प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए नागरिकों से चुनौतियों से पार पाने और देश की मदद करने के लिये कदम उठाने की अपील की है। पीएम मोदी की कई अपीलों में से एक अपील यह है कि किसान रासायनिक खाद का इस्तेमाल कम करने की कोशिश करें।
पीएम मोदी ने कहा, “विदेश मुद्रा की खपत वाला एक और सेक्टर हमारी खेती है। हम बहुत बड़ी मात्रा में विदेश से केमिकल फर्टिलाइजर आयात करते हैं। केमिकल फर्टिलाइजर आधारित खेती के कारण हमारी धरती मां को बहुत पीड़ा हो रही है। हमारे खेत बर्बाद हो रहे हैं। अगर आज हम अपने खेत को नहीं बचाएंगे, तो भविष्य में फसलों पर भी खतरा आ जाएगा। इसलिए बहुत जरूरी है कि हम केमिकल फर्टिलाइजर की खपत 50% तक आधी कर दें। हम नेचुरल फार्मिंग की तरफ बढ़ें। हम फर्टिलाइजर का इस्तेमाल कम करके विदेशी मुद्रा भी बचा सकते हैं और अपने खेत को भी बचा सकते हैं।”
खाद क्या होती है?
खाद या उर्वरक (Fertilizer) ऐसी चीज होती है जो पौधों और फसलों को बढ़ने के लिए जरूरी पोषक तत्व देती है। खाद मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करती है, जिससे फसल बेहतर होती है। खेती में सबसे जरूरी पोषक तत्व नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश माने जाते हैं।
कितने प्रकार की होती है खाद?
मुख्य रूप से खाद को 3 प्रकार में बांटा जाता है-
रासायनिक खाद (Chemical Fertilizers)
ये खाद फैक्ट्रियों में बनाई जाती हैं और फसलों को तुरंत पोषण देती हैं।
उदाहरण:
– यूरिया (Urea)
– डीएपी (DAP)
– एनपीके (NPK)
– एमओपी (MOP)
– एसएसपी (SSP)
जैविक खाद (Organic Fertilizers)
ये प्राकृतिक चीजों से बनाई जाती हैं और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारती हैं।
उदाहरण:
– गोबर की खाद
– कम्पोस्ट
– वर्मी कम्पोस्ट
– हरी खाद
जैव उर्वरक (Bio Fertilizers)
इनमें लाभकारी सूक्ष्म जीव (बैक्टीरिया) होते हैं जो मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ाने में मदद करते हैं।
उदाहरण:
– एजोटोबैक्टर
– नीली-हरी शैवाल
– राइजोबियम

भारत के पास कितना स्टॉक है?
सोमवार को सरकार की तरफ से उर्वरक की उपलब्धता को लेकर जानकारी दी गई है।
PIB में दी गई जानकारी के अनुसार, खरीफ 2026 के लिए, कृषि एवं किसान संघ (DA&FW) द्वारा उर्वरक की आवश्यकता 390.54 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है, जबकि मौजूदा में स्टॉक लगभग 199.65 लाख मीट्रिक टन (51% से अधिक) है, जो सामान्य स्तर (लगभग 33%) से काफी अधिक है।
भारत में उर्वरकों का कुल भंडार (लाख टन में)
| उर्वरक का प्रकार | 11 मई 2026 को स्टॉक | 11 मई 2025 को स्टॉक |
| यूरिया | 76.65 | 75.48 |
| डीएपी | 22.52 | 14.87 |
| एनपीके | 60.42 | 48.32 |
| एसएसपी | 26.99 | 26.92 |
| एमओपी | 13.07 | 12.99 |
| कुल स्टॉक | 199.65 | 178.58 |
उर्वरकों का घरेलू उत्पादन और आयात (लाख टन)
| उर्वरक का प्रकार | 1 मार्च 2026 – 10 मई 2026 घरेलू उत्पादन | 1 मार्च 2025 – 10 मई 2025 घरेलू उत्पादन |
| यूरिया | 46.28 | 54.98 |
| डीएपी | 6.2 | 5.56 |
| एनपीके | 15.57 | 22.03 |
| एसएसपी | 8.73 | 9.44 |
| कुल उत्पादन | 76.78 | 92.01 |
उर्वरकों की बिक्री (लाख टन)
| उर्वरक का प्रकार | 1 मार्च 2026 – 10 मई 2026 बिक्री | 1 मार्च 2025 – 10 मई 2025 बिक्री |
| यूरिया | 38.94 | 34.6 |
| डीएपी | 9.4 | 6.17 |
| एनपीके | 14.25 | 11.71 |
| एसएसपी | 5.52 | 4.28 |
| एमओपी | 3.08 | 2.89 |
| कुल बिक्री | 71.19 | 59.65 |
किन देशों से करते हैं आयात?
वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 (फरवरी 2026 तक) के दौरान भारत ने यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीके जैसे उर्वरकों का आयात कई देशों से किया। इनमें प्रमुख रूप से अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, ब्रुनेई, कनाडा, चीन, मिस्र, एस्टोनिया, फिनलैंड, जर्मनी, जॉर्जिया, इंडोनेशिया, इज़राइल, जॉर्डन, लीबिया, नाइजीरिया, मलेशिया, मोरक्को, ओमान, कतर, रूस, सऊदी अरब, सेनेगल, दक्षिण कोरिया, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, ट्यूनीशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अमेरिका और वियतनाम शामिल हैं।
भारत ने पिछले चार वित्तीय वर्षों में यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीके जैसे उर्वरकों का बड़े पैमाने पर आयात किया है। आंकड़ों के मुताबिक:
वित्त वर्ष 2022-23
– यूरिया आयात: करीब 75.80 लाख टन
– डीएपी आयात: करीब 65.83 लाख टन
– एमओपी आयात: करीब 18.66 लाख टन
– एनपीके आयात: करीब 27.52 लाख टन
वित्त वर्ष 2023-24
– यूरिया आयात: करीब 70.42 लाख टन
– डीएपी आयात: करीब 55.67 लाख टन
– एमओपी आयात: करीब 28.69 लाख टन
– एनपीके आयात: करीब 22.17 लाख टन
वित्त वर्ष 2024-25
– यूरिया आयात: करीब 56.47 लाख टन
– डीएपी आयात: करीब 45.69 लाख टन
– एमओपी आयात: करीब 35.41 लाख टन
– एनपीके आयात: करीब 22.72 लाख टन
वित्त वर्ष 2025-26 (फरवरी 2026 तक)
– यूरिया आयात: करीब 97.99 लाख टन
– डीएपी आयात: करीब 61.67 लाख टन
– एमओपी आयात: करीब 27.72 लाख टन
– एनपीके आयात: करीब 35.46 लाख टन
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