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अलीबाबा के पास पैसे नहीं थे तो जैक मा ने क‍िसानों से ल‍िया था सेल्‍स टीम का काम

जब अलीबाबा को अपनी पहली सेल्स टीम नियुक्त करना था। कंपनी के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह चीन के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को अपनी टीम में ले सकें। इसकी जगह उन्होंने ग्रामीण और किसानों की पृष्ठभूमि से आने वाले स्थानीय युवाओं को नौकरी दी।

अलीबाबा आज भले ही चीन के तकनीकी जगत का सितारा हो, लेकिन कंपनी ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए छोटी शुरूआतों और ढेर सारी मुश्किलों से भरा सफर तय किया है। अलीबाबा के पूर्व कर्मचारी पोर्टर एरिसमैन ने अपनी नई किताब, ”अलीबाबा वर्ल्ड” में कंपनी के चीन के छोटे से स्टार्ट अप से लेकर ई-कॉमर्स की दुनिया का बेताज बादशाह बनने तक की दास्तान साझा की है।

अ​मेरिकी टेक कंपनी एप्पल को संस्थापक स्टीव जॉब्स ने अपने परिवार के गैराज में शुरू किया था। वहीं अलीबाबा के संस्थापक जैक मा ने हांगझू प्रांत के छोटे से अपार्टमेंट से साल 1999 में शुरू किया था। कंपनी का पहला कर्मचारी, उसी फ्लैट में सोता, खाता और रहता था। एरिसमैन ने लिखा है बाद में ये अलीबाबा का प्रतीक बन गया। इसी से अलीबाबा की संस्कृति बनी कि न तो कोई भी चीज बर्बाद करेंगे और न ही कोई चीज छोड़ेंगे।

साल 2000 में, अलीबाबा ने अमेरिका की सिलिकॉन वैली अपने दफ्तर खोले। कंपनी ने कैलिफोर्निया मेें एक घर भी किराए पर लिया था। ये घर अलीबाबा हाउस का अमेरिकी वर्जन था। हांगझू प्रांत के इंजीनियरों का पूरा दल इस घर में रहने के लिए भेजा गया था। ये लोग दिन में कई घंटे काम किया करते थे और डिनर में इंस्टेंट नूडल्स खा लिया करते थे।

जब अलीबाबा को अपनी पहली सेल्स टीम नियुक्त करना था। कंपनी के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह चीन के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को अपनी टीम में ले सकें। इसकी जगह उन्होंने ग्रामीण और किसानों की पृष्ठभूमि से आने वाले स्थानीय युवाओं को नौकरी दी। एरिसमैन ने लिखा ​है कि तनख्वाह कम थी और परिस्थितियां बेहद कठिन, लेकिन अलीबाबा उनके और उनके परिवारों के लिए उम्मीदों का जरिया था और खुशहाली की ओर छोटा कदम था।

एरिसमैन ने अपनी किताब में बताया ​है कि हांगझू में अक्सर बिजली जाना बड़ी समस्या थी। हांगझू का इलेक्ट्रिीसिटी ग्रिड शहर में बढ़ती फैक्ट्रियों और एयर कंडीशनर्स का लोड नहीं उठा पाता था। ऐसे में 2003 की ​गर्मियों के दौरान, अलीबाबा को पूरे शहर में बिजली की राशनिंग का शिकार होना पड़ा था। एरिसमैन के मुताबिक, गर्मी के दिनों में एसी चलाने की इजाजत नहीं थी। इस​लिए कंपनी ने आॅफिस के चारों तरफ बड़े प्लास्टिक के टबों में बर्फ की सिल्लियां रखवा दी थीं। वहीं सबसे ज्यादा गर्म दिनों में, हांगझू में बिजली की क्रमिक कटौती शुरू हो गई थी। इसका मतलब होता था कि कार्यालय बंद हो जाते थे और स्टाफ के लोग अपने घर चले जाते थे।

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