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SBI ने कहा- कम रहेगी GDP, मंदी और महंगाई की मार के बीच मोदी सरकार के लिए बुरी खबर

रिपोर्ट के मुताबिक जीडीपी कम रहने के लिए ऑटोमोबाइल की बिक्री, एविएशन सेक्टर में मंदी, औद्योगिक उत्पादन में गिरवाट और निर्माण और बुनियादी ढांचे के निवेश में गिरावट इसकी मुख्य वजह है।

Author नई दिल्ली | Updated: November 12, 2019 6:29 PM
पीएम मोदी (फाइल फोटो)

मंदी और महंगाई की मार के बीच मोदी सरकार के लिए बुरी खबर है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने बताया है कि दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 4.2 प्रतिशत पर रहने की संभावना है। भारतीय स्टेट बैंक के आर्थिक शोध विभाग की रिपोर्ट ‘एकोरैप’ में इसकी जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020-21 में इसमें बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इस दौरान जीडीपी दर 6.2 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक जीडीपी कम रहने के लिए ऑटोमोबाइल की बिक्री, एविएशन सेक्टर में मंदी, औद्योगिक उत्पादन में गिरवाट और निर्माण और बुनियादी ढांचे के निवेश में गिरावट इसकी मुख्य वजह है। पूर्व में आर्थिक वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गई थी। बता दें कि भारत की जीडीपी दर 6 साल के निचले स्तर पर है। यह मौजूदा वित्त वर्ष की जून तिमाही में 5 प्रतिशत पर थी।

‘एकोरैप’ रिपोर्ट के मुताबिक समग्र अग्रणी संकेतक के आधार दूसरी तिमाही में जीडीपी दर 5 प्रतिशत से घटकर 4.2 प्रतिशत पर पहुंच सकती है। इसके पीछे ऑटोमोबाइल औद्योगिक, निर्माण और बुनियादी ढांचे में सुस्ती मुख्य वजह है।’

मालूम हो कि इस साल की शुरुआत में अधिकांश गैर-सरकारी संगठन जीडीपी दर को 7.5 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान जता रहे थे। वहीं बजट पेश करने से पहले सरकार भी मान रही थी कि यह दर 8 प्रतिशत के आसपास दर्ज की जा सकती है। लेकिन सभी अनुमान के उल्ट जो आंकड़े सामने आए वह सरकार के लिए चिंता का विषय बन गए। नतीजन भारतीय अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर से गुजर रही है।

डीबीएस बैंक ने भी जताई चिंता: डेवलपमेंट बैंक ऑफ़ सिंगापुर (डीबीएस) ने कहा है कि भारतीय जीडीपी दर से जुड़े जुलाई-सितंबर तिमाही के के आंकड़े चिंताजनक है। डीबीएस बैंक ने अपनी डेली रिपोर्ट में इस पर चिंता जाहिर की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह आंकड़े चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि यह 6 साल में पहले ही सबसे निचले स्तर (5 प्रतिशत) पर पहुंच चुके हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका सीधा असर अमेरिकी डॉलर और भारतीय रुपए पर पड़ेगा। सुस्ती के पीछे बैंक ने पूंजीगत वस्तुओं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण में सुस्ती को बड़ी वजह माना है।

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