भारत विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नए कदम उठाने की तैयारी में है, और इस दिशा में इस सप्ताह की शुरुआत में ही महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना है।

ब्लूमबर्ग के अनुसार, मामले से जुड़े लोगों का हवाला देते हुए बताया गया है कि केंद्रीय कैबिनेट उन टैक्सों में बड़ी कटौती पर चर्चा कर सकती है जो विदेशी फंड भारतीय बॉन्ड में निवेश करते समय चुकाते हैं।

बॉन्ड पर ब्याज टैक्स की भी समीक्षा

कैबिनेट से बॉन्ड से कमाए गए ब्याज पर मौजूदा 20% टैक्स के भविष्य की भी समीक्षा करने की उम्मीद है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, अधिकारी दो विकल्पों पर विचार कर रहे हैं या तो इस टैक्स को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए या इसे बहुत कम स्तर पर ला दिया जाए। यह प्रस्ताव अभी भी विचाराधीन है और कैबिनेट चर्चाओं के बाद इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

यदि मंजूरी मिल जाती है, तो ये कदम भारत द्वारा अपने वित्तीय बाजारों में विदेशी भागीदारी को बढ़ावा देने और अतिरिक्त विदेशी निवेश लाने की दिशा में एक और कदम साबित होंगे।

विदेशी खरीदारों के लिए और सरकारी बॉन्ड खोल सकता है आरबीआई

इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कुछ लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड को ‘पूरी तरह से सुलभ’ (fully accessible) श्रेणी में रखने की संभावना है। इससे विदेशी निवेशक बिना किसी स्वामित्व सीमा के उन प्रतिभूतियों को खरीद सकेंगे। केंद्रीय बैंक ने 2024 में ‘पूरी तरह से सुलभ मार्ग’ के तहत उपलब्ध प्रतिभूतियों की सूची में आखिरी बार संशोधन किया था। उस समय, उसने सूची से 14-वर्षीय और 30-वर्षीय सरकारी बॉन्ड को हटा दिया था।

वित्त मंत्रालय और आरबीआई ने अभी तक इस रिपोर्ट पर आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। पिछले महीने, ब्लूमबर्ग न्यूज ने बताया था कि भारत केंद्रीय बैंक की सिफारिश के बाद टैक्स में कटौती पर विचार कर रहा था।

रुपये पर दबाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नागरिकों से विदेशी मुद्रा बचाने का आग्रह किया, क्योंकि तेल आयात की बढ़ती लागत ने देश के वित्त पर दबाव बढ़ा दिया है। इस गिरावट के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं। इनमें अमेरिकी व्यापार शुल्क, भारतीय बाज़ारों से विदेशी फ़ंड का रिकॉर्ड स्तर पर बाहर जाना, और ईरान से जुड़े युद्ध के कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल शामिल हैं।

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