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ग्रीनविजन टैक्नोलॉजीज ने पेश की ई-रिक्शा बैटरी, सिर्फ़ छह घंटे में होगा पूरा चार्ज

कंपनी का दावा है कि एक तरफ जहां यह बैटरी जल्दी चार्ज होती है वहीं दूसरी तरफ इसका रखरखाव काफी आसान है।

Author नई दिल्ली | Published on: September 9, 2016 4:06 PM
Greenvision Technologies, electric rikshaws, Greenvision Technologies E rikshaws, E rikshaws news, E rikshaws latest newsचित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (file Photo)

निजी क्षेत्र की ग्रीनविजन टैक्नालॉजीज ने पर्यावरण अनुकूल उपकरणों को बढ़ावा देते हुए कम समय में चार्ज होने वाली और रखरखाव में आसान ‘जेल प्रौद्योगिकी’ आधारित बैटरी विकसित की है जो कि ई-रिक्शा के लिए उपयोगी साबित होगी। कंपनी का दावा है कि एक तरफ जहां यह बैटरी जल्दी चार्ज होती है वहीं दूसरी तरफ इसका रखरखाव काफी आसान है क्योंकि इसमें पानी (डीएम वाटर) डालने की आवश्यकता नहीं है। ग्रीनविजन टैक्नालॉजीज प्रा. लि. के प्रबंध निदेशक बिजू ब्रुनो ने एक बयान में कहा, ‘हमने विशेषतौर पर जेल तकनीक आधारित बैटरी ‘वायेजर’ तैयार की है, सामान्य बैटरी के मुकाबले इनका वजन हल्का और आकार छोटा है। इसे छह घंटे में पूरी तरह चार्ज किया जा सकता है जबकि अन्य बैटरियों को चार्ज करने में आठ घंटे का समय लगता है।’

उन्होंने कहा कि इसके लिए विशेष तौर पर तैयार चार्जर भी बनाया गया है जिससे इन बैटरी की उम्र और भी बढ़ जाती है। बेंगलुरु स्थित ग्रीनविजन टैक्नॉलाजीज का दावा है कि इसका रखरखाव आसान है और पानी डालने की आवश्यकता नहीं है। यह लंबे समय तक चलती है और बार-बार चार्ज कर इसका 40,000 किलोमीटर तक उपयोग किया जा सकता है। ग्रीनविजन टैक्नालॉजीज ‘रेलीसेल’ नाम से अन्य बैटरी भी तैयार करती है। कंपनी का बेंगलुरु के निकट होसुर में कारखाना है। मई 2011 में इसने काम करना शुरू किया। अब तक इसमें 70 करोड़ रुपए का निवेश किया जा चुका है। वर्ष 2015-16 में इसका कारोबार करीब 100 करोड़ रुपए रहा। वर्ष 2020 तक कंपनी का 1,000 करोड़ रुपए कारोबार का लक्ष्य है।

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