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पूर्व RBI ड‍िप्‍टी गवर्नर ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, कहा- कृषि लोन तो बढ़ा, पर उत्पादन कम रहा

खान ने कहा कि पिछले कुछ साल के दौरान कृषि क्षेत्र का कर्ज जहां 18 प्रतिशत बढ़ा है वहीं कृषि उत्पादन केवल 12 प्रतिशत बढ़ा है।

Author Updated: August 22, 2017 7:07 PM
खान ने कहा कि सरकार हर साल बजट में अल्पकालिक कृषि ऋृण के लिये नया लक्ष्य तय करती है और बैंक लक्ष्य से अधिक कृषि ऋृण का वितरण करते हैं। (PTI)

रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर एच आर खान ने हर साल बैंकों के लिये कृषि ऋृण लक्ष्य घोषित करने की सरकार की नीति की कड़ी आलोचना करते हुये इस व्यवस्था को जोखिमपूर्ण बताया और कहा कि यह लंबे समय में फूटने वाला बुलबुला साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार जो लक्ष्य तय करती है, बैंकिंग तंत्र उसे पूरा करने के लिये काफी सक्रिय रहता है। खान कल शाम यहां एक उद्योग संगठन द्वारा आयोजित पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे। इसका आयोजन सलाहकार फर्म डी एण्ड बी ने किया। खान ने कहा कि सरकार हर साल बजट में अल्पकालिक कृषि ऋृण के लिये नया लक्ष्य तय करती है और बैंक लक्ष्य से अधिक कृषि ऋृण का वितरण करते हैं। खान ने कहा कि इसमें से अधिकतर अल्पकालिक फसली ऋृण होता है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत कृषि क्षेत्र में पूंजी निवेश के जरिये उसकी दीर्घकालिक जरूरत को पूरा करने की है। उन्होंने कहा कि आज कृषि क्षेत्र में पूंजी निवेश का अनुपात कुल कृषि ऋृण के मुकाबले पांच साल पहले के 35 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत रह गया है।

खान ने कहा कि पिछले कुछ साल के दौरान कृषि क्षेत्र का कर्ज जहां 18 प्रतिशत बढ़ा है वहीं कृषि उत्पादन केवल 12 प्रतिशत बढ़ा है। दूसरी तरफ विभिन्न कारणों के चलते किसानों की आय लगातार कम हो रही है। उनकी उपज का कम मूल्य होना, मजदूरी का बोझ बढ़ना और कृषि में काम आने वाले विभिन्न सामानों की लागत बढ़ना इसके मुख्य कारण हैं। कृषि क्षेत्र में भंडार गृहों, आपूर्ति श्रंखला और दूसरी ढांचागत सुविधाओं में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है।

खान पिछले साल ही रिजर्व बैंक से सेवानिवृत हुए हैं। उन्होंने कहा कि कृषि कर्ज एक दीर्घकालिक बुलबुला है, जिसे सार्वजनिक नीति के जरिये समाधान करना मुश्किल होगा। कई बार अल्पकालिक कृषि रिण उपभोग कार्यों के लिये लिया जाता है, साथ ही उन्होंने दावा किया कि इस तरह प्राप्त राशि का एक चौथाई धन सोना खरीदने के लिये भी इस्तेमाल किया जाता है।

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