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PF पर सरकार का फिर यूटर्न, 8.7 से बढ़ाकर 8.8 किया सालाना ब्‍याज

माना जा रहा है कि कर्मचारी संगठनों के दबाव में इस फैसले को लिया गया है।

Author नई दिल्‍ली | April 29, 2016 5:03 PM
सरकार ने प्रोविडेंट फंड पर ब्‍याज दर में बढ़ोत्‍तरी की है।

प्रॉविडेंट फंड से जुड़े मुद्दों पर सरकार का यूटर्न जारी है। पीएफ निकासी से जुड़े नियमों में बदलाव करने को लेकर हुए जबरदस्‍त विरोध के बाद सरकार ने फैसले को वापस लिया था। अब सरकार ने पीएफ पर मिलने वाले ब्‍याज में कटौती को वापस लेने का फैसला किया है। सरकार अब 8.7 पर्सेंट के बजाए 8.8 सालाना के हिसाब से ब्‍याज देगी। माना जा रहा है कि कर्मचारी संगठनों के दबाव में इस फैसले को लिया गया है।

श्रम मंत्री बंडारू दत्‍तात्रेय ने 25 जनवरी को लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में बताया था कि ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्‍टीज ने 16 फरवरी को ईपीएफ के ग्राहकों को 8.8 पर्सेंट के हिसाब से ब्‍याज देने का प्रस्‍ताव दिया था, लेकिन मिनिस्‍ट्री ऑफ फाइनेंस ने इसे 8.7 पर्सेंट करने का फैसला किया। उन्‍होंने कहा था,  ‘सीबीटी ने फरवरी 2016 में हुई बैठक में 2015-16 के लिए ईपीएफओ के 5 करोड़ से अधिक अंशधारकों के लिए 8.8 प्रतिशत की अंतरिम दर से ब्याज दिए जाने का प्रस्ताव किया था। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने 8.7 प्रतिशत की ब्याज दर मंजूर की है।’

संभवत: यह पहला अवसर था जबकि वित्त मंत्रालय ने सीबीटी की सिफारिश नहीं मानी और अंशधारकों को देय ब्याज में कमी की। इससे पहले, ईपीएफओ ने 2013-14 और 2014-15 में 8.75 प्रतिशत का ब्याज दिया था। 2012-13 में 8.5 प्रतिशत तथा 2011-12 के 8.25 प्रतिशत ब्याज दिया गया था। ईपीएफओ के पिछले साल सितंबर में लगाए गए अनुमान के आधार पर कहा गया था कि निकाय अंशधारकों को वर्ष 2015-16 के लिए आसानी से 8.95 प्रतिशत तक का ब्याज दे सकता है। इसके बाद भी उसके पास 100 करोड़ रुपये बचेंगे। ईपीएफओ अपने अंशधारकों को निवेश पर मिलने वाले रिटर्न के आधार पर ब्याज देता है। कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने सीबीटी की 16 फरवरी को हुई बैठक में वित्त वर्ष के लिए 9 प्रतिशत के ब्याज की मांग की थी। लेकिन सीबीटी ने 8.8 प्रतिशत का ब्याज दर पर सहमति दी थी। लेकिन दत्‍तात्रेय ने इसे घटाकर 8.7 पर्सेंट कर दिया था।

पहले का विवाद
सरकार द्वारा पीएफ का पैसा निकालने के नियमों में बदलाव करने के बाद काफी हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया था।

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इस विवाद से जुड़े पहलू जानने के लिए वीडियो देखें 

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