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खाने के सामान, जूते-चप्पल, कपड़े समेत कई जरूरी सामान हो सकते हैं महंगे! 5% GST स्लैब को बढ़ाकर 6% करने का है प्लान

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो काउंसिल के अध्यक्ष और जीएसटी पैनल में शामिल अन्य राज्यों के वित्त मंत्री आगामी 18 दिसंबर को एक मीटिंग कर सकते हैं।

Author Edited By Nishant Nandan Published on: December 6, 2019 2:42 PM
जीएसटी को लेकर एक बैठक भी होने वाली है। प्रतीकात्मक त्स्वीर

केंद्र सरकार जल्दी ही Goods and Services Tax (GST), के स्लैब में बदलाव करने की योजना पर विचार कर रही है। Goods and Services Tax काउंसिल GST से होने वाले रेवेन्यू को बढ़ाने की खातिर कई जरूरी सामानों पर जीएसटी को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने की योजना बना रही है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि अगर जीएसटी स्लैब में यह बदलाव किया जाता है तो इससे 1,000 करोड़ रुपए के अतिरिक्त रेवेन्यू की प्राप्ति संभव हो पाएगी।

अभी GST के तहत 4 स्लैब हैं। इनमें अलग-अलग वस्तुओं पर लगने वाले 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 और 28 फीसदी टैक्स स्लैब शामिल हैं। 5 प्रतिशत जीएसटी मूल रूप से जरूरी सामानों मसलन – खाने के सामान, जूते और कपड़ों पर वसूले जाते हैं। सरकारी आकंड़ों के मुताबिक जिन सामानों पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है उनसे पूरे टैक्स का 5 प्रतिशत हिस्सा ही वसूल हो पाता है। सरकार का मंथली जीएसटी कलेक्शन टारगेट करीब 1.18 लाख करोड़ रुपया है। यहां बता दें कि जीएसटी काउंसिल के अध्यक्ष देश के वित्त मंत्री होते हैं।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो काउंसिल के अध्यक्ष और जीएसटी पैनल में शामिल अन्य राज्यों के वित्त मंत्री आगामी 18 दिसंबर को एक मीटिंग कर सकते हैं। इस बैठक में जीएसटी से होने वाली कमाई को बढ़ाने के अलावा टैक्स स्लैब में जरूरी सुधारों से संबंधित अहम निर्णय लिये जा सकते हैं। ‘Business Standard’ की खबर के मुताबिक जीएसटी काउंसिल ने इन सभी मुद्दों पर राज्यों की सरकारों से इनपुट भी मांगा है।

अगर जीएसटी को 5 फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी किया जाता है तो इसका मतलब यह है कि केंद्र सरकार 3 प्रतिशत जीएसटी लगाएगी और राज्य की सरकारें 3 प्रतिशत। कुछ राज्यों की सरकारों का कहना है कि इस बढ़ोतरी से टैक्स रेट में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाएगी। जीएसटी से होने वाली आमदनी को बढ़ाने, टैक्स प्रक्रिया में जरूरी बदलाव लाने और व्यापार आसान करने की दिशा में जरुरी सुझाव हासिल करने के लिए इसी साल अक्टूबर के महीने में सरकार ने एक अधिकारियों की एक कमेटी भी बनाई थी।

इस कमेटी में स्टेट जीएसटी काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र के कमिशनर के अलावा तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पंजाब के कमिशनर शामिल थें। इसके अलावा इसमें जीएसटी काउंसिल के संयुक्त सचिव और एग्जक्यूटिव वीपी भी शामिल थें।

जीएसटी के स्लैब को 5 फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी करने के पीछे एक वजह यह भी है कि इस टैक्स के तहत पिछले कुछ महीनों में हुई आमदनी अनुमान से कम है। बीते 19 महीनों में सबसे कम आमदनी सितंबर के महीने में हुई। इस महीने जीएसटी से सरकार की आय सिर्फ 91,916 करोड़ रुपए की हुई है। हालांकि अक्टूबर में यह ग्राफ थोड़ा उपर गया और आमदनी 95,380 करोड़ रुपए पर पहुंच गई।

 

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