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एक वैद्य ने खड़ी की सैकड़ों करोड़ की बैद्यनाथ आयुर्वेद कंपनी, कोरोना काल में बढ़ी गिलोय, च्यवनप्राश जैसे उत्पादों की मांग

आयुर्वेद के डॉक्टर यानी वैद्य के तौर पर काम करने वाले पंडित रामनारायण शर्मा ने इस कंपनी की स्थापना की थी। वह झारखंड के बैद्यनाथ धाम में वैद्य के तौर पर काम करते थे और वहीं उन्होंने आयुर्वेदिक दवाएं बनाना शुरू किया।

baidyanth companyपंडित रामनारायण शर्मा ने की थी बैद्यनाथ की शुरुआत

कोरोना काल में आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग में तेजी से इजाफा देखने को मिला है। गिलोय, अश्वगंधा, च्यवनप्राश और शहद समेत तमाम इम्युनिटी बूस्टर उत्पादों की बिक्री बढ़ी है। इसके चलते डाबर, हिमालय, पतंजलि और बैद्यनाथ जैसी दिग्गज आयुर्वेदिक कंपनियों को फायदा मिला है। खासतौर पर बैद्यनाथ की बात करें तो भले ही यह कंपनी प्रचार में कम दिखती है, लेकिन एक सदी से भी ज्यादा पुरानी इस कंपनी के प्रोडक्ट्स की मांग एक बार फिर से बढ़ी है। खासतौर पर गिलोय, गिलोय बटी और च्यवनप्राश जैसे उत्पादों की जमकर मांग है। बैद्यनाथ कंपनी की स्थापना की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। आयुर्वेद के डॉक्टर यानी वैद्य के तौर पर काम करने वाले पंडित रामनारायण शर्मा ने इस कंपनी की स्थापना की थी। वह झारखंड के बैद्यनाथ धाम में वैद्य के तौर पर काम करते थे और वहीं उन्होंने आयुर्वेदिक दवाएं बनाना शुरू किया।

रामनारायण शर्मा ने 1917 में दवाएं बनाना शुरू किया था। मांग में बढ़ोतरी दिखी तो उन्होंने कोलकाता में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की 1921 में स्थापना की थी। इसके बाद 1940 में पटना, 1941 में झांसी, 1942 में नागपुर और 1958 में इलाहाबाद में उन्होंने कंपनी के कामकाज की शुरुआत की थी। यही नहीं अब बैद्यनाथ की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स कई अन्य शहरों में भी हैं। कंपनी के फिलहाल सैकड़ों प्रोडक्ट्स मार्केट में हैं और 1 लाख से ज्यादा रिटेल आउटलेट्स तक पहुंच है। यही नहीं बैद्यनाथ की वेबसाइट के मुताबिक देश भर के करीब 50,000 आयुर्वेद चिकित्सक उसके नेटवर्क का हिस्सा हैं। एक वैद्य की ओर से खड़ी की गई इस कंपनी में फिलहाल 2,000 लोग काम करते हैं।

फिलहाल बैद्यनाथ ग्रुप का सालाना रेवेन्यू 500 करोड़ रुपये के करीब है। ग्रुप के मौजूदा सीईओ और प्रेसिडेंट विक्रम बैद्यनाथ कंपनी की सफलता को लेकर बताते हैं कि 1930 में देश में मलेरिया का प्रकोप फैला था और उस दौरान कंपनी के एक सीरप प्रांडा की काफी मांग हुई थी। इसके असरकारक साबित होने के चलते कंपनी पहली बार उस दौर में ब्रांड के तौर पर उभरी थी। इसके अलावा च्यवनप्राश भी कंपनी के शुरुआती उत्पादों में से एक है।

कोरोना काल में बढ़ी आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग: एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मार्च में कोरोना से निपटने के लिए लागू लॉकडाउन के बाद से ही शहद की मांग में 45 पर्सेंट का इजाफा हुआ है, जबकि च्यवनप्राश की मांग 85 फीसदी बढ़ गई है। यही नहीं हल्दी का भी लोग जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं और सेल में 40 पर्सेंट का इजाफा हुआ है। इसका सीधा लाभ आयुर्वेदिक, हर्बल उत्पादों की बिक्री करने वाली कंपनियों को हुआ है।

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