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पूरक विधेयकों को अंतिम रूप देगी जीएसटी परिषद, बैठक 4 मार्च को

सरकार जीएसटी को एक जुलाई 2017 से लागू करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

Author नई दिल्ली | March 3, 2017 9:01 PM
जीएसटी विधेयक (वस्तु एवं सेवा कर)

वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक शनिवार (4 मार्च) होगी जिसमें पूरक विधयेकों को अंतिम रूप दिया जाना है। इन विधेयकों को अगले सप्ताह से फिर शुरू हो रहे संसद के मौजूदा सत्र में पेश किया जाएगा। सरकार इस नई कर प्रणाली को एक जुलाई 2017 से लागू करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि परिषद की 11वीं बैठक में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी), राज्य जीएसटी (एसजीएसटी), एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) विधेयकों पर विचार होगा व उन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा। समिति में केंद्रीय वित्त मंत्री तथा राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

इस बीच राज्यों व केंद्र के अधिकारियों की समिति की बैठक शुक्रवार (3 मार्च) को हुई जिसमें विधि मंत्रालय के विचार पर चर्चा हुई।अधिकारियों ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जीएसटी (यूटीजीएसटी) विधेयक पर उसके विचार शनिवार को परिषद की बैठक के लिए आ सकते हैं। परिषद की बैठक यूं तो 4-5 मार्च को होनी है लेकिन अगर सभी मुद्दे कल (शनिवार, 4 मार्च) सुलझा लिए गए तो संभवत: अगले दिन की बैठक की जरूरत नहीं हो। जीएसटी परिषद की पिछले महीने हुई बैठक में राज्यों को क्षतिपूर्ति संबंधी कानून को मंजूरी दी गई। हालांकि सीजीएसटी, एसजीएसटी, आईजीएसटी विधेयकों के आधा दर्जन प्रावधानों की कानूनी भाषा के चलते इन्हें मंजूरी नहीं दी जा सकी।

शक्तिकांत दास बोले, 1 जुलाई से सभी राज्यों में लागू होगा जीएसटी

आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने मंगलवार (28 फरवरी) को कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सभी राज्यों में एक जुलाई से लागू होगा। दास ने संवाददाताओं से कहा, जीएसटी एक जुलाई को लागू होगी। सभी राज्यों ने इस तारीख पर सहमति जताई है। सरकार की योजना बजट सत्र के दूसरे भाग के लिए संसद की कार्यवाही नौ मार्च को शुरू होने से पहले जीएसटी परिषद की चार-पांच मार्च को होने वाली बैठक में आईजीएसटी (समेकित जीएसटी), सीजीएसटी (केंद्रीय जीएसटी) और एसजीएसटी (राज्य जीएसटी) मसौदों को मंजूरी दिलाने की है।

जीएसटी के क्षतिपूर्ति विधेयक मसौदे को पहले ही 18 फरवरी को जीएसटी परिषद से मंजूरी मिल चुकी है। जीएसटी परिषद से मंजूरी मिलने के बाद इन मसौदा विधेयकों को संसद से भी मंजूरी मिलना जरूरी है। इस संदर्भ में अन्य कदम सभी कमोडिटीज को जीएसटी स्लैब के तहत निर्धारित करना है, जो पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत हैं। प्रत्येक कमोडिटी को एक विशेष दर के तहत लाना होगा। जीएसटी अधिकारी परिषद की चार-पांच मार्च की बैठक के बाद इनका निर्धारण करेंगे।

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