Jansatta Explained: दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता लिमिटेड ने सोमवार को बताया कि कंपनी के डीमर्जर का फैसला 1 मई 2026 से लागू होगा। इस कदम के बाद अब वेदांता एक अकेली कंपनी न रहकर पांच अलग-अलग कंपनियों के रूप में पहचानी जाएगी यानी अगर आपके पास वेदांता का एक शेयर है, तो आने वाले समय में आपके पोर्टफोलियो में नई कंपनियों के शेयर भी जुड़ जाएंगे।
5 हिस्सों में बंटेगी वेदांता
डिमर्जर के बाद वेदांता का कारोबार पांच हिस्सों में बंट जाएगा। इसमें एक मौजूदा लिस्टेड कंपनी और चार नई कंपनियां शामिल हैं, जो अपने-अपने सेक्टर पर फोकस करेंगी-
– वेदांता एल्युमीनियम मेटल लिमिटेड (VAML)
– वेदांता पावर लिमिटेड: पहले इसका नाम ‘तलवंडी साबो पावर लिमिटेड’ (TSPL) था।
– वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड
– वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड (VISL)
– वेदांता लिमिटेड
एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने जानकारी दी कि शेयरहोल्डर्स को हर एक शेयर के बदले नई कंपनियों के शेयर दिए जाएंगे। इसका मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति के पास वेदांता लिमिटेड का एक शेयर है, तो उसे वेदांता एल्युमिनियम, तलवंडी साबो पावर, माल्को एनर्जी और वेदांता स्टील एंड आयरन के एक-एक शेयर दिए जाएंगे।
1 मई है सबसे अहम तारीख
कंपनी के अनुसार 1 मई रिकॉर्ड डेट है, जो तय करेगी कि निवेशकों को नई बनने वाली कंपनियों के कितने शेयर मिलेंगे। अब जब डीमर्जर की प्रभावी तारीख और शेयर मिलने की जानकारी साफ हो चुकी है, तो बाजार का ध्यान आगे इन कंपनियों की लिस्टिंग टाइमलाइन पर रहेगा।
दिसंबर में मिलेगी डीमर्जर की मंजूरी
दिसंबर 2025 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने कंपनी के पांच हिस्सों में बंटने की इस बड़ी योजना को मंजूरी दे दी थी।
आखिर क्या होता है डिमर्जर?
दरअसल, डिमर्जर एक कारोबारी रणनीति होती है, जिसमें कोई कंपनी अपने किसी बिजनेस यूनिट को अलग करके एक नई स्वतंत्र कंपनी बना देती है। इस प्रक्रिया में मूल कंपनी का पूरा अस्तित्व खत्म होना जरूरी नहीं होता है। अक्सर मूल कंपनी बनी रहती है और अलग किया गया बिजनेस एक नई कंपनी के रूप में काम करने लगता है।
आम तौर पर बड़ी कंपनियां डिमर्जर का इस्तेमाल करती हैं, जिनके पास कई अलग-अलग कारोबार या ब्रांड होते हैं। ऐसे में कंपनी अलग-अलग बिजनेस को स्वतंत्र इकाइयों में बांट देती है ताकि हर बिजनेस अपने क्षेत्र पर बेहतर तरीके से फोकस कर सके।
निवेशकों को डिमर्जर से क्या फायदा होगा?
हर बिजनेस की वैल्यू आएगी सामने
अभी वेदांता के अंदर एल्यूमिनियम, जिंक, ऑयल-गैस, पावर और आयरन-स्टील जैसे कई कारोबार एक ही कंपनी में हैं। डिमर्जर के बाद ये अलग कंपनियां बनेंगी, जिससे हर बिजनेस की अलग मार्केट वैल्यू सामने आ सकती है।
निवेशकों को मिलेंगे कई कंपनियों के शेयर
डिमर्जर लागू होने पर वेदांता के मौजूदा शेयरधारकों को नई कंपनियों के शेयर भी मिल सकते हैं (अनुपात के आधार पर)।
वेदांता शेयर की कीमत
डिमर्जर के रिकॉर्ड डेट की खबर सामने आने के बाद मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को वेदांता का शेयर ने अपने 52 सप्ताह के उच्चतर स्तर 794.90 को छुआ। अभी 1:20PM कंपनी का शेयर -0.39% की गिरावट के साथ 767.65 रुपये के स्तर पर ट्रेड हो रहा है। कंपनी का शेयर आज अपने पिछले बंद 770.65 रुपये के मुकाबले तेजी के साथ 790.55 रुपये के स्तर पर खुला। कंपनी का मार्केट कैप 3,00,278.70 करोड़ रुपये है।
अनिल अग्रवाल के बारे में
अनिल अग्रवाल भारत के प्रमुख उद्योगपतियों में से एक हैं और वेदांता रिसोर्सेज के संस्थापक व चेयरमैन हैं। वे प्राकृतिक संसाधन (माइनिंग, मेटल और एनर्जी) के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर काम करने वाले बिजनेस ग्रुप वेदांता लिमिटेड के पीछे की प्रमुख ताकत माने जाते हैं।
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आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनियों में से एक विप्रो ने हाल ही में शेयर बायबैक का ऐलान किया है। ये खबर सुनने के बाद कई लोगों के मन में ये सवाल जरूर आया होगा कि आखिर अपने ही शेयर वापस क्यों खरीदता है। इससे निवेशकों को क्या फायदा होता है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं…
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