gst bill e way bill procedure is not ready yet will take time to implemented - Jansatta
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GST: ई-वे बिल व्यवस्था लागू होने में हो सकती है देरी, लागू करने पर मतभेद, तैयारी अधूरी

ई-वे बिल के तहत सामान की आवाजाही के दौरान कागजी बिल बाकी की जरूरत नहीं होगी। यह बिल कोई भी व्यापारी या मौके पर मौजूद अधिकारी आॅनलाइन अपने स्मार्टफोन पर भी देख सकता है।

Author नई दिल्ली | June 21, 2017 1:49 AM
1 जुलाई, 2017 से देश में जीएसटी लागू कर दिया गया है। (Photo-financialexpres)

जीएसटी शासनतंत्र में ई-वे बिल को लेकर जीएसटी परिषद की बैठक में मतभेद दिखाई दिए। ये मतभेद अगर 30 जून तक दूर भी कर लिए गए तो भी ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा कि प्रस्तावित पहली जुलाई से देश में समग्र तौर पर ई-वे बिल व्यवस्था लागू हो ही जाएगी। उसका मुख्य कारण यह है कि केंद्र अभी इस व्यवस्था को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।  केंद्रीय राजस्व सचिव हंसमुख अधिया मई के पहले सप्ताह में ही साफ कर चुके हैं कि इस व्यवस्था को लागू करने में लचीला रुख अपनाया जाएगा और इसका सरलीकरण किया जाएगा। लेकिन जीएसटी परिषद की रविवार को हुई बैठक में हालांकि ज्यादातर राज्य इस व्यवस्था पर सहमत दिखाई दिए लेकिन कुछ इसे लागू करने को अनिच्छुक भी दिखे। इतना ही नहीं कुछ राज्यों का कहना था कि वे इसके लिए तैयार नहीं हैं। इसकी वजह उन्होंने संसाधनों की कमी बताई। यही कारण केंद्र के लिए भी है कि वह इसे लागू करने को अभी पूरी तैयारी नहीं है।
बैठक में आला अधिकारियों का कहना था कि कई राज्यों में यह व्यवस्था एनआइसी (नेशनल इंफर्मेटिक्स सेंटर) के माध्यम से लागू की गई है। पर पता चला है कि एनआइसी को भी इसे लागू करने के लिए काफी समय की दरकार है। नई व्यवस्था में 50 हजार से ज्यादा के बिल पर आवागमन के दौरान ई-वे बिल जरूरी होगा।

इस व्यवस्था के तहत सामान की आवाजाही के दौरान कागजी बिल बाकी की जरूरत नहीं होगी। यह बिल कोई भी व्यापारी या मौके पर मौजूद अधिकारी आॅनलाइन अपने स्मार्टफोन पर भी देख सकता है। इतना ही नहीं ई-वे बिल सामान ले जा रहे वाहन के चालक के फोन पर एसएमएस से भी भेजा जा सकता है। पर ई-वे बिल पर मतभेद के कारण और सारे राज्यों को केंद्रीकृत प्रणाली से न जोड़ पाने की वजह से अधिकारियों को केंद्र यही हिदायत देने जा रहा है कि वे इस व्यवस्था को लागू करने में तेजी न दिखाएं और व्यापारियों और परिवहन कंपनियों को उसे समझने व उससे जुड़ने का समय दें।ध्यान रहे राजग सरकार इसलिए भी सांसत में है कि इस बिल व्यवस्था का व्यापारी वर्ग में खासा विरोध है। कारण सीधा है कि आॅनलाइन बिल व्यवस्था में मौके पर जांच कर रहा अधिकारी अपने फोन पर ही बिल की वैधता की जांच कर सकता है। अभी तक टैक्स की ज्यादातर चोरी सामान के आवागमन के दौरान ही होती है। पर जैसे ही सारे राज्य ई-वे बिल की केंद्रीकृत प्रणाली से जुड़ जाएंगे, टैक्स की यह चोरी पकड़ी जाएगी।
बहुत सारा सामान अभी तक फर्जी बिलों के सहारे ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेज दिया जाता है। एक बार सामान के मंजिल पर पहुंच जाने के बाद यह पता लगाना कठिन हो जाता है कि इसे टैक्स अदा करके लाया गया है या नहीं। और फिर यही सामान आगे भी बिना बिल के ही बेच दिया जाता है। अक्सर दुकानदार यह करते पाए जाते हैं कि पक्का बिल लोगे तो इतनी रकम और नहीं लोगे तो इतना कम। इस धांधली पर रोक लगाने में ई-वे बिल व्यवस्था अचूक है। लेकिन सरकार ने अगर सारे राज्यों को ई-वे बिल की केंद्रीकृत प्रणाली से जोड़ने के लिए युद्धस्तर पर कुछ न किया तो पहली जुलाई से इसके लागू होने के आसार कम ही हैं।

क्या है ई-वे बिल

इस व्यवस्था के तहत सामान की आवाजाही के दौरान कागजी बिल की जरूरत नहीं होगी। यह बिल कोई भी व्यापारी या मौके पर मौजूद अधिकारी आॅनलाइन अपने स्मार्टफोन पर भी देख सकता है। इतना ही नहीं ई-वे बिल सामान ले जा रहे वाहन चालक के फोन पर एसएमएस से भी भेजा जा सकता है।

क्या होगा फायदा

आॅनलाइन बिल व्यवस्था में मौके पर जांच कर रहा अधिकारी अपने फोन पर ही बिल की वैधता की जांच कर सकता है। अभी तक टैक्स की ज्यादातर चोरी सामान के आवागमन के दौरान ही होती है। पर जैसे ही सारे राज्य ई-वे बिल की केंद्रीकृत प्रणाली से जुड़ जाएंगे, टैक्स की यह चोरी पकड़ी जाएगी।

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