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रोजगार आंकड़ा बढ़ाने के लिए दांव चल सकती है सरकार, किराना दुकान, ढाबा खोलने वालों को राहत के आसार

एक सबवे रेस्त्रां को राजधानी में एक सैंडविच बेचने के लिए पुलिस में करीब 24 दस्तावेज जमा कराने होते हैं। खास बात है कि एक हथियार को सरकारी नियमों से खरीदने के लिए महज 13 दस्तावेजों की जरुरत होती है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

केंद्र सरकार किराना दुकानों और ढाबा खोलने के लिए जरुरी स्वीकृतियों की संख्या में उल्लेखनीय रूप से कटौती करने की योजना बना रही है। योजना में लालफीताशाही को कम करने और जमीनीं स्तर पर कारोबार को आसान बनाने के लिए सरकार से एकल-खिड़की से सारी मंजूरी देने की मांग की जा रही है। वर्तमान में मौजूदा नियमों के मुताबिक एक स्टोर खोलने के लिए 28 तरह की मंजूरी की जरुरत होती है जबकि एक ढाबा या रेस्तरां खोलने के लिए 17 तरह की मंजूरी की जरुरत होती है। इसमें फायर के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट, निगम से जरुरी मंजूरी और संगीत बजाने के लिए लाइसेंस की जररुत होती है। इसके अलावा फूड रेगुलेटर विभाग से भी मंजूरी की जरुरत होती है जो कि हाईपर लोकल होता है, अन्य शहरों के हिसाब से यह अलग-अलग होता है। भारतीय नियमों के उलट सिंगापुर और चाइना जैसे देशों में ढाबा या रेस्तरां खोलने के लिए महज चार तरह की मंजूरी की जरुरत होती है। हालांकि सरकार अब उद्यमियों के लिए बिजनेस के नियम आसान बनाने जा रही है क्योंकि सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक स्तर पर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैकिंग में शीर्ष 50 में लाने का है।

मामले में नेशनल रेस्ट्रॉन्ट्स असोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने पुराने कानून के प्रचलन का हवाला देते हुए कहा कि रेस्त्रां मालिकों के लिए यह एक बड़ी रुकावट है। उदारहण के लिए एक सबवे रेस्त्रां को राजधानी में एक सैंडविच बेचने के लिए पुलिस में करीब 24 दस्तावेज जमा कराने होते हैं। खास बात है कि एक हथियार को सरकारी नियमों से खरीदने के लिए महज 13 दस्तावेजों की जरुरत होती है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि किराना दुकानों को संचालित करने के लिए कई नियम और कानून है। अधिकारी ने कहा कि हालांकि अब विचार यह है कि इन नियम कानूनों को काफी कम किया जाए।

वहीं डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री ऐंड रिटेल ट्रेड (DPIIT) लाइसेंस रिन्यू करने की प्रक्रिया खत्म करने पर भी विचार कर रहा है। इसका मकसद छोटे कारोबारियों को उनकी दुकानें और ढाबा चलाने में मदद करना है ताकि उन्हें बार-बार सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों के आगे पीछे चक्कर ना काटने पड़ें।

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