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आंगनवाड़ी, आशा और मनरेगा मजदूरों का बढ़ सकता है मानदेय, सरकार उठाने जा रही है बड़ा कदम

केंद्र सरकार कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार वर्ष में बदलाव की योजना बना रही है। इसके लिए नेशनल सेंपल सर्वे ऑफिस 787 गांवों से सेंपल लेने का काम कर रहा है।

पीएम मोदी ने की 8 मुख्यमंत्रियों से बात। फोटो- एएनआई ट्विटर हैंडल

आंगनवाड़ी, आशा कार्यकत्री और मनरेगा मजदूरों को जल्द ही अच्छी खबर मिल सकती है। इसको लेकर सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। दरअसर, सरकार कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में बदलाव करने की योजना बना रही है।

योजना के मुताबिक, सरकार कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार वर्ष को 1986-87 से बदलकर 2019 करना चाहती है। साथ ही सरकार कंजप्शन बास्केट में भी बदलाव करना चाहती है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। यदि ऐसा होता है तो आंगवाड़ी-आशा कार्यकत्री, मनरेगा मजदूर और मिड-डे मील योजना में लगे लोगों के मानदेय में बढ़ोतरी हो सकती है। एक अधिकारी का कहना है कि नए आधार वर्ष कंजप्शन बास्केट की सितंबर में घोषणा हो सकती है।

कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए अलग होता है उपभोक्ता मूल्य सूचकांक: केंद्र सरकार कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए अलग से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जारी करती है। अभी इसकी गणना आधार वर्ष 1986-87 के आधार पर होती है। इसी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर विभिन्न राज्यों में कृषि और ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों का मिनिमम मानदेय तय किया जाता है।

एनएसएसओ कर रहा है सर्वे: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का नया आधार वर्ष तय करने के लिए नेशनल सेंपल सर्वे ऑफिस यानी एनएसएसओ सर्वे कर रहा है। इसके लिए पूरे देश के 787 गांवों से सेंपल इकट्ठा किए जा रहे हैं। एक अधिकारी का कहना है कि सर्वे कार्य पूरा होने तक सेंपल लेने का कार्य जारी रहेगा। एक अन्य अधिकारी का कहना है कि लेबर ब्यूरो 2011-12 में एक उपभोक्ता खर्च सर्वे किया गया था। लेबर ब्यूरो नई कंजप्शन बास्केट तय करने के लिए पहले इस सर्वे के आंकड़ों का इस्तेमाल करेगा। इसके बाद रेग्युलर प्राइस कलेक्शन शुरू किया जाएगा।

1 अप्रैल से बढ़ा है मनरेगा मानदेय: कोरोनाकाल में प्रवासी मजदूरों के अपने घरों को लौटने के साथ उनके सामने रोजगार की समस्या पैदा हो गई थी। इन प्रवासी मजदूरों को केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों की मदद से मनरेगा से जुड़े कामों में रोजगार दिलाया था। साथ ही मनरेगा के तहत मिलने वाले मानदेय में 1 अप्रैल 2020 से 20 रुपए की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। इसके बाद मनरेगा के तहत मिलने वाला मानदेय 198 रुपए से बढ़कर 202 रुपए हो गया है।

चालू वित्त वर्ष के लिए 75 हजार करोड़ रुपए का बजट: केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में मनरेगा योजना के लिए 75,000 करोड़ रुपए के बजट का आवंटन किया है। इस योजना की शुरुआत 2005 में हुई थी। योजना के तहत लाभार्थियों को एक साल में 100 दिन का रोजगार देने के प्रावधान है। 2009 में इस योजना का नाम मनरेगा किया गया था। इस समय देश के 625 जिलों में यह योजना लागू है।

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