सरकार ने सोने-चांदी के इंपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी में बड़ा इजाफा किया है। अब विदेश से आने वाले बुलियन (सोना-चांदी) पर पहले के मुकाबले दोगुना टैक्स लगेगा। पहले इंपोर्ट पर 5% बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) और 1% AIDC लगता था। यानी कुल 6% कस्टम टैक्स बनता था। इसके ऊपर 3% IGST जोड़ने के बाद कुल प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी 9.18% पड़ती थी।
अब सरकार ने BCD को 5% से बढ़ाकर 10% और AIDC को 1% से बढ़ाकर 5% कर दिया है। इससे कुल कस्टम लेवी 15% हो गई है। IGST जोड़ने के बाद कुल प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी बढ़कर 18.45% पहुंच गई है।
आसान भाषा में समझें तो पहले 100 रुपये के इंपोर्टेड सोने या चांदी पर करीब 9 रुपये टैक्स लगता था, अब उसी पर लगभग 18.45 रुपये टैक्स लगेगा। यानी टैक्स का बोझ 100% से ज्यादा बढ़ गया है।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब भारत में सोने और चांदी का इंपोर्ट तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 में भारत ने करीब 72 बिलियन डॉलर का सोना इंपोर्ट किया, जो पिछले साल से लगभग 25% ज्यादा है। वहीं चांदी का इंपोर्ट 12 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया, जिसमें 150% की भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई।
UAE FTA का पहलू
टैरिफ में इस बढ़ोतरी से भारत-UAE व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रास्ते होने वाले कीमती धातुओं के इंपोर्ट के आर्थिक समीकरण भी काफी बदल जाएंगे।
CEPA के तहत, भारत ने मई 2022 से शुरू होने वाले दस साल की अवधि में चांदी पर आयात शुल्क को धीरे-धीरे 10% से घटाकर शून्य करने पर सहमति जताई थी। UAE से चांदी के आयात पर रियायती शुल्क वर्तमान में 7% है।
अब जब भारत ने सामान्य शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया है, तो शुल्क का अंतर बढ़कर 8 प्रतिशत अंक हो गया है, जिससे दुबई के रास्ते होने वाले आयात के लिए एक बड़ा आर्बिट्रेज (arbitrage) अवसर पैदा हो गया है।
यह अंतर हर साल और बढ़ने वाला है, जब तक कि 2031 तक CEPA शुल्क घटकर शून्य नहीं हो जाता।
इस समझौते के तहत UAE से सोने के आयात को भी तरजीही पहुंच (preferential access) मिलती है। भारत ने टैरिफ रेट कोटा (TRQ) प्रणाली के माध्यम से दुबई से सोने के आयात की अनुमति दी थी, जिस पर शुल्क सामान्य ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ (MFN) दर से एक प्रतिशत अंक कम था।
यह कोटा 2022 में सालाना 120 टन से शुरू हुआ था और 2027 तक बढ़कर 200 टन होने वाला है, जो भारत के सालाना सोने के आयात का लगभग एक-चौथाई है। नए MFN शुल्क ढांचे के तहत प्रभावी शुल्क 15% होने के साथ, UAE कोटे के तहत आयातित सोना 14% शुल्क पर देश में प्रवेश करेगा।
शुल्क में बढ़ता यह अंतर वैश्विक बुलियन (सोना-चांदी) को दुबई के रास्ते भेजने को और बढ़ावा दे सकता है, भले ही UAE सोने या चांदी का खनन करने वाला देश न हो।
सरकार ने क्यों बढ़ाई ड्यूटी
समाचार एजेंसी भाषा ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार के सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का उद्देश्य गैर आवश्यक आयात पर रोक लगाना और विदेशी मुद्रा के उपयोग को कच्चे तेल, उर्वरकों, औद्योगिक कच्चे माल तथा पूंजीगत वस्तुओं जैसे आवश्यक आयातों के लिए प्राथमिकता देना है जो सीधे आर्थिक गतिविधि एवं खाद्य सुरक्षा को समर्थन देते हैं।
सोने पर शुल्क बढ़ाने से आयात नहीं घटेगा बल्कि कीमतें बढ़ेंगी: जीजेईपीसी
समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार, रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने बुधवार को कहा कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने से आयात पर अंकुश नहीं लगता बल्कि कीमतें बढ़ती हैं। परिषद ने स्थायी समाधान के लिए सरकार से उद्योग के हितधारकों के साथ बातचीत करने की अपील की है।
जीजेईपीसी ने बयान में कहा, ” आयात शुल्क बढ़ाने से शायद ही कभी सोने का आयात घटता है। यह केवल कीमतें बढ़ाता है। हाल के समय में सोने की कीमतें दोगुनी होने के बावजूद आयात उसी अनुपात में नहीं घटा है।”
परिषद के अनुसार, उच्च शुल्क तस्करी को बढ़ावा देते हैं और निर्यात लागत बढ़ाते हैं। वहीं निर्यातकों को अब नामित एजेंसियों से शुल्क-मुक्त सोना लेने पर प्रति किलोग्राम 28-30 लाख रुपये की बैंक गारंटी देनी पड़ रही है जिससे कार्यशील पूंजी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
बयान में कहा गया कि इसका सबसे गंभीर असर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) विनिर्माताओं पर पड़ेगा। परिषद में ऐसे 80 प्रतिशत सदस्य हैं जो ”गंभीर नकदी संकट” का सामना कर रहे हैं।
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भारत में सोने के प्रति लोगों के गहरे लगाव को देखते हुए सरकार एक आर्थिक योजना पर विचार कर सकती है। माना जा रहा है कि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और सोने के आयात को घटाने के लिए सरकार गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम को फिर से नए रूप में ला सकती है।
समाचार पत्र दैनिक जागरण ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस योजना के तहत लोगों को घरों में पड़ा सोना बैंकों में जमा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। बदले में जमाकर्ताओं को ब्याज दिया जाएगा। यानी जो सोना अभी घरों या लॉकरों में निष्क्रिय पड़ा है, उसे अर्थव्यवस्था में इस्तेमाल किया जा सकेगा। यहां पढ़ें पूरी खबर…
