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उप्र की 17 OBC जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं

उत्तर प्रदेश की 17 ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की मांग को अस्वीकार करते हुए केंद्र ने गुरुवार को कहा कि इस प्रस्ताव को देश के महापंजीयक (आरजीआइ) ने नामंजूर कर दिया है।

Author नई दिल्ली | April 29, 2016 2:20 AM
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत

उत्तर प्रदेश की 17 ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की मांग को अस्वीकार करते हुए केंद्र ने गुरुवार को कहा कि इस प्रस्ताव को देश के महापंजीयक (आरजीआइ) ने नामंजूर कर दिया है। और वह आरजीआइ के निर्णय के खिलाफ फैसला लेने की स्थिति में नहीं है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने विभिन्न जातियों को अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की सूचियों में शामिल करने की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि जब आरजीआइ ने किसी प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया तो राज्य को नए सिरे से प्रस्ताव करने की जरूरत है। वह राज्यसभा में संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश संशोधन विधेयक 2016 पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। उनके जवाब के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

सपा के विश्वंभर प्रसाद निषाद ने उत्तर प्रदेश की 17 जातियों को अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल करने की मांग करते हुए विधेयक पर एक संशोधन पेश किया। लेकिन सदन ने उस संशोधन को ध्वनिमत से खारिज कर दिया। गहलोत ने निषाद की इस मांग पर कहा कि इस बारे में भारतीय महापंजीयक ने दो बार इनकार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार आरजीआइ के निर्णय के खिलाफ जाने की स्थिति में नहीं है।

गहलोत ने स्वीकार किया कि देश में अनुसूचित जाति की आबादी बढ़ी है। बढ़ी हुई आबादी के आधार पर उनके आरक्षण में वृद्धि के सुझाव पर उन्होंने कहा कि इस बारे में सभी दलों के साथ विचार विमर्श कर ही कोई रास्ता निकाला जा सकता है। गहलोत ने कहा कि हाल ही में जाति आधारित जनगणना संपन्न हुई है और सरकार उसकी घोषणा की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार अनुसूचित जातियों व जनजातियों के हित संरक्षण के लिए शुरू से ही प्रतिबद्ध रही है। इस दिशा में सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इस क्रम में उन्होंने कई योजनाओं का जिक्र भी किया।

उन्होंने उत्पीड़न रोकथाम कानून का भी जिक्र किया और कहा कि इस कानून के संबंध में देश के विभिन्न हिस्सों में जागरूकता पैदा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों के बाद केंद्र सरकार की नौकरियों में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित खाली पदों को भरने की प्रकिया तेज हुई है और इसमें खासी कमी आई है।

संविधान निर्माता डा. बीआर आंबेडकर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनके जीवन से जुड़े पांच स्थानों को पंच तीर्थ घोषित कर उनके विकास के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। विधेयक पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस के शमशेर सिंह ढिल्लों ने कहा कि यह विचारणीय है कि तमाम प्रयासों के बावजूद अनुसूचित जातियों, जनजातियों के जीवन में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। विभिन्न विभागों में आज भी रिक्त पद खाली पड़े हैं और उसके कल्याण के लिए दिए गए धन का समुचित उपयोग नहीं हो पाता है।

उन्होंने कहा कि आंबेडकर की जयंती मनाने से ही काम पूरा नहीं होने वाला है बल्कि शिक्षा के मंदिरों में छुआछूत को दूर करना होगा, पढ़े लिखे लोगों को रोजगार मिलना चाहिए और आरक्षण नीति को ठीक से लागू करने की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए और देश में गरीबों, पिछड़ों को मुख्यधारा में लाने की साफ नीयत से कोशिश होनी चाहिए।

भाजपा के अमर शंकर सावले ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि देश में कमजोर वर्ग के लोगों के हित में बने अत्याचार निवारण अधिनियम के होने के बावजूद अत्याचार की घटनायें चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के समुदाय के लोगों को न्याय सुनिश्चित करने के साथ साथ उक्त अधिनियम को अधिक प्रभावी बनाने पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि सरकार द्वारा लाया गया अधिनियम का ध्येय अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों के लिए अधिक गरिमापूर्ण जीवन को सुनिश्चित करना है।

सपा के विश्वंभर प्रसाद निषाद ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इस विधेयक में तमाम राज्यों में मौजूदा विसंगतियों को दूर करने के लिहाज से इस संशोधन विधेयक को लाया गया है। ठीक उसी प्रकार से उत्तर प्रदेश ने जिन कुछ जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने की सिफारिश भेजी है, सरकार को उसपर गंभीरता से विचार कर पहल करनी चाहिए।

जद (एकी) के केसी त्यागी ने कहा कि कहा कि सरकार की यह गलतफहमी है कि सिर्फ अनुसूचित जाति की सूची में डाल देने भर से उस वर्ग के लोगों का कल्याण हो जाएगा। इसके लिए अधिक ठोस कोशिश करने की आवश्यकता है। बसपा के वीर सिंह ने कहा कि यह विधेयक समाज के वंचित लोगों की प्रगति में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि तमाम अन्य जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के साथ ही उनका आरक्षण का कोटा भी बढ़ना चाहिए।

भाजपा और कांग्र्रेस को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार ने आरक्षण का कोटा पूरा करने की जिजीविषा नहीं दिखाई, केवल उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने राज्य में 100 फीसद रिक्त पदों को भरने की पहल की। चर्चा में माकपा के सोमप्रसाद, बीजद के दिलीप कुमार टिर्की, भाकपा के डी राजा, कांग्रेस के येशुदासु सीलम, भाजपा के शंभुप्रसादजी टुंडिया ने भी हिस्सा लिया।

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