सरकार ने नोटबंदी के निर्णय और बैठकों का ब्योरा देने से किया इनकार, कहा-सूचना देश के आर्थिक हितोें पर हानिकारक असर - Jansatta
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सरकार ने नोटबंदी के निर्णय और बैठकों का ब्योरा देने से किया इनकार, कहा-सूचना देश के आर्थिक हितोें पर हानिकारक असर

सीबीडीटी ने बताया कि इसके साथ ही बेनामी लेनदेन रोकथाम अधिनियम 1988 में संशोधन किया गया।

Author नई दिल्ली | February 20, 2017 2:40 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। ( Photo Source: Indian Express/File)

सरकार ने विदेशों में जमा कालेधन समेत कर चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को सतत प्रक्रिया बताया है लेकिन 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को अमान्य करने के निर्णय एवं बैठकों से जुड़ा ब्यौरा यह कहते हुए देने से इनकार किया है कि ऐसी सूचना जारी करने का देश के आर्थिक हितोें पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है।  सूचना का अधिकार (आरटीआइ) के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय से 8 नवंबर 2016 के विमु्रदीकरण के निर्णय के संबंध में देश में अब तक जारी की गई मुद्रा की मात्रा, प्रकार, नोटिंग, मुद्रा जारी किए जाने के संबंध में आरबीआइ की नोटिंग आदि के बारे में जानकारी मांगी गई थी।  प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने जवाब में कहा, ‘आवेदक की ओर से मांगी गई जानकारी का खुलासा होने पर देश के आर्थिक हितों पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है और उसे ऐसी जानकारी को आरटीआइ अधिनियम 2005 की धारा 8 (1) (अ) के तहत जारी करने से छूट प्राप्त है। ’
आरटीआइ के तहत देश में चल रहे कारोबार में होने वाले वार्षिक लेनदेन और देश की अर्थव्यवस्था के संचालन में उपयोग में आने वाले रुपए की मात्रा, वैध एवं अवैध रुपए की मात्रा एवं इन विषयों पर जांच एवं सर्वेक्षण रिपोर्ट की जानकारी मांगे जाने पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा, ‘यह आरटीआइ अधिनियम 2005 की धारा 2 (एफ) के तहत ‘सूचना’ की परिभाषा के दायरे में नहीं आता है।

विमुद्रीकरण के निर्णय के संदर्भ में पुराने नोट बदलने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदमों के दौरान बैंकों एवं डाकघरों के संदर्भ में अनियमितता की शिकायतों की जानकारी मांगे जाने पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी व्यापक है और ऐसी सूचना एकत्र करने में कार्यालय के सामान्य कार्यकलापों से संसाधनों को असंगत रूप से इस कार्य के लिए लगाना पड़ेगा।विदेशों से कालाधन वापसी के लिए अब तक शुरू की गई प्रभावी कार्ययोजनाओं के बारे में जानकारी मांगे जाने पर वित्त मंत्रालय के तहत केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा कि विदेशों में जमा कालेधन समेत कर चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की सतत प्रक्रिया है। इस संदर्भ में प्रत्यक्ष कर कानून के तहत तलाशी, सर्वे, जांच, आय का मूल्यांकन, जुर्माना, कर वसूलने जैसे कदम उठाए गए हैं। दिल्ली स्थित आरटीआइ कार्यकर्ता गोपाल प्रसाद ने प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय से 8 नवंबर 2016 के सरकार के नोटबंदी के निर्णय से जुड़ा ब्यौरा और विदेशों में जमा कालाधन वापस लाने के संदर्भ में उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी मांगी थी।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने बताया कि अघोषित विदेशी आय एवं संपत्ति और कर अधिनियम 2015 को लागू करने के संदर्भ में तीन महीने की आय घोषणा योजना की अवधि 30 सितंबर 2015 को समाप्त हुई। इस दौरान 648 घोषणाएं सामने आईं जो 4164 करोड़ रुपए की अघोषित विदेशी संपत्ति के संदर्भ में थी। इस संदर्भ में कर और जुर्माने के रूप में करीब 2,476 करोड़ रूपये एकत्र किए गए।

बोर्ड ने बताया, ‘सरकार ने विदेशों में जमा कालेधन के मुद्दे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं जिसमें ठोस विधायी एवं प्रशासनिक ढांचा तैयार करना, जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई करना, सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से सूचनाओं को जोड़ना एवं क्षमता उन्नयन करना शामिल है।’आरटीआइ के तहत प्राप्त जानकारी में कहा गया है कि कालेधन के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के दो पूर्व न्यायाधीशों की अध्यक्षता एवं उपाध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया गया। कालाधन (अघोषित विदेशी आय एवं संपत्ति) एवं कराधान अधिनियम 2015 बनाया गया। जानबूझकर कर चोरी करने का प्रयास करने वालों पर प्रभावी लगाम लगाने के कदम उठाए गए। इसके साथ ही धनशोधन रोकथाम अधिनियम में संशोधन किया गया। विदेशों में जमा कालेधन के संदर्भ में दूसरे देशों की सरकारों से सक्रियता के साथ संवाद किया गया, साथ ही दोहरा कराधान बचाव समझौता एवं अन्य कर सूचना आदान-प्रदान समझौते के तहत सूचनाओं के आदान-प्रदान को बेहतर बनाया गया । विदेशी खाता कर अनुपालन अधिनियम (एफएटीसीए) के तहत अमेरिका के साथ सूचनाओं को साझा करने का समझौता किया गया। सीबीडीटी ने बताया कि इसके साथ ही बेनामी लेनदेन रोकथाम अधिनियम 1988 में संशोधन किया गया।

 

 

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