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FE CFO Awards: एचडीएफसी चेयरमैन दीपक पारेख की राय- दुश्वारियों को नजरअंदाज कर कर्ज देने में दोबारा जुटें बैंक

FE CFO Awards: पारेख ने कहा कि एक होशियार चीफ फाइनैंशल ऑफिसर को दो एल (L) का ध्यान रखना चाहिए। ये हैं Leverage और Liquidity। उनका यह भी कहना है कि बैंकों को इन वित्तीय जोखिम के खिलाफ जाकर कर्ज देने के कारोबार में फिर से जुट जाना चाहिए।

Author Updated: March 27, 2019 5:56 PM
fe cfo awardsकार्यक्रम में व्यापार और आर्थिक जगत के कई दिग्गजों ने शिरकत की। (express photo)

FE CFO Awards: भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े कई सेक्टरों मसलन- रियल एस्टेट आदि को इस वक्त अपने अस्तित्व को बचाने के लिए नकदी या लिक्विडिटी की बुरी तरह जरूरत है। उधर, दूसरी ओर कर्जदाता बैंक ‘बैड लोन’ की समस्या से भी जूझ रहे हैं। इन दुश्वारियों के इतर एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख का मानना है कि ‘प्रामाणिक वित्तीय लेनदेन’ में कुछ गड़बड़ी होने की दशा में सजा नहीं दी जा सकती। उनका यह भी कहना है कि बैंकों को इन वित्तीय जोखिम के खिलाफ जाकर कर्ज देने के कारोबार में फिर से जुट जाना चाहिए।

दीपक मुंबई में मंगलवार को आयोजित एफई सीएफओ अवॉर्ड्स कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। पारेख ने कहा कि एक होशियार चीफ फाइनैंशल ऑफिसर को दो एल (L) का ध्यान रखना चाहिए। ये हैं Leverage और Liquidity। बता दें कि फाइनेंस के क्षेत्र में Leverage का मतलब ऐसी तकनीक से है, जिसमें किसी संपत्ति की खरीद के लिए फ्रेश इक्विटी के बजाए कर्ज (Debt) का इस्तेमाल होता है। दीपक पारेख ने Leverage को ‘दुधारी तलवार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इसके जरिए कारोबार के विस्तार और रिटर्न बढ़ाने में मदद मिलती है। हालांकि, इसकी वजह से कई बड़े व्यापार धराशायी भी हुए हैं।

दीपक के मुताबिक, लिक्विडिटी या नकदी की कमी एक और ‘डरावनी’ स्थिति है। उन्होंने कहा कि बैंकों को कर्ज देने के कारोबार में लौटना होगा। वहीं, कंपनियों को वित्तीय अनुशासन के साथ आगे बढ़ते हुए कारोबार के विस्तार और भारत निर्माण के काम में जुटना होगा। एचडीएफसी चेयरमैन ने यह भी कहा कि अलाभकारी संस्थानों को अपना कारोबार समेटने की इजाजत देनी होगी। कंपनियों के दिवालिया घोषित होने से जुड़ी नई व्यवस्था को मजबूत करना होगा ताकि काफी वक्त से लंबित चले आ रही कानूनी लड़ाइयों को रोका जा सके।

दीपक पारेख ने क्या कहा, नीचे वीडियो में सुनें

वहीं, कार्यक्रम में शिरकत कर रहे द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत गोयनका ने चीफ फाइनैंशल ऑफिसर्स की मार्केटिंग की तरफ बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला। गोयनका ने जोर दिया कि कामयाब ब्रैंड उसके प्रोडक्ट की तुलना में ज्यादा अहमियत रखते हैं। गोयनका ने विज्ञापन और मार्केटिंग जगत के बदलते फोकस पर भी बात की। उन्होंने बताया कि 50 के दशक में ब्रैंड्स अपने प्रोडक्ट से जुड़े होते थे। 90 का दशक आते-आते वे ग्राहकों से जुड़ गए और 2000 की शुरुआत में ब्रैंड को भावनाओं के साथ जोड़ा जाने लगा। गोयनका के मुताबिक, ऐपल और गूगल जैसे स्थापित ब्रैंड्स लंबे समय तक फैंस की तरफ से ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने के दबाव के सामने नहीं झुके। हालांकि, गोयनका का मानना है कि ध्रुवीकरण के इस माहौल में ब्रैंड्स को भी अपनी राय रखनी चाहिए ताकि उनका मानवीय पहलू सामने आ सके।

FE CFO Awards का पूरा वीडियो यहां देखें

 

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