Gold, Silver Long Term Outlook : सोने और चांदी की कीमतों में पिछले दो दिनों में तेज उछाल देखने को मिला है। इस बीच भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ डील से शेयर बाजार में भी नई हलचल बनी है। ऐसे में निवेशकों के मन में ये सवाल भी उठ रहे हैं कि अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ की दर 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने से क्या खास तौर पर गोल्ड की सेफ हेवन डिमांड कम होगी? अगर ऐसा हुआ तो लंबी अवधि में कीमती मेटल्स की कीमतों में नरमी देखने को मिलेगी या कुछ और फैक्टर्स की वजह से तेजी जारी रहेगी? कुल मिलाकर बड़ा सवाल ये है कि भारत-अमेरिका की इस टैरिफ डील का सोने-चांदी पर लॉन्ग टर्म असर क्या होगा? 

टैरिफ का टेंशन घटने का क्या असर होगा

आमतौर पर यही माना जाता है कि जब जियो-पोलिटिकल या ट्रेड टेंशन तनाव कम होता है, तो सेफ हेवन माने जाने वाले गोल्ड की मांग थोड़ी कमजोर होती है। कारोबारी माहौल सुधरने पर निवेशकों का रुझान इक्विटी जैसे एसेट्स की ओर बढ़ने लगता है। लेकिन मौजूदा हालात में भारत-अमेरिका का ट्रेड टेंशन कम होने के बावजूद सोने की कीमतों पर ज्यादा दबाव आने की संभावना कम है। ऐसा इसलिए क्योंकि सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी जारी रहने की संभावना है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता अब भी बनी हुई है। यही वजह है कि सोने को निवेशकों की स्टेबल डिमांड का सपोर्ट मिलता रहेगा। यानी सेफ हेवन डिमांड में अगर थोड़ी बहुत नरमी आई, तो भी यह असर काफी सीमित होगा, क्योंकि हर गिरावट पर नए खरीदार सामने आ सकते हैं।

Also read : Gold/Silver Rate Today : रिकॉर्ड गिरावट के बाद सोने-चांदी में बड़ी रिकवरी

चांदी में क्यों बेहतर हो सकता है रुझान

भारत-अमेरिका का टैरिफ टेंशन कम होने का चांदी पर असर ज्यादा पॉजिटिव हो सकता है। इसकी वजह ये है कि चांदी का इस्तेमाल इंडस्ट्रियल सेक्टर में बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में टैरिफ घटने से मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में तेजी आ सकती है, जिससे चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ेगी और ट्रेड फ्लो भी बेहतर होगा। यही वजह है कि लॉन्ग टर्म में चांदी की चाल सोने से ज्यादा मजबूत रह सकती है, हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव भी अधिक होने की आशंका रहती है।

क्या इक्विटी में बढ़ेगी निवेशकों की दिलचस्पी

टैरिफ टेंशन घटने के बाद शेयर बाजार में उछाल देखा गया। सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी बढ़त दर्ज हुई। इसके बावजूद इक्विटी बाजार के ऊंचे वैल्यूएशन, विदेशी निवेश की संभावित निकासी और सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी जैसे फैक्टर इस तेजी पर लगाम लगाने का काम कर सकते हैं। कुल मिलाकर सतर्कता बरतने वाले निवेशकों के बीच पोर्टफोलियो के डायवर्सिफिकेशन के लिए गोल्ड और सिल्वर जैसे एसेट्स की अहमियत बनी रहेगी। 

Also read : भारत-अमेरिका ट्रेड डील ऐतिहासिक, 2047 के विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम: पीयूष गोयल

सोने और चांदी का लॉन्ग टर्म आउटलुक 

टैरिफ का टेंशन कम होने पर सोने की कीमतों में तेजी का रुझान कुछ नरम पड़ना स्वाभाविक प्रतिक्रिया हो सकती है। लेकिन ग्लोबल रिस्क अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। ऐसे में तमाम देशों के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने को सपोर्ट देती रहेगी। वहीं चांदी को इंडस्ट्रियल डिमांड का फायदा भी मिल सकता है। ऐसे में सोना पॉजिटिव रुख के साथ एक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है, जबकि चांदी ज्यादा उतार-चढ़ाव के बावजूद लंबी अवधि में बेहतर प्रदर्शन दिखा सकती है।

Also read : Gold Silver ETF: एक साल में सिल्वर ने 152% तो गोल्ड फंड्स ने 76% दिया मुनाफा, कैसा रहा टॉप 5 स्कीम का रिटर्न

रिटेल इनवेस्टर्स के लिए क्या है सही रणनीति 

लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स के लिए सोना और चांदी दोनों पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बने रह सकते हैं। हालिया तेज उछाल के बाद चांदी में जरूरत से ज्यादा निवेश होने पर उसे बैलेंस करना बेहतर होगा। छोटे निवेशकों के लिए सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान यानी SIP के जरिये गोल्ड ईटीएफ में निवेश बेहतर तरीका हो सकता है। कुल मिलाकर फिलहाल यही लग रहा है कि भारत-अमेरिका टैरिफ डील से बाजार में थोड़ी स्थिरता आएगी, लेकिन सोना और चांदी की चमक लंबे समय तक बनी रहने की भी संभावना है।

(डिस्क्लेमर : इस आर्टिकल का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना है, निवेश की सलाह देना नहीं. निवेश का कोई भी फैसला पूरी जानकारी हासिल करने के बाद और सेबी से मान्यताप्राप्त इनवेस्टमेंट एडवाइजर की सलाह लेकर ही करें.)