How to Use Tax-Loss Harvesting to Reduce Tax Liability: निवेश करते समय हर कोई मुनाफे की उम्मीद करता है, लेकिन बाजार हमेशा एक जैसा नहीं रहता। कई बार गोल्ड, सिल्वर या किसी दूसरे एसेट में लगाया गया पैसा उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं देता और पोर्टफोलियो में “घाटा” दिखने लगता है। ऐसी स्थिति निवेशकों को निराश कर सकती है। लेकिन अगर सही उपाय पर अमल किया जाए, तो इस नुकसान को टैक्स बचाने के मौके में बदलकर नुकसान को कुछ कम किया जा सकता है। घाटे को टैक्स सेविंग के लिए इस्तेमाल करने के इस तरीके का नाम है टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग।
टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग क्या है
टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग (Tax Loss Harvesting) यानी TLH एक ऐसी रणनीति है जिसमें आप किसी घाटा देने वाले निवेश को ऐसे समय पर बेचते हैं, ताकि उस नुकसान को अपने दूसरे निवेश पर हुए मुनाफे के साथ एडजस्ट किया जा सके। ऐसा करने से आपका कुल टैक्सेबल कैपिटल गेन कम हो सकता है, जिससे आपको कम टैक्स देना पड़ता है। नुकसान में बेचे गए एसेट से मिले पैसों को बाद में फिर से किसी मिलते-जुलते एसेट में निवेश किया जा सकता है, ताकि बाजार में आपकी मौजूदगी बनी रहे।
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गोल्ड और सिल्वर फंड पर कैसे लगता है टैक्स
टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग का इस्तेमाल आप सोने और चांदी में किए गए निवेश में भी कर सकते हैं। लेकिन पहले यह जानना जरूरी है कि गोल्ड और सिल्वर फंड पर टैक्स किस हिसाब से लगता है। अगर गोल्ड या सिल्वर ETF को 12 महीने से कम समय तक होल्ड किया गया है या गोल्ड म्यूचुअल फंड को 24 महीने से कम समय तक होल्ड किया गया है, तो इससे होने वाला मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। इस पर टैक्स आपको अपने स्लैब के हिसाब से इनकम टैक्स देना पड़ता है। वहीं अगर अगर गोल्ड या सिल्वर ETF को 12 महीने और गोल्ड म्यूचुअल फंड को 24 महीने से ज्यादा समय तक रखने के बाद बेचा जाए, तो यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है और इस पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के बिना 12.5 फीसदी की दर से टैक्स लगता है।
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घाटा दिला सकता है टैक्स में राहत
मान लीजिए आपने एक गोल्ड ETF में 4 लाख रुपये का मुनाफा कमाया, लेकिन किसी दूसरे निवेश में आपको 1.5 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। अगर आप टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग नहीं करते, तो आपको पूरे 4 लाख रुपये पर टैक्स देना होगा। लेकिन अगर आप नुकसान वाले निवेश को बेचकर 1.5 लाख रुपये का लॉस बुक कर लेते हैं, तो आपका कुल टैक्सेबल गेन 2.5 लाख रुपये रह जाएगा। यानी आपको 4 लाख की जगह 2.5 लाख रुपये पर ही टैक्स देना पड़ेगा।
घाटे को 8 साल तक एडजस्ट करने का मौका
नए इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 111(1) और (2) के मुताबिक शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों तरह के कैपिटल गेन से एडजस्ट या सेट-ऑफ (set off) किया जा सकता है। वहीं लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को सिर्फ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन से ही सेट ऑफ किया जा सकता है। अगर किसी साल पूरा नुकसान एडजस्ट नहीं हो पाता, तो उसे अगले 8 साल तक कैरी-फॉरवर्ड करके भविष्य में होने वाले मुनाफे से भी एडजस्ट किया जा सकता है।
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वित्त वर्ष के अंत में क्यों फायदेमंद है यह रणनीति
वित्त वर्ष खत्म होने के आखिरी दिनों को निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो की समीक्षा करने का सही समय माना जाता है। इन दिनों अगर वे यह देख लें कि कौन सा निवेश घाटे में है और कहां मुनाफा हुआ है, तो टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग की योजना बना सकते हैं। इससे आपका घाटा भले ही मुनाफे में न बदले, लेकिन टैक्स का बोझ जरूर कम हो सकता है और साथ ही आपको नुकसान दे रहे निवेश से फ्री होकर अपने पोर्टफोलियो को नए सिरे से बैलेंस करने का मौका भी मिल सकता है।
(डिस्क्लेमर : इस आर्टिकल का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना है, निवेश की सलाह देना नहीं। निवेश का कोई भी फैसला पूरी जानकारी हासिल करने के बाद और सेबी रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर की सलाह लेकर ही करें।)
