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शून्य डाउन पेमेंट पर मिलेगी इलेक्ट्रिक कार!

सरकार शून्य डाउन पेमेंट पर इलेक्ट्रिक कार उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। इसका मकसद 2030 तक देश को सौ फीसद इलेक्ट्रिक वाहन वाला राष्ट्र बनाना है।

Author नई दिल्ली | March 26, 2016 3:50 AM
Electric Cars (Reuters

सरकार शून्य डाउन पेमेंट पर इलेक्ट्रिक कार उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। इसका मकसद 2030 तक देश को सौ फीसद इलेक्ट्रिक वाहन वाला राष्ट्र बनाना है। प्रस्तावित योजना के तहत लोगों को महंगे पेट्रोल, डीजल जैसे र्इंधन के उपयोग से जो बचत होगी, उससे वे इलेक्ट्रिक वाहन खरीद सकेंगे। सीआइआइ यंग इंडिया द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने कहा- भारत अपनी तरह का पहला ऐसा देश हो सकता है तो सौ फीसद इलेक्ट्रिक वाहनों का परिचालन करे। हम इस कार्यक्रम के लिए खुद पैसा जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा- हमें सरकार से एक रुपए की जरूरत नहीं है। हमें भारत के लोगों से एक रुपए के निवेश की जरूरत नहीं है। गोयल ने इस बारे में विस्तार से बताते हुए कहा- हम योजना पर काम कर रहे हैं। क्या हम वास्तव में मुफ्त में (जीरो डाउन पेमेंट) इलेक्ट्रिक कार दे सकते हैं और लोग पेट्रोलियम उत्पादों पर जो बचत हो, उससे उसके लिये भुगतान कर सकते हैं। नवप्रवर्तन संभव है, इसके लिए केवल खुले दिमाग की जरूरत है। आपको पैमाने के बारे में सोचने और ईमानदार होने की जरूरत है।

मंत्री ने कहा कि सड़क मंत्री नितिन गडकरी की अगुआई में एक छोटा कार्यसमूह गठित किया गया है। इसमें पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर शामिल हैं। उन्होंने कहा- हम अप्रैल के पहले हफ्ते में बैठक कर रहे हैं और इस बात पर विचार करेंगे क्या भारत 2030 तक सौ फीसद इलेक्ट्रिक वाहन वाला देश बन सकता है। हम इस पर गौर करने की कोशिश कर रहे हैं क्या हम कार बदलने के बाद सस्ती बिजली के उपयोग से ग्राहकों को जो बचत होगी, उसका लाभकारी तरीके से उपयोग कर सकते हैं।

पीयूष गोयल ने कहा- हम पैमाने के बारे में सोच रहे हैं। हम दुनिया का अनुकरण करने के बजाय अगुवाई करने के बारे में सोच रहे हैं। भारत दुनिया में पहला बड़ा देश होगा जो उस पैमाने के बारे में सोचता है। मंत्री ने एलईडी लाइट का उदाहरण दिया जहां भारी मात्रा में निविदा से सरकार इन बल्बों की खरीद कीमत इस वर्ष में घटाकर 64.41 रुपए पर लाने में कामयाब हुई है जो फरवरी 2014 में 310 रुपए थी। बिजली शुल्क के बारे में उन्होंने कहा- हमें देश कोई शुल्क बढ़ाने की जरूरत नहीं है। हमें केवल स्मार्ट बनने और प्रौद्योगिकी लाने की जरूरत है और भारत विभिन्न देशों में सस्ती बिजली का पावरहाउस बन सकता है।

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