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त्योहारों से पहले महंगाई सातवें आसमान पर

त्योहारों के मौसम की खरीदारी अभी शुरू भी नहीं हुई कि महंगाई आसमान पर पहुंच गई।

Author नई दिल्ली | August 13, 2016 2:15 AM
नोट।

त्योहारों के मौसम की खरीदारी अभी शुरू भी नहीं हुई कि महंगाई आसमान पर पहुंच गई। खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में बढ़कर 6.07 फीसद का आंकड़ा तो छू ही लिया, दो साल का रिकार्ड भी तोड़ दिया। जो रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से कहीं ऊंची है। आम आदमी के लिए चिंता की बात यही है कि खुदरा मुद्रास्फीति रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजों के दाम चढ़ने से बढ़ी है।
दरअसल, त्योहारी सीजन से पहले चीनी, तेल-घी व मसालों की मांग बढ़ी है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जून में 5.77 फीसद पर थी। जुलाई 2015 में यह 3.69 फीसद थी। मुद्रास्फीति का यह आंकड़ा सितंबर 2014 के बाद सबसे ऊंचा है। उस समय खुदरा मुद्रास्फीति 6.46 फीसद थी। जुलाई में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 8.35 फीसद पर पहुंच गई, जो जून में 7.79 फीसद थी। सरकार ने रिजर्व बैंक के साथ नई मौद्रिक नीति रूपरेखा करार के तहत अगले पांच साल के लिए मुद्रास्फीति का लक्ष्य चार फीसद (दो फीसद ऊपर या नीचे) रखा है।
जुलाई में चीनी और कन्फेक्शनरी उत्पादों की महंगाई दर बढ़कर 21.91 फीसद हो गई। जो जून में 16.79 फीसद थी। इसी तरह तेल-घी वर्ग की मुद्रास्फीति 4.96 फीसद व मसालों की 9.04 फीसद पर पहुंच गई। मोटे अनाजों की मुद्रास्फीति माह के दौरान बढ़कर 3.88 फीसद रही, वहीं अंडे 9.34 फीसद महंगे हो गए। जून में अंडों की मुद्रास्फीति 5.51 फीसद थी। समीक्षाधीन महीने में दूध और उसके उत्पाद 4.13 फीसद महंगे हुई। इनकी मुद्रास्फीति जून में 3.43 फीसद थी। अगस्त से देश के विभिन्न स्थानों पर त्योहारों की शुरुआत होती है। इस दौरान मिठाई से लेकर फलों और खाद्य वस्तुओं की मांग बढ़ती है। फलों की मुद्रास्फीति माह के दौरान 3.53 फीसद रही। वहीं सब्जियों के लिए यह 14.06 फीसद और दालों के लिए 27.53 फीसद रही। जुलाई में शहरी क्षेत्र के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 5.39 फीसद रही, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह 6.66 फीसद रही।

जहां तक जरूरी चीजों की मौजूदा खुदरा दरों का सवाल है, कुछ महीने पहले तक 30 रुपए किलो बिक रही चीनी अब 40 रुपए से ऊपर पहुंच गई है। इसी तरह 16-17 रुपए किलो मिलने वाला चक्की का आटा भी अब 26-27 रुपए की दर से मिल रहा है। दालों की कीमतें तो खैर पहले से ही आसमान छू रही हैं। सरकार के आयात के दावे भी अरहर और उड़द की दालों की कीमत कम नहीं कर पाए। हां, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘हर हर मोदी’ के उनके प्रशंसकों के नारे का ‘अरहर मोदी’ कह कर आलोचना करने का मौका जरूर मिल गया।

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