अडानी ग्रुप से जुड़े विदेशी निवेशक फिर विवादों में, अब डिफॉल्टर्स से जुड़ा नाम, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पैसों को लेकर उठाया सवाल

Gautam Adani: मॉरिशस के चार फंड हाउसेज का अडानी ग्रुप की कंपनी में करीब 50 हजार करोड़ रुपए का निवेश है। इन फंड हाउसेज के मालिकाना हक को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं।

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अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी (फाइल फोटो)

गौतम अडानी के अडानी ग्रुप की कंपनियां पिछले काफी समय से सुर्खियों में बनी हुई हैं। अब अडानी ग्रुप से जुड़े विदेशी फंडों का डिफॉल्टर कंपनियों से नाता सामने आया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मॉरिशस के फंड हाउसेज के निवेश वाली कंपनियों की जांच भी हो चुकी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मॉरिशस के फंड हाउस एलेरा इंडिया अपॉर्च्यूनिटीज फंड, क्रेस्टा फंड, अलबुला इन्वेस्टमेंट फंड और एपीएमएस फंड का अडानी ग्रुप की कंपनियों में 6.9 अरब डॉलर करीब 51 हजार करोड़ रुपए का निवेश है। इससे पहले इन चारों फंड हाउस की दो ऐसे कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी थी, जिनके फाउंडर भारत छोड़कर भाग गए हैं। तब इनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की गई थी। मॉरिसस फंड हाउस के निवेश वाली एक अन्य कंपनी दिवालिया हो चुकी है। जबकि एक अन्य कंपनी इथोपियन सरकार से विवाद के बाद बंद ही हो गई। इन चारों फंड हाउसेज के अडानी ग्रुप में निवेश को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा भी सवाल उठा चुकी हैं।

चारों फंड हाउस के मालिकाना हक को लेकर स्पष्टता नहीं: रिपोर्ट के मुताबिक, चारों फंड हाउस टैक्स हैवन देश मॉरिशस में रजिस्टर्ड हैं और इनके मालिकाना हक को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। फर्स्टपोस्ट की 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पैसों की कथित हेराफेरी को लेकर क्रेस्टा, अलबुला और एलेरा का कम से कम 1 जांच में नाम शामिल रहा है। भारतीय कानूनों के तहत पैसे को लौटाने से पहले शैल कंपनी को ट्रांसफर करना गैरकानूनी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे भारतीय एजेंसियों को पैसे के असली मालिक की पहचान के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

विपक्षी सांसदों ने लगाए गौतम अडानी पर आरोप: इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कुछ विपक्षी सांसदों का कहना है कि कहीं गौतम अडानी मॉरिशस के फंड हाउस के जरिए अपने पैसे की हेराफेरी तो नहीं कर रहे हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। पूर्व बैंकर और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पिछले सप्ताह इन फंड हाउसेज से जुड़े पैसे के मालिकाना हक को लेकर संसद में सवाल उठाया था। महुआ का कहना था कि इससे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए क्योंकि अडानी ग्रुप की पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स और पावर प्लांट्स जैसे देश के स्ट्रैटजिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भागीदारी है। मोइत्रा ने ब्लूमबर्ग न्यूज से कहा है कि हम जानना चाहते हैं कि यह किसका पैसा है। यदि यह पैसा अडानी का है तो आंशिक शेयरहोल्डर्स मुश्किल में हैं। यदि नहीं तो फिर किस विदेश व्यक्ति की हमारे स्ट्रैटजिक असेट्स में हिस्सेदारी है।

सरकार भी स्वीकार कर चुकी है जांच की बात: 19 जुलाई को मोइत्रा के सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा था कि ना तो फंड और ना ही अडानी ग्रुप की किसी कंपनी की जांच ईडी की ओर से की जा रही है। चौधरी ने कहा था कि अडानी ग्रुप की कुछ कंपनियों की जांच मार्केट रेगुलेटर सेबी की ओर से नियमों का पालन करने के संबंध में की जा रही है। हालाकि, चौधरी ने अडानी ग्रुप की उन कंपनियों का नाम नहीं बताया था जिनके खिलाफ जांच की जा रही है। वित्त राज्य मंत्री ने कहा था कि मॉरिशस के चारों फंड हाउसेज के लिए जिम्मेदारी रजिस्टर्ड व्यक्तियों के नाम संसद में बताए थे।

क्या कहता है अडानी ग्रुप?: अडानी ग्रुप के प्रवक्ता का कहना है कि हम विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को लेकर कुछ नहीं कह सकते हैं। हम सेबी के नियमों का हमेशा पालन करते हैं। सेबी ने पहले जो भी जानकारी ग्रुप की कंपनियों से मांगी थी, वो उपलब्ध करा दी गई थी। हाल ही में सेबी ने ग्रुप की कंपनियों से कोई जानकारी नहीं मांगी है। जून में सीएनबीसी-टीवी 18 से बातचीत में अडानी ग्रुप के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर ने कहा था कि यह फंड हाउस दशकों से हमारे निवेशक हैं और उनकी ग्रुप कंपनियों में होल्डिंग डी-मर्जर का नतीजा है।

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