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पेट्रोल- डीजल पर बढ़ी Excise Duty लेकिन नहीं बढ़ेंगे दाम

सरकार ने इस महीने तीसरी बार पेट्रोल तथा डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ा दिया है। पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क एक रुपया तथा डीजल पर डेढ़ रुपये बढ़ाने की घोषणा की गई है।

Author नई दिल्ली | January 31, 2016 12:34 AM
सांकेतिक तस्वीर।

सरकार ने इस महीने तीसरी बार पेट्रोल तथा डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ा दिया है। पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क एक रुपया तथा डीजल पर डेढ़ रुपये बढ़ाने की घोषणा की गई है। केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने एक अधिसूचना में बताया कि उत्पाद शुल्क की नयी दरें 31 जनवरी से प्रभाव हो जायेंगी।

सरकार के इस फैसले से पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले खुदरा (नॉन ब्रांडेड) पेट्रोल पर मूल उत्पाद शुल्क 8.48 रुपये से बढ़कर 9.48 रुपये प्रति लीटर तथा नॉन ब्रांडेड डीजल पर मूल उत्पाद शुल्क 9.83 रुपये से बढ़कर 11.33 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

तेल विपणन कंपनियां बढ़े हुए उत्पाद शुल्क का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं या नहीं यह अभी देखा जाना शेष है। कंपनियां हर पखवाड़े पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इस महीने की दूसरी समीक्षा रविवार को होनी है। इसमें यह स्पष्ट हो पायेगा कि वर्तमान बढ़ोतरी के बाद दोनों पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढ़ाये जाते हैं या इस संबंध में विपणन कंपनियों का क्या रुख रहता है।

सरकार ने इससे पहले 02 जनवरी को पेट्रोल पर पेट्रोल पर 37 पैसे और डीजल पर दो रुपये तथा 16 जनवरी को पेट्रोल पर 75 पैसे और डीजल पर 1.83 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क बढ़ाया था। इसके अलावा पिछले साल भी 7 नवंबर को पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 1.60 रुपये तथा डीजल पर 30 पैसे और 17 दिसंबर को पेट्रोल पर 30 पैसे तथा डीजल पर 1.17 रुपये प्रति लीटर बढ़ा था। इस प्रकार 7 नवंबर 2015 से अब तक पेट्रोल पर कुल 4.02 रुपये तथा डीजल पर 6.80 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क बढ़ाया जा चुका है।

प्राथमिक उत्पादों की कीमतों में जबरदस्त गिरावट के मद्देनजर सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश लक्ष्य हासिल करने की अपनी कोशिश छोड़ दी है क्योंकि शेयर बाजार में गिरावट के कारण इस समय विनिवेश से सरकार को नुकसान हो सकता है।

इसकी बजाय वह अन्य स्रोतों से वित्तीय घाटा कम करने के प्रयास कर रही है और पेट्रोल तथा डीजल पर उत्पाद शुल्क में लगातार बढ़ोतरी उसी प्रयास का हिस्सा है। चालू वित्त वर्ष में वित्तीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.9 प्रतिशत तथा अगले वित्त वर्ष में 3.5 प्रतिशत की सीमा में रखने का लक्ष्य रखा गया है।

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