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वित्त मंत्रालय ने मूडीज के तरीक़े पर उठाए सवाल, भारत में सुधार प्रक्रिया को बताया था धीमा

वित्त मंत्रालय ने मूडीज द्वारा अपनाए गए तरीके पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने सरकार द्वारा आगे बढ़ाए गए सुधार उपायों को नजरअंदाज किया।

Author नई दिल्ली | September 22, 2016 5:55 PM
आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकान्त दास। (पीटीआई फोटो)

वित्त मंत्रालय ने मूडीज द्वारा अपनाए गए तरीके पर आपत्ति जताते हुए गुरुवार (22 सितंबर) को कहा कि वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने सरकार द्वारा आगे बढ़ाए गए सुधार उपायों को नजरअंदाज किया और उसे देश की सॉवरेन रेटिंग का उन्नयन करने के लिए ‘अनिश्चितकाल’ तक इंतजार नहीं करना चाहिए। आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकान्त दास ने कहा, ‘हमारी चिंता पूरी प्रक्रिया के तरीके को लेकर है, निश्चित रूप से रेटिंग एजेंसियां किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए स्वतंत्र हैं।’

दास ने मूडीज द्वारा वित्त मंत्रालय के साथ बैठक से एक दिन पहले सार्वजनिक तौर पर कुछ टिप्पणियां करने के संदर्भ में कहा, ‘मुझे लगता है कि पूरी प्रक्रिया को देखा जाना चाहिए और ऐसे ही किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए।’ मूडीज ने मंगलवार (20 सितंबर) को भारत में सुधारों की प्रक्रिया को धीमा बताते हुए कहा था कि निजी निवेश ठहरा हुआ है और डूबा कर्ज चुनौती पैदा कर रहा है। मूडीज ने कहा था कि यदि उसे यह भरोसा हो जाता है कि सुधार ठोस हैं तो वह एक-दो साल में भारत की रेटिंग का उन्नयन कर सकती है। मूडीज ने भारत को बीएए3 की रेटिंग दी है जो कबाड़ से थोड़ा ऊपर लेकिन निचले निवेश ग्रेड की रेटिंग है।

दास ने कहा, ‘हमें तरीके में खामी दिखी है। हमने इस बात का उल्लेख किया है। वे जो तरीका अपना रहे हैं उसको लेकर हमने गंभीर चिंता जताई है। इसके अलावा अन्य मुद्दे भी हैं। हमने उन्हें सुधारों के बारे में बताया है।’ उन्होंने कहा कि भारत में सुधारों की गहराई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह पिछले कई साल विशेषरूप से आखिरी दो साल से चल रही है। सुधारों की गति और सरकार द्वारा सुधारों को आगे बढ़ाने की रफ्तार को भी देखा जाना चाहिए था।

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