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GST की सबसे कम दर को 5 से बढ़ाकर 8 फीसदी पर विचार कर सकती है सरकार

GST के 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी के चार स्लैब हैं। इनकी संख्या घटाकर तीन स्लैब 8 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी करने का सुझाव दिया गया है।

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जून 2022 में केंद सरकार की राज्यों को क्षतिपूर्ति व्यवस्था समाप्त होने जा रही है(एक्सप्रेस फोटो: प्रेम नाथ पाण्डेय)

पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी को इस बार जीएसटी का झटका लग सकता है। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है कि राज्यों के वित्त मंत्रियों का एक पैनल जीएसटी परिषद को इस महीने के अंत में एक रिपोर्ट सौंप सकता है, जिसमें राजस्व को बढ़ाने के लिए सुझाव दिए गए हैं। इन्हीं सुझावों में जीएसटी की निचली दरों को बढ़ाने का सुझाव भी शामिल है।

जीएसटी की 5 से बढ़ाकर 8 फीसदी: पैनल की तरफ से दिए गए  राजस्व को बढ़ाने के सुझावों में जीएसटी की सबसे निचली दर जो मुख्यतः आम जरूरत की चीजों और खाने-पीने के सामानों पर लगती है उसे बढ़ाकर पांच से आठ फीसदी करने का सुझाव दिया गया है। यदि ऐसा होता है तो देश में बड़ी संख्या में खाने पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं।

सरकार को होगा 1.5 लाख करोड़ का फायदा: सूत्रों के मुताबिक यदि सरकार जीएसटी को 5 फीसद से बढ़ाकर 8 फीसदी करती है तो 1 फीसदी टैक्स बढ़ने से सरकार की वार्षिक आय में 50 हजार करोड़ रुपए का इजाफा होगा। इस तरह देखे तो सरकार के द्वारा 3 फीसदी जीएसटी बढ़ाने से सरकार की आय में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए का वार्षिक इजाफा होगा।

देश में फिलहाल जीएसटी के 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी के चार स्लैब हैं। इनकी संख्या घटाकर तीन स्लैब 8 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी करने का सुझाव दिया गया है। 12 फीसदी टैक्स स्लैब खत्म होने के बाद इसमें आने वाले सभी सामान 18 फीसदी वाले टैक्स स्लैब में आ जाएंगे।

घट सकती है जीएसटी में छूट वाले सामानों की संख्या: राज्य वित्त मंत्रियों के पैनल की तरफ से जीएसटी में छूट वाले सामानों की संख्या घटाने को लेकर भी सुझाव दिया गया है। वर्तमान में जीएसटी बिना ब्रांड के खाद्य पदार्थ और डेयरी उत्पादों को जीएसटी से बाहर रखा गया है।

जीएसटी (GST) परिषद की बैठक: सूत्रों के मुताबिक जीएसटी परिषद की बैठक इस महीने के अंत या अगले महीने की शुरुआत में हो सकती है जिसमें राज्य वित्त मंत्रियों के पैनल द्वारा दिए गए सुझावों पर चर्चा की जाएगी। जून में राज्यों को मिलने वाली क्षतिपूर्ति व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। इस कारण यह जरुरी हो जाता है कि राज्य आत्मनिर्भर बनें। जीएसटी संग्रह में अंतर पाटने के लिए केंद्र पर निर्भर न रहे।  

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