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फिक्स्ड डिपॉजिट को डेब्ट म्यूचुअल फंड में शिफ्ट करके कर सकते हैं ज्यादा कमाई

Mutual Fund: डेब्ट म्यूचुअल फंड में एफडी की तुलना में अधिक जोखिम होता है लेकिन साथ ही, इसमें लंबी अवधि में आपको बेहतर रिटर्न देने की भी क्षमता होती है।

डेब्ट म्यूचुअल फंड भी एफडी की तरह ही होता है। इसमें भी निश्चित समय के लिए और एक निश्चित ब्याज दर पर पैसा इनवेस्ट किया जाता है।

आदिल शेट्टी, सीईओ, बैंकबाजार डॉट कॉम

फिक्स डिपॉजिट पर ब्याज पर ब्याज दर 2013 में 9 फीसदी सालाना थी। अब यह दर 6.5 फीसदी पर आ गई है। अगर आप करदाता के 30 फीसदी वाले स्लेब में आते हैं तो ज्यादा दिक्कत है, क्योंकि कटौतियों के बाद एफडी पर ब्याज दर सालाना 4.55 फीसदी रह जाती है। ऐसे में इन दरों पर एफडी जारी रख पाना निवेशकों के लिए कठिन होगा और इसीलिए डेब्ट म्यूचुअल फंड जैसे दूसरे साधनों को खोजना और अपने निवेश को उधर शिफ्ट करने में समझदारी है। डेब्ट म्यूचुअल फंड में एफडी की तुलना में अधिक जोखिम होता है लेकिन साथ ही, इसमें लंबी अवधि में आपको बेहतर रिटर्न देने की भी क्षमता होती है। आइये उन कुछ बातों पर एक निगाह डालें जिनको आपको उस समय दिमाग में रखना चाहिए जब आप अपना इनवेस्टमेंट एफडी से डेब्ट फंड में स्विच कर रहे हों। डेब्ट म्यूचुअल फंड भी एफडी की तरह ही होता है। इसमें भी निश्चित समय के लिए और एक निश्चित ब्याज दर पर पैसा इनवेस्ट किया जाता है।

इनवेस्टमेंट टाइम: जब एफडी में किए गए निवेश को डेब्ट म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले अपनी प्राथमिकता देख लें। इसमें 3 साल से पहले डेब्ट फंड के रिडम्पशन को शॉर्ट टर्म माना जाता है, और कैपिटल गेन्स पर टैक्स व्यक्ति के संबंधित आयकर स्लैब की दर के अनुसार लगाया जाता है। 3 साल के बाद के रिडम्पशन को लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट माना जाता है और कैपिटल गेन्स पर 20फीसदी की दर से कर लिया जाता है (सूचीकरण लाभों के साथ)।

अपनी फाइनैंशल प्लानिंग के हिसाब से निवेश के समय का निर्णय ले सकते हैं और अपने निवेश को जरूरत के हिसाब से 2 या 3 हिस्सों में बांट सकते हैं। एफडी में आंशिक रिडम्पशन नहीं मिलता है, लेकिन डेब्ट फंड में आंशिक रिडम्पशन मिलता है। अपनी प्लानिंग के मुताबिक पैसे को जब चाहें निकाल सकते हैं। हालांकि, डेब्ट फंड निकालने पर लगने वाली फीस को जांच लें, क्योंकि ज्यादातर फंडों में निश्चित समय से पहले रिडम्पशन करने पर फीस लगती है।

डेब्ट फंड में कैसे निवेश करें
नियमित समय पर जिस तरह रिकरिंग फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करते हैं, डेब्ट फंड में भी निवेश के लिए सिप मोड के विकल्प होते हैं। यदि पूरी एफडी राशि को डेब्ट फंड में शिफ्ट करना चाहें तो आप एकमुश्त निवेश का विकल्प चुन सकते हैं। एफडी निवेश से निकलते समय, टाइम से पहले निकलने की फीस या ब्याज में होने वाली हानि को जरूर चेक करें, डेब्ट फंड में स्विच करते समय आय पर पड़ने वाले पूरे प्रभाव का आंकलन कर लें।

डेब्ट फंड से होने वाली कमाई पर तब तक कोई टैक्स नहीं लगता है जब तक आप इसे रिडीम नहीं कर लेते, हालांकि एफडी के मामले में आपको कमाए गए ब्याज पर हर साल टैक्स देना पड़ता है। चाहे वह निवेश बैंक में ही हो, तब भी। यदि आप एफडी की तुलना में थोड़ा ज्यादा जोखिम ले सकते हैं तो टैक्स के फायदे के हिसाब से डेब्ट फंड आपको अधिक फ्लैक्सेबिलिटी देता है साथ ही शॉर्ट और लॉन्ग टर्म में ज्यादा रिटर्न देता है।

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