केंद्र सरकार ने एक बार फिर पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी) की दरों में बदलाव किया है। नई दरें 3 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं।

सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन और घरेलू ईंधन उपलब्धता को देखते हुए इन दरों की समीक्षा करती है। हालिया फैसला भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर विंडफॉल टैक्स होता क्या है? सरकार इसे बार-बार क्यों बदलती है? और इसका आम लोगों तथा तेल कंपनियों पर क्या असर पड़ता है? आइए समझते हैं…

क्या होता है विंडफॉल टैक्स?

विंडफॉल टैक्स ऐसा टैक्स है, जो किसी कंपनी को अचानक और असामान्य परिस्थितियों में होने वाले अतिरिक्त मुनाफे पर लगाया जाता है।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी युद्ध, वैश्विक संकट या सप्लाई में बाधा के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं, तो तेल कंपनियों का मुनाफा भी अचानक बढ़ सकता है। ऐसे अतिरिक्त लाभ का एक हिस्सा सरकार टैक्स के रूप में वसूलती है। इसी टैक्स को विंडफॉल टैक्स कहा जाता है।

भारत में कब हुई थी इस टैक्स की शुरुआत?

भारत सरकार ने पहली बार जुलाई 2022 में विंडफॉल टैक्स लागू किया था। उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी ऊंची पहुंच गई थीं और भारतीय रिफाइनरियों को निर्यात से अच्छा मुनाफा हो रहा था।

बाद में जब वैश्विक बाजार सामान्य हुआ तो इस टैक्स की दरें कई बार घटाई गईं और दिसंबर 2024 में इसे समाप्त भी कर दिया गया। हालांकि 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और तेल कीमतों में उछाल के बाद सरकार ने इसे फिर से लागू कर दिया।

सरकार बार-बार क्यों बदलती है इसकी दरें?

पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स कोई स्थायी टैक्स नहीं है। बाजार की स्थिति के अनुसार इसकी दरें बदली जाती हैं।

क्या है मुख्य कारण-

– अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव
– देश में पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना
– भारतीय रिफाइनरियों का एक्सपोर्ट मार्जिन बढ़ना या घटना

सरकार इस कारण हर कुछ समय बाद इसकी समीक्षा करती है और जरूरत पड़ने पर दरें बढ़ा या घटा देती है।

क्या बदला है इस बार?

3 अगस्त 2026 से लागू नई दरों के तहत केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल पर निर्यात शुल्क तत्काल प्रभाव से 2.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

वहीं, डीजल पर दो सप्ताह पहले कुल निर्यात शुल्क 8.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर किया गया था। अब सरकार ने इसे दो अलग-अलग शुल्कों के जरिए बढ़ाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इसी तरह, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर विंडफॉल टैक्स 14.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

विंडफॉल टैक्स कब बढ़ता है और कब घटता है?

जब कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है, रिफाइनरियों का निर्यात मुनाफा बढ़ जाता है या युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई प्रभावित होती है, तब सरकार विंडफॉल टैक्स बढ़ा सकती है ताकि अतिरिक्त मुनाफे का एक हिस्सा सरकारी राजस्व में आए।

वहीं, जब तेल की कीमतें सामान्य हो जाती हैं, रिफाइनिंग मार्जिन और निर्यात से होने वाली अतिरिक्त कमाई घट जाती है तथा बाजार स्थिर हो जाता है, तब सरकार विंडफॉल टैक्स कम कर सकती है या जरूरत पड़ने पर इसे खत्म भी कर सकती है।

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने मई 2026 में तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए यह फैसला लिया गया है। यहां पढ़ें पूरी खबर…