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Reliance Industries के डायरेक्टर बने पूर्व सेंट्रल विजिलेंस कमिश्नर, CBI विवाद में सुर्खियों में आया था केवी चौधरी का नाम

मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली आरआईएल (RIL) ने शुक्रवार देर रात एक स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में केवी चौधरी के नियुक्ति की सूचना दी।

Author Updated: October 20, 2019 8:27 AM
भारत के पूर्व सीवीसी केवी चौधरी। (फाइल फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

पूर्व सेंट्रल विजिलेंस कमिश्नर और सीबीआई विवाद के दौरान सुर्खियों में रहे केवी चौधरी अब रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के जहाज पर सवार हो चुके हैं। केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC) के रूप में रिटायर्ड होने के चार महीने बाद केवी चौधरी को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के बोर्ड में एक स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) नियुक्त किया गया है। हालांकि, सेवानिवृत्ति के बाद चौधरी के लिए यह पहला काम नहीं है। 9 जून को सीवीसी से रिटायर्ड होते ही उन्होंने 25 जून को ‘सीसीएल प्रॉडक्ट (इंडिया) लिमिटेड’ के बोर्ड में निदेशक के तौर पर कार्यभार संभाला था।

गौरतलब है कि सीवीसी अधिनियम के मुताबिक एक सेवानिवृत्त केंद्रीय सतर्कता आयुक्त किसी भी राजनयिक असाइनमेंट या लाभकारी सरकारी कार्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं कर सकता। हालांकि, उसे निजी क्षेत्र में काम करने से भी नहीं रोका जा सकता है। वैसे अधिनियम में कूलिंग-ऑफ टाइम-पीरियड को भी निर्धारित नहीं किया गया है या फिर निजी क्षेत्र की नौकरी लेने से पहले किसी अनुमति का प्रावधान है।

मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली आरआईएल (RIL) ने शुक्रवार देर रात एक स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में केवी चौधरी के नियुक्ति की सूचना दी। कंपनी ने बताया कि चौधरी कंपनी के किसी भी निदेशक से संबंधित नहीं थे। “स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा जारी किए गए 20 जून, 2018 के परिपत्र के अनुसार, हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि केवी चौधरी सेबी के किसी आदेश या किसी अन्य अथॉरिटी के आधार पर निदेशक का पद संभालने के मामले में वंचित नहीं हैं”

बतौर सीवीसी केवी चौधरी के कार्यकाल में ही सीबीआई ने अपने महकमें में दो टॉप अधिकारियों के बीच ऐतिहासिक जंग देखी थी। उस वक्त सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और तत्कालीन डेप्यूटी स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए थे। उस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चौधरी को मामले की जांच के निर्देश दिए थे। हालांकि, जांच की निगरानी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश जस्टिस एके पटनायक ने कहा था कि बतौर मध्यस्थ अस्थाना के लिए चौधरी ने उनके निवास का दौरा किया था।

वर्मा को इसी साल जनवरी में बर्खास्त कर दिया गया था और अस्थाना को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। सीवीसी की जांच रिपोर्ट में वर्मा को हटाने का निर्णय काफी शालीनता से लिया गया। चौधरी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मामले में गवाह सतीश सना बाबू, जिन्होंने अस्थाना को भ्रष्टाचार के मामले में फंसाया था, वह अविश्वसनीय था। 1978 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी, चौधरी को अगस्त 2014 में आयकर विभाग की शीर्ष नीति बनाने वाली केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

उनकी सेवानिवृत्ति पर, उन्हें 10 जून, 2015 को केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC) बनाए जाने से पहले, काले धन से संबंधित मुद्दों पर राजस्व विभाग के सलाहकार के रूप में भी नियुक्त किया गया था। गौरतलब है कि सीवीसी के रूप में उनके चयन को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई थी, लेकिन याचिका को खारिज कर दिया गया।

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