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झटपट ‘नूडल्स’ के लिए मसविदा मानक सार्वजनिक

सरकार ने शुक्रवार बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) ने इंस्टंट नूडल्स बनाने को लेकर मसौदा मानकों को टिप्पणियों के लिए सार्वजनिक किया है।

Author नई दिल्ली | August 13, 2016 3:25 AM

सरकार ने शुक्रवार बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) ने इंस्टंट नूडल्स बनाने को लेकर मसौदा मानकों को टिप्पणियों के लिए सार्वजनिक किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा लोकसभा में बताया कि एफएसएसएआइ ने इंस्टंट नूडल्स बनाने के लिए अवयवों, गुणवत्ता तथा सुरक्षा मानकों और कच्चे माल के संबंध में टिप्पणियों के लिए गत 20 जुलाई को मसौदा मानकों को सार्वजनिक रूप से जारी किया है। जिन्हें बाद में अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा।

उन्होंने कुंवर हरिवंश सिंह के प्रश्न के उत्तर में यह भी बताया कि नूडल्स की सीजनिंग (मसाले) के संबंध में मानक मसौदा गत 12 जुलाई को जारी किया गया। नड्डा द्वारा दिए गए लिखित जवाब के अनुसार मानकों में नूडल्स बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कच्ची सामग्री और उसके साथ दिए जाने वाले मसाले का उल्लेख है और बनकर तैयार होने वाले उत्पाद की गुणवत्ता तथा सुरक्षा मानक भी निर्दिष्ट हैं।
इसमें कहा गया है कि नूडल्स गेहूं के आटे और-या चावल के आटे और-या बाजरा आदि अन्य अनाज और पानी के मुख्य अवयवों के प्रयोग से बनाए जा सकते हैं। मानकों के अनुसार इनमें मसाले और जरूरत होने पर स्टार्च, सूखे मेवे और सब्जियां, खाद्य प्रोटीन तथा अंडे का पाउडर मिलाया जा सकता है।
मंत्री के जवाब के अनुसार उत्पाद अच्छे गुणवत्तापूर्ण रंग, दिखावट, खुशबू और स्वाद वाला होगा और इसमें अतिरिक्त रंग, अप्रिय स्वाद, गंदगी, कीड़ों के लार्वा और अन्य किसी तरह का बाहरी पदार्थ एवं अशुद्धता नहीं होेगी। उन्होंने कहा, ‘लेबल संबंधी आवश्यकताओं के उल्लंघन की स्थिति में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों और नियमों के अनुसार संबंधित राज्य प्राधिकार कार्रवाई करेंगे। स्वास्थ्य राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि मानक तैयार करने का काम केंद्र का है लेकिन उन्हें लागू करना राज्यों का काम है। नियमित निगरानी, निरीक्षण भी राज्य सरकारें करती हैं। दूसरी ओर लोकसभा में ही एक सवाल के जवाब में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने स्पष्ट किया कि स्कूलों और कॉलेजों में एनसीसी प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाने का सरकार का कोई विचार नहीं है।

क्योंकि इतने व्यापक पैमाने पर एनसीसी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त ढांचा नहीं है। रक्षा मंत्री ने प्रश्नकाल के दौरान बताया कि यदि एनसीसी प्रशिक्षण को स्कूल और कॉलेजों में अनिवार्य बना दिया गया, तो इसके लिए करीब चार करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करना होगा जबकि अभी केवल 13 लाख को ही यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

जिसे बढ़ाकर 15 लाख तक करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि इजराइल में प्रत्येक नागरिक के लिए सैन्य प्रशिक्षण अनिवार्य है लेकिन अमेरिका में शायद अब ऐसी व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया, ‘विभिन्न पक्षों की ओर से इस प्रकार के सुझाव मिले हैं कि एनसीसी प्रशिक्षण को स्कूलों और कालेजों में अनिवार्य बनाया जाए। लेकिन जरूरी ढांचे, श्रम शक्ति और संसाधनों के लिहाज से इन सुझावों को व्यावहारिक नहंीं पाया गया।’ नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) को 1948 में संसद में एक कानून बनाकर लागू किया गया था।

इससे पूर्व कपिल मोरेश्वर पाटील ने अपने मूल सवाल के संबंध में दिल्ली में गुरुवार हुए एक हादसे का जिक्र किया और कहा कि हादसे का शिकार व्यक्ति 90 मिनट तक तड़पता रहा लेकिन कोई उसकी मदद को नहीं आया। पाटील का कहना था कि यदि हर नागरिक को एनसीसी का प्रशिक्षण दिया गया होता तो वहां से गुजरने वाला कोई व्यक्ति पीड़ित की मदद कर सकता था।

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