है, माना जा रहा है कि इसे 18 पर्सेंट टैक्स ब्रैकट में रखा जा सकता है।
Author नई दिल्ली | August 8, 2017 14:05 pm
इन चीजों पर घटाया जा सकता है जीएसटी। (फोटो-रॉयटर्स)

एक जुलाई 2017 से देश भर में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) लागू है। कुछ विसंगतियों और शिकायतों के सामने बाद जीएसटी काउसिंल की मीटिंग में कुछ उत्पादों के दरों को कम करने पर विचार किया जा रहा है। जिन वस्तुओं पर जीएसटी घटाए जाने की संभावना है उनमें इडली/डोसा बैटर, गैस लाइटर समेत दो दर्जन से ज्यादा उत्पाद शामिल हैं। अगर आगामी जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में रेट घटा दिए जाते हैं, लोगों को इन सामानों के लिए कीमत चुकानी पड़ेगी। सूखी इमली और भुने हुए चने के भी दामों में भी कटौती हो सकती है। वर्तमान में इन वस्तुओं पर 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लागू है, जिसे कम करके 5 प्रतिशत किए जाने का प्रस्ताव है।

इंडिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कस्टर्ड पाउडर पर वर्तमान में 28 प्रतिशत का जीएसटी लागू है, माना जा रहा है कि इसे 18 पर्सेंट टैक्स ब्रैकट में रखा जा सकता है। धूप बत्ती, धूप और इसी तरह के कुछ अन्य प्रोडेक्ट्स पर फिलहाल 12 प्रतिशत स्लैब में रखा गया, जिनपर घटाकर जीएसटी 5 प्रतिशत किया जा सकता है। इसी तरह प्लास्टिक रेन कोट, रबर बैंड्स, राइस रबर रोल, कम्प्यूटर मॉनिटर और किचन गैस लाइटर पर 28 प्रतिशत टैक्स लगता है, जिसे 18 प्रतिशत के टैक्स स्लैब में रखा जा सकता है। जीएसटी के बाद टेक्सटाइल आइटम भी सस्ते हो सकते हैं, उन्हें 18 फीसदी से 12 फीसदी तक कम करने का प्रस्ताव है। झाड़ू और ब्रश पर कोई कर प्रस्तावित नहीं है क्योंकि वर्तमान 5% चार्ज लगता है।

इस बारे में वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद अंतिम निर्णय करेगी। जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग 9 सितंबर को हैदराबाद में होनी है। काउंसिल में सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि बिना ब्रांड वाले जिंसों को जीएसटी से छूट दी गई है, जबकि ब्रांडेड और डिब्बाबंद खाद्य वस्तुओं पर 5 फीसदी टैक्स लगता है। इसीलिए कई कंपनियों ने शुल्क से बचने के लिए अपने ब्रैंड का रजिस्ट्रेशन रद्द कराया है। बता दें कि 1 जुलाई को जीएसटी लागू होने के बाद से देश में सभी वस्तुओं के दाम एक समान हो गए हैं। जीएसटी लागू होने के साथ टैक्स निपटान के मामलों में भी  तेजी आएगी।

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