बजट की तैयारियों में आई तेजी, सरकार को 15 नवंबर तक ऐसे दे सकते हैं सुझाव

सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए बजट की तैयारियां तेज कर दी है। इसके लिए उद्योग जगत और संगठनों से सुझाव मांगे गए हैं। इस बजट से अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की उम्मीदें की जा रही हैं।

Budget 2022-23
सरकार ने अगले बजट के लिए 15 नवंबर तक सुझाव मांगे हैं। (Express Photo)

वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने अगले साल के बजट (Budget 2022-23) के लिए तैयारियां तेज कर दी है। अगले बजट से लोगों को उम्मीद है कि यह कोरोना महामारी से बेपटरी हुई अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को वापस पटरी पर लाने वाला होगा। ऐसे में मंत्रालय ने उद्योग जगत (Industries) और ट्रेड बॉडीज (Trade Bodies) से 15 नवंबर तक बजट पर सुझाव देने को कहा है।

बजट से लोगों को काफी उम्मीदें

वित्त वर्ष 2022-23 का बजट अगले साल एक फरवरी को पेश होगा। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का चौथा बजट होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) के लिए भी यह बजट पेश करने का चौथा अवसर होगा। सरकार टैक्स बेस को बढ़ाने का भी प्रयास इस बजट में कर सकती है। इस बजट से मांग पैदा करने, रोजगार सृजन करने और अर्थव्यवस्था को आठ प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की राह पर लाने की उम्मीद की जा रही है।

इन मुद्दों पर मांगे गए सुझाव

वित्त मंत्रालय ने उद्योग और व्यापार संगठनों को एक कम्यूनिकेशन के जरिए 15 नवंबर तक सुझाव देने को कहा है। मंत्रालय ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर दोनों के मामलों में ड्यूटी के स्ट्रक्चर, रेट और कर के दायरे को बढ़ाने के बारे में सुझाव मंगाया है। मंत्रालय ने कम्लायंस कम करने, टैक्स को लेकर उहापोह समाप्त करने और मुकदमेबाजी में कमी लाने के संबंध में भी स्टेकहोल्डर्स को सुझाव देने को कहा है।

कर में मिल रही छूटों को कम करने का भी होगा प्रयास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने प्रत्यक्ष कर प्रणाली में टैक्स इंसेटिंव, डीडक्शन और छूट आदि को कम करने का भी इरादा जाहिर किया है। पत्र में सरकार ने कहा है कि उसकी नीति प्रत्यक्ष कर के मामले में इन चीजों को मध्यम अवधि में कम करने की रही है। अभी इनकम टैक्स के विभिन्न सेक्शन के जरिए 100 से अधिक छूट और डीडक्शन का प्रावधान है।

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जीएसटी से जुड़े सुझाव देने से सरकार ने किया मना

हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है कि माल एवं सेवा कर (GST) से संबंधित सुझावों पर बजट में गौर नहीं किया जाएगा। वित्त मंत्रालय का कहना है कि जीएसटी से जुड़े मुद्दों के बारे में जीएसटी परिषद ही निर्णय ले सकती है। इसके संबंध में बजट में कुछ भी नहीं किया जा सकता है। मंत्रालय ने कहा है कि केंद्रीय उत्पाद कर (Central Excise) और सीमा शुल्क (Custom Duty) के बारे में अभी सुझाव दिया जा सकता है।

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