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रॉल्स रॉयस कार से चलते थे देश के पहले पीएम पंडित जवाहरलाल नेहरू, लॉर्ड माउंटबेटन ने दी थी गिफ्ट

इस कार को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी इस्तेमाल करते थे। यही नहीं ईरान के शाह और पाकिस्तान के मोहम्मद अली जिन्ना भी जब भारत आए थे तो उन्होंने इस कार की सवारी की थी।

jawahar lal nehruलॉर्ड माउंटबेटन की दी हुई कार से चलते थे जवाहर लाल नेहरू (फाइल फोटो)

भारत में कारों का इतिहास बहुत पुराना नहीं है। देश की पहली कार कंपनी हिंदुस्तान मोटर्स की स्थापना घनश्याम दास बिड़ला ने की थी, जिसकी बनाई अंबेसडर कार देश में दशकों तक शाही सवारी का प्रतीक रही थी। हालांकि देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू ब्रिटिश शासन में देश के आखिरी वायसराय रहे लॉर्ड माउंटबेटन की ओर से गिफ्ट की गई कार रॉल्स रॉयस से चलते थे। लॉर्ड माउंटबेटन को भी यह कार ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलिजाबेथ ने दी थी, जिसे देश की आजादी के बाद वह भारत छोड़ गए थे और इस गाड़ी को ‘स्टेट कार’ का दर्जा मिला था। यही नहीं बाद में भी इस गाड़ी का इस्तेमाल किया गया था। फिलहाल यह देश की विंटेज कारों में से एक है।

विंटेज ऐंड क्लासिक कार क्लब ऑफ इंडिया के मुताबिक इस कार को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी इस्तेमाल करते थे। यही नहीं ईरान के शाह और पाकिस्तान के मोहम्मद अली जिन्ना भी जब भारत आए थे तो उन्होंने इस कार की सवारी की थी। भारत सरकार ने इस कार को 1960 तक इस्तेमाल किया था। बता दें कि देश में कार के पहले मालिक टाटा ग्रुप के फाउंडर जमशेदजी टाटा थे। भारत में लंबे अरसे तक कार एक लग्जरी सवारी रही। यहां तक कि पहली कार कंपनी 1942 में हिंदुस्तान मोटर्स की स्थापना घनश्याम दास बिड़ला ने की थी। उनके पास उस दौर में पैकार्ड 120 कार थी, जिसका इस्तेमाल अकसर महात्मा गांधी करते थे।

यही नहीं भारत में सस्ती कारों का दौर भी काफी देर से शुरु हुआ था। इसकी शुरुआत मारुति सुजुकी 800 की 1983 में लॉन्चिंग से हुई थी। इस कार की लॉन्चिंग का देश में इस कदर उत्साह था कि तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी भी कार की लॉन्चिंग के मौके पर मौजूद थीं। उन्होंने ही कार के पहले ग्राहक हरपाल सिंह को चाबी सौंपी थी। इस दौरान राजीव गांधी भी मौजूद थे।

हरपाल सिंह ने पूरी जिंदगी ड्राइव की थी मारुति 800: कहा जाता है कि हरपाल सिंह ने इस कार को पूरी जिंदगी ड्राइव किया था और कभी बेचने के बारे में नहीं सोचा। उस दौर में इस कार को लेकर यह उत्साह था कि हरपाल सिंह जब अपने पहले सफर पर दिल्ली से मेरठ के लिए निकले तो रास्ते में जब वह रुके तो लोग गाड़ी को देखने के लिए इकट्ठे हो जाते थे।

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