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छह लाख रुपए से ज्‍यादा की खरीददारी कीजिएगा तो खुफिया विभाग को चली जाएगी आपकी रिपोर्ट

सरकार 2 लाख के नकद लेनदेन पर रोक पहले ही लगा चुकी है, अब उन लोगों पर सरकारी चाबुक चलने वाला है जो 6 लाख से ज्यादा का लेनदेन करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार की नजर 6 लाख की खरीददारी पर होगी।

चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है।

सरकार 2 लाख के नकद लेनदेन पर रोक पहले ही लगा चुकी है, अब उन लोगों पर सरकारी चाबुक चलने वाला है जो 6 लाख से ज्यादा का लेनदेन करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार की नजर 6 लाख की खरीददारी पर होगी, इसमें यह देखा जाएगा कि कहीं लेनदेन काले धन को वैध बनाने के मकसद से तो नहीं किया गया? सूत्रों की मानें तो इस निगेहवानी की जद में ज्वैलरी या अन्य महंगे सामानों की खरीददारी होगी। दुनिया के कई देशों में इस तरह के नियम पहले से चल रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक एक सरकारी अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि ज्यादातर देशों में इस तरह की सीमा 10 हजार डॉलर यानी आज की भारतीय मुद्रा के हिसाब से 6 लाख 38 हजार 565 रुपये है। अधिकारी ने कहा कि अपने देश में आम सहमति के साथ 6 लाख रुपये के आसपास की सीमा तय करने पर चर्चा चल रही है।

इस नियम के लागू होने से प्रवर्तन निदेशालय के अलावा आयकर विभाग को एक और विकल्प मिल जाएगा जो उसे खरीददार की आय और उसके द्वारा खरीदे गए सामान के बीच असंगतियों की जानकारी देने में मदद करेगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद खुदरा विक्रेताओं को 6 लाख से ज्यादा की खरीद पर फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट (एफआईयू) को सूचना देनी होगी। यह यूनिट कालेधन को वैध बनाने के खिलाफ प्रस्ताव पर काम कर रही है। सरकार ने कालेधन और कालेधन को वैध बनाने से रोकने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। इसमें उन शेल कंपनियों (नाम भर की कंपनियां) को बंद करने की भी बात है, जो केवल अस्तित्व में हैं और ऐसे लेनदेन की सुविधा और बेनामी लेनदेन को मजबूत करती हैं। सरकार यह भी लागू कर चुकी है कि 50 हजार के भी किसी लेनदेन पर खरीददार के पास पेन नंबर जरूर होना चाहिए। सरकार ने 23 अगस्त 2017 को एक नोटिस जारी किया था जिसमें हीरे और आभूषणों के डीलरों को उनके लेनदेन को लेकर सरकार को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया था। लेकिन यह नोटिस अक्टूबर में वापस ले लिया गया था क्यों कि तय सीमा डीलरों के लिए गले की हड्डी बन रही थी।

सरकार यह भी साफ कर चुकी हैं कि धन शोधन निवारण अधिनियम की रोकथाम के तहत बैंकों और सभी वित्तीय संस्थाओं को 10 लाख रुपयों से ऊपर के सभी लेनदेन के रिकॉर्ड को संभालकर रखना है। वहीं बाहर से आए 5 लाख रुपये पर नजर होगी। कानून के तहत सभी खरीद और 50 लाख या उससे ज्यादा की अचल संपत्ति की बिकी पर ध्यान देने जरूरत है। नोटबंदी के बाद से यह नियम लागू हो गया था कि बैंको को 50 हजार के ऊपर जमा की गई नकदी की जानकारी देनी होती है। प्रवर्तन निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया जब 2 लाख रुपये के लेनदेन पर रोक जरूर लगी है, लेकिन हाल के कुछ विवरण बताते हैं कि अकाउंटेंट चालाकी से कानूनी बैंकिंग चैनल के जरिये काले धन का प्रवाह कर रहे हैं। हाल में ईडी ने अध्ययन में पाया कि 48 फीसदी कालेधन को शेल कंपनियां वित्तीय चैनलों के माध्यम से वैध बना रही हैं। अधिकारी ने कहा कि इसलिए यह न माना जाए कि लेनदेन नकद में नहीं हुआ तो वह पकड़ा नहीं जाएगा।

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