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पांचवी से आगे पढ़ नहीं पाए थे धर्मपाल गुलाटी, पर सैलरी गोदरेज, हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईटीसी के सीईओ से भी ज्यादा

MDH Masala Owner, Mahashay Dharampal Gulati News: पांचवीं पास गुलाटी को दादा जी या महाशयजी के नाम से भी लोग जानते हैं, वे रोजाना फैक्ट्री, बाजार और डीलर्स से मिलते थे।

एमडीएच मसालों के सीईओ धरमपाल गुलाटी

अब तक आपने एक कंपनी के सीईओ को किसी मैगजीन के कवर पेज पर ही देखा होगा। लेकिन यहां हम जिनकी बात कर रहे हैं, वह देश के लोगों के लिए जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं। एमडीएच मसालों के हर पैक पर नजर आने वाले धर्मपाल गुलाटी को कौन नहीं जानता। इकॉनमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पांचवी पास गुलाटी ने वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान 21 करोड़ रुपये की कमाई की थी, जो गोदरेज कंज्यूमर के आदि गोदरेज और विवेक गंभीर, हिंदुस्तान यूनिलीवर के संजीव मेहता और आईटीसी के वाई सी देवेश्वर की कमाई से भी कहीं ज्यादा थी। उनकी कंपनी ‘महाशियां दी हट्टी’ जो एमडीएच के नाम से मशहूर है, ने 2016-17 में कुल 213 करोड़ रुपये का मुनाफा हासिल किया था। कंपनी की 80 प्रतिशत हिस्सेदारी गुलाटी के पास थी। पांचवीं पास गुलाटी को दादा जी या महाशयजी के नाम से भी लोग जानते हैं, वे रोजाना फैक्ट्री, बाजार और डीलर्स से मिलते थे। जब तक उनको यह तसल्ली नहीं होती कि कंपनी में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है, उन्हें चैन नहीं मिलता। वह रविवार को भी फैक्ट्री जाते थे।

दूसरी पीढ़ी के व्यवसायी गुलाटी ने 60 साल पहले एमडीएच जॉइन किया था। वह कहते थे, “मेरे काम करने के पीछे यह प्रेरणा रहती है कि उपभोक्ताओं को कम से कम दाम में अच्छी गुणवत्ता का उत्पाद उपलब्ध कराया जाए। मैं अपनी क्षमता के मुताबिक अपनी सैलरी का 90 फीसदी हिस्सा चैरिटी में देता हूं।” 1919 में पाकिस्तान के सियालकोट में एक छोटी सी दुकान खोलने वाले चुन्नी लाल ने कभी नहीं सोचा होगा कि उनका बेटा इस छोटी सी दुकान को 1500 करोड़ रुपये के साम्राज्य में तब्दील कर देगा। गुलाटी के इस करोड़ों के साम्राज्य में मसाला कंपनी, करीब 20 स्कूल और एक हॉस्पिटल शामिल है।

देश के विभाजन के बाद गुलाटी दिल्ली के करोल बाग आकर बस गए थे और तब से वह भारत में 15 फैक्ट्रियां खोल चुके हैं जो करीब 1000 डीलरों को सप्लाई करती हैं। एमडीएच के दुबई और लंदन में भी ऑफिस हैं। यह मसाला कंपनी लगभग 100 देशों से एक्सपोर्ट करती है। गुलाटी के बेटे कंपनी का हर कामकाज संभालते हैं वहीं उनकी 6 बेटियां डिस्ट्रिब्यूशन का काम संभालती हैं। गुलटी का कहना था, “बाकी कंपनियां हमारी प्राइसिंग स्ट्रैटजी को अमल में लाने की कोशिश करती हैं। चूंकि हम कीमतें कम रखते हैं इससे हमें ओवरऑल फायदा ज्यादा होता है।”

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