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गैस मूल्य: रिलायंस ने कोर्ट से कहा- AAP सरकार को FIR दर्ज करने का अधिकार नहीं

आरआईएल के अलावा संप्रग के मंत्रियों एम वीरप्पा मोइली और मुरली देवड़ा (निधन हो चुका है), कंपनी चेयरमैन मुकेश अंबानी, पूर्व हाइड्रोकार्बन महानिदेशक वीके सिब्बल और अन्य अज्ञात लोगों के नाम एफआईआर में है।

Author नई दिल्ली | August 22, 2016 7:22 PM
दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सोमवार (22 अगस्त) को उसके द्वारा केजी बेसिन गैस का दाम बढ़ाने में कथित अनियमितताओं के मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की अपील करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि आप सरकार के पास उसके खिलाफ ऐसी प्राथमिकी दायर करने का अधिकार नहीं है। दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) द्वारा उसके खिलाफ 2014 में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की अपील करते हुए कंपनी ने न्यायमूर्ति संजीव सचदेव से कहा कि एसीबी के पास इस तरह के मामलों की जांच का अधिकार नहीं है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा, ‘दिल्ली सरकार के पास कभी इस तरह की एफआईआर दर्ज करने का अधिकार नहीं था। यह एफआईआर इस आधार पर खारिज की जानी चाहिए क्योंकि इसे ऐसे पुलिस स्टेशन (एसीबी) ने दर्ज किया है जिसके पास इसका अधिकार नहीं है।’ अदालत ने कंपनी की याचिका पर आप सरकार से जवाब मांगा है।

कंपनी के अलावा पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के मंत्रियों एम वीरप्पा मोइली और मुरली देवड़ा (निधन हो चुका है), रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, पूर्व हाइड्रोकार्बन महानिदेशक वी के सिब्बल और अन्य अज्ञात लोगों का नाम एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर में है। हालांकि, इन सभी ने अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन किया है। सुनवाई के दौरान साल्वे ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री (अरविंद केजरीवाल का पहला कार्यकाल) ने एसीबी को इस मामले में एफआईआर दायर करने को कहा, जबकि उसके पास मामले की जांच का अधिकार नहीं था। उन्होंने उच्च न्यायालय की 4 अगस्त की खंडपीठ के उस आदेश का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि एसीबी के अधिकार विभिन्न विभागों में रिश्वतखोरी के मामलों, जो उपराज्यपाल के प्रशासनिक नियंत्रण में आते हैं, की जांच का अधिकार है।

उसे केंद्र सरकार के कर्मचारियों की जांच का अधिकार नहीं है। इस पर दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि सरकार 4 अगस्त के आदेश को चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय जाने की प्रक्रिया में है। इस पर अदालत ने मेहरा से पूछा कि एफआईआर में अभी तक क्या हुआ है। इसके जवाब में मेहरा ने कहा कि पिछले दो साल से इस मामले में कुछ नहीं हुआ है क्योंकि एसीबी के अधिकारों से संबंधित मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की है।

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