521 साल पहले आज ही लगी थी भारत में पहली यूरोपीय फैक्ट्री, यहीं से शुरू हुई भारत की गुलामी की कहानी

पुर्तगाल के नाविक कैब्रल ने आज ही के दिन कालीकट में पहली यूरोपीय फैक्ट्री लगाई थी। इसके करीब 100 साल बाद ईस्ट इंडिया कंपनी आई और देखते-देखते पूरा भारत गुलाम बन गया।

First European Factory in India
पुर्तगाल के कैब्रल ने भारत में पहली यूरोपीय फैक्ट्री लगाई थी। (Image: Wikimedia Commons)

भारत के इतिहास में 13 सितंबर का अहम स्थान है। आज से 521 साल पहले इसी दिन भारत के गुलाम होने की कहानी शुरू हुई थी। पुर्तगाल (Portugal) के खोजी नाविक पेद्रो अल्वारेज कैब्रल (Pedro Alvarez Cabral) ने 1500 ईस्वी में 13 सितंबर को कालीकट (Calicut) में पहली यूरोपीय फैक्ट्री (First European Factory in India) लगाई थी। इसके बाद यूरोपीय कंपनियों ने धीरे-धीरे पूरे भारत को अपने अधीन कर लिया था।

Brazil की खोज के बाद भारत पहुंचा था कैब्रल

यूरोपीय देशों के विस्तारवाद के पहले दौर में पुर्तगाल और स्पेन (Spain) का दबदबा था। दोनों देश साहसी नाविकों को नए समुद्री मार्ग खोजने और अन्य महादेशों तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करते थे। कैब्रल भी उसी दौर का नाविक था। यूरोप के लिए ब्राजील (Brazil) की खोज करने के बाद कैब्रल भारत की यात्रा पर निकल पड़ा। वह सितंबर में कालीकट पहुंचा, जहां उसने राजा से फैक्ट्री और वेयरहाउस बनाने की मंजूरी प्राप्त कर ली। इसके बाद 13 सितंबर को कालीकट में पहली यूरोपीय फैक्ट्री लगाई गई।

Calicut पर पुर्तगालियों पे बरसाए थे बम

कैब्रल की यह यूरोपीय फैक्ट्री अधिक दिन ठीक से चल नहीं पाई। उसी साल 16-17 दिसंबर को अरब व्यापारियों और स्थानीय लोगों के एक समूह ने फैक्ट्री पर हमला बोल दिया। इस हमले में कैब्रल के कई सहयोगी मारे गए। इस हमले को पुर्तगालियों ने अपनी बेइज्जती माना और कालीकट के शासक को 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा। कोई उत्तर नहीं मिलने से नाराज कैब्रल ने कालीकट शहर पर बम बरसाने के आदेश दे दिए। उसके जहाजों ने पूरे दिन बम बरसाए, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई।

कैब्रल ने शुरू की Gunboat Diplomacy

इस घटना ने अरब व्यापारियों की स्थिति भारत में कमजोर कर दी। यहीं से यूरोपीय देशों की कुख्यात गनबोट डिप्लोमेसी (Gunboat Diplomacy) की शुरुआत हुई। पुर्तगालियों को भारत के मसाले के व्यापार से काफी फायदा हुआ, जो अंतत: स्पेन, फ्रांस (France) और ब्रिटेन (Britain) जैसे यूरोपीय देशों को भारत खींच लाया। हालांकि भारत और यूरोप के व्यापार में करीब एक सदी तक पुर्तगाल और स्पेन का दबदबा रहा।

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100 साल बाद आई East India Company

ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) के आने से पुर्तगाल का वर्चस्व कम होने लगा। कंपनी ने 1611 में मसुलीपतनम में पहली और 1612 में सूरत में दूसरी फैक्ट्री लगाई। 1612 में ही ईस्ट इंडिया कंपनी ने सुवली की लड़ाई (Battle Of Swally) में पुर्तगाल को मात दी। जल्दी ही ईस्ट इंडिया कंपनी ने मुगल साम्राज्य से भी व्यापार करने की मंजूरी प्राप्त कर ली।

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