टीसीएस इंटर्न से टाटा संस के चेयरमैन तक, ऐसी है रतन टाटा के भरोसेमंद एन चंद्रशेखरन की कहानी

रतन टाटा के सबसे भरोसेमंद लोगों में से एक एन चंद्रशेखरन की कहानी कम दिलचस्‍प नहीं है। किसान परिवार से ताल्‍लुक रखने वाजे चंद्रा ने अपने सपनों को जीया नहीं बल्‍कि उसे साकार भी किया। तभी वो टाटा ग्रुप के प्रमुख बन सके। आइए आपको भी बताते हैं उनकी कहानी।

Ratan tata And N Chandra
एन चंद्रशेखरन ग्रुप में रतन टाटा के सबसे भरोसेमंद लोगों में से एक हैं। (Photo Express Archive)

एन चंद्रशेखरन अपने परिवार की तरह फार्मिंग में अपना कर‍ियर बनाते तो वो कभी देश के सबसे बड़े ग्रुप टाटा के चैयरमैन कभी ना बन पाते। लेकिन लेकिन कंप्यूटर और प्रोग्रामिंग के लिए उनका प्यार ने उन्हें एक अलग दिशा दी। जिसकी वजह से वो आज देश के सबसे बड़े ग्रुप के प्रमुख बने हुए हैं। खास बात तो यह है कि जिस ग्रुप के वो प्रमुख हैं, उन्‍होंने कभी इस ग्रुप में इंटर्न के रूप में शुरुआत की थी।

खेती छोड़ कंयूटर साइंस से किया पोस्‍ट ग्रेजुएशन
ऐसा नहीं है कि चंद्रशेखरन ने खेती करने की कोशिश नहीं की लेकिन जल्द ही महसूस किया कि यह उनके करियर को वो दिशा नहीं दे पाएगा। अप्‍लाइड साइंस में ग्रेजुएशन करने के बाद पिता ने उन्‍हें कंप्यूटर में आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्‍साहित किया। तमिलनाडु के नमक्कल जिले में परिवार के खेतों को छोड़कर, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की पढ़ाई करने के लिए चंद्रा ने तिरुचिरापल्ली में रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से कंप्यूटर साइंस में पोस्‍ट ग्रेजुएशन विज्ञान में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में शामिल हो गए।

इंटर्न से सीईओ तक
वह 1986 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के साथ एक इंटर्न के रूप में टाटा ग्रुप में शामिल हुए। दो महीने के बाद 1987 में फुल टाइम इंजीनियर के रूप में कंपनी में एंट्री ली। उसी वक्‍त से चंद्रशेखरन टाटा ग्रुप के इंप्‍लाई हैं। समूह में उन्‍हें 35 वर्ष बीते चुके हैं। चंद्रशेखरन ने धीरे-धीरे अपने आपको आगे बढ़ाया और 90 के दशक में वो मैनेज्‍मेंट में शामिल हो गए। टीसीएस को दुनिया भर में मशहूर करने में एन चंद्रशेखरन का एक बड़ा रोल रहा है। जिसके बाद उन्‍हें 2009 में कंपनी का सीईओ बना दिया गया।

2017 में बने टाटा ग्रुप के प्रमुख
2017 में, वह टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष बने, जिसमें रसायन, ऑटोमोटिव, कंसल्टेंसी सर्विसेज, हॉस्पिटैलिटी और स्टील सहित 30 से अधिक कारोबार जुड़े हुए हैं। आज वह उस ग्रुन का नेतृत्व कर रहे हैं जिसके वैश्विक स्तर पर 750,000 से अधिक कर्मचारी हैं और जिसकी कीमत 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक है, जैसा कि मई 2021 में बताया गया था।

जेआरडी और रतन टाटा की विरासत को आगे बढ़ाया
एन चंद्रशेखरन कॉरपोरेट वर्ल्‍ड में ऐसे प्रभावशाली नेता बनकर उभरे हैं जिन्‍होंने जेआरडी और रतन टाटा जैसे टाटा अध्यक्षों की विरासत को आगे बढ़ाया है। खास बात तो ये है कि टाटा ग्रुप के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब नॉन पारसी समुदाय का शख्‍स टाटा ग्रुप का प्रमुख बना।

कोविड 19 की लड़ाई में निभाई प्रमुख भूमिका
एन चंद्रशेखरन के नेतृत्व में ही टाटा समूह ने कोविड महामारी के खिलाफ लड़ाई में एक प्रमुख कॉर्पोरेट यूनिट के रूप में उभरा। जिसने COVID-19 से संबंधित गतिविधियों के लिए 14,000 करोड़ रुपए से ज्‍यादा का देश को समर्पित किया। जिसमें अस्पतालों की स्थापना और गहन देखभाल इकाइयों के साथ मौजूदा सुविधाओं की क्षमता बढ़ाने तक शामिल हैं। एक समय में समूह महामारी के दौरान भारत की मेडिकल ऑक्सीजन की 10 फीसदी मांग को पूरा कर रहा था।

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