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नोटबंदी की मार के बाद जीएसटी से घबराया कारोबार

नोटबंदी की मार झेल कर अभी दिल्ली के व्यापारी उबरे भी नहीं थे कि जीएसटी ने उनके माथे पर पसीना ला दिया है।
प्रतीकात्मक फोटो। (फाइल)

नोटबंदी की मार झेल कर अभी दिल्ली के व्यापारी उबरे भी नहीं थे कि जीएसटी ने उनके माथे पर पसीना ला दिया है। सरकार की ओर से पहले यह कहा गया था कि सभी उत्पादों पर लगने वाला जीएसटी 18 फीसद से अधिक नहीं होगा। लेकिन अब एक जुलाई से लागू होने जा रहे जीएसटी में यह बात सामने आ रही है कि कर 28 फीसद तक बढ़ा दिए गए हैं। जिसकी वहज से व्यापारी सरकार की नीतियों से मायूस हैं। सरकारी फरमान है कि एक जुलाई से जीएसटी लागू की जाएं। जिसे लेकर व्यापारिक संगठनों में गुस्सा नजर आता है। छोटे और मंझोले व्यापारियों की समस्या यह है कि अब उन्हें यह समझ नहीं कि आने वाले समय में जीएसटी लागू होने के बाद उनके व्यापार का क्या होगा। व्यापारिक संगठनों की मानें तो जीएसटी का सबसे बड़ा नुकसान छोटे व मंझोले व्यापारियों को ही होगा। जिसकी वहज से छोटे व्यापारियों में अपने व्यापार को बचाए रखने को लेकर काफी चिंतित हैं।

जीएसटी की नई कर नीति ने किया परेशान
जीएसटी की नई कर नीति से व्यापारी सबसे ज्यादा उलझन और परेशानी दोनों में रहे हैं। हालत यह है कि व्यापारियों ने अपना सामान काफी कम दर पर बेचना शुरू कर दिया है। कार डीलरों ने भी अपनी गाड़ियों की कीमतों से मुनाफा घटा दिया है। दामों में रियायत पहले नवंबर-दिसंबर के महीनों में दी जाती थी, वह रियायत जून माह में ही दी जा रही है।

सरकार के आदेशानुसार जीएसटी लागू होने के बाद सभी कारोबारियों को अपने व्यापार को कंप्यूटरीकृत सिस्टम में लाना होगा। देश में अब हर प्रकार की सेवाओं की आपूर्ति एवं वस्तुओं के निर्माण, खरीद-बिक्री, एक्सचेंज, लाइसेंस, लीज, रेंट, ट्रांसफर, डिस्पोजल और माल अथवा सेवाओं का दूसरे देश से आयात करने पर समान जीएसटी देनी होगी। वैट, एक्साइज, सर्विस टैक्स, केंद्रीय बिक्री कर सहित अन्य अनेक प्रकार के कर जीएसटी में शामिल होंगे और सबके स्थान पर केवल जीएसटी ही लगेगा। पूरे देश में एक समान कानून और कर की दरें भी एक समान ही होंगी।

दिल्ली में सदर बाजार के व्यापारी रमेश अरोड़ा का कहना है कि उनका धंधा चीन के सामान का आयात करके और फिर उसे भारत के अलग-अलग राज्यों में सप्लाई का है। जीएसटी लागू होने के बाद उन्हें सारी खरीद फरोख्त अब कागजों में दिखानी होगी। इन विदेशी सामान की खरीद फरोख्त को वे किस तरह से कागजों में दिखाएगें, ये उनकी समझ से परे है। रमेश अरोड़ा का कहना है कि वर्तमान में वैट व्यवस्था में आपको अपनी रिटर्न कागजों माध्यम से अनेक बार विभाग में जमा करनी होती थीं लेकिन जीएसटी में केवल एक बार अपनी बिक्री की रिटर्न फार्म जीएसटीआर 1 में भर कर कंप्यूटर द्वारा जीएसपी, जीएसटी सुविधा प्रोवाइडर के माध्यम से फार्म जीएसटी नेटवर्क को भेजनी होगी।

कई उत्पादों के करों में बदलाव, कारोबारी नाराज
सरकार की ओर से कई उत्पादों की कर प्रणाली में काफी बदलाव किया गया है। उसे लेकर भी कारोबारियों में नाराजगी है। दिल्ली में आॅटोमोबाइल के व्यापारी नरेंद्र मदान का कहना है कि उनके व्यापार पर पहले साढ़े बारह फीसद टैक्स लगता था, जो अब बढ़कर 28 फीसद हो जाएगा। मदान के अनुसार व्यापारी पहले नोटबंदी से परेशान थे अब जीएसटी उनकी परेशानी बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद देश का छोटा और मध्यम श्रेणी का व्यापार बुरी तरह से प्रभावित होगा। उन्होंने बताया कि जिन व्यापारियों का सालाना टर्न ओवर डेढ़ करोड़ होता था, उन्हें उत्पाद शुल्क से छूट मिलती थी, जो अब जीएसटी लागू होने के बाद बंद हो जाएगा।

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