बच्चों की पढ़ाई, करियर और शादी जैसी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए केवल कमाई करना ही काफी नहीं है, बल्कि सही समय पर फाइनेंशियल प्लानिंग करना भी उतना ही ज्यादा जरूरी है। कई पिता परिवार की जरूरतों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि भविष्य की आर्थिक तैयारी को टाल देते हैं।

अगर 50 वर्ष की उम्र से पहले कुछ अहम फाइनेंशियल फैसले ले लिए जाएं, तो बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के साथ-साथ रिटायरमेंट के बाद भी आर्थिक परेशानियों से बचा जा सकता है। आइए जानते हैं ऐसी 7 जरूरी फाइनेंशियल प्लानिंग, जिन्हें हर पिता को समय रहते पूरा कर लेना चाहिए…

  1. बच्चों की शिक्षा के लिए अलग फंड : लागत हायर एजुकेशन की लागत बढ़ रही है। बच्चों की पढ़ाई के लिए SIP या अन्य निवेश विकल्पों के जरिए आप अलग फंड तैयार कर सकते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर लोन का बोझ न उठाना पड़े।
  2. इमरजेंसी फंड : आपको कम से कम 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाकर रखना चाहिए। नौकरी जाने, बीमारी या किसी अन्य आपात स्थिति में यह फंड परिवार को आर्थिक संकट से बचा सकता है।
  3. हेल्थ इंश्योरेंस को नजरअंदाज न करें : बढ़ते मेडिकल खर्च परिवार की बचत को प्रभावित कर सकते हैं। अपने साथ-साथ पत्नी और बच्चों के लिए पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कवर जरूर रखें।
  4. कर्ज कम करने पर ध्यान दें : आप 50 साल की उम्र तक होम लोन या अन्य बड़े कर्ज को कम करने करने की कोशिश करें। कम कर्ज होने से भविष्य की वित्तीय जिम्मेदारियां आसानी से पूरी हो सकती हैं।
  5. अपडेट रखें वसीयत और नॉमिनेशन : संपत्ति के सही हस्तांतरण के लिए वसीयत तैयार करें और सभी बैंक खातों व निवेशों में नॉमिनी की जानकारी अपडेट रखें। ताकि बाद में कोई दिक्कत न हो।
  6. रिटायरमेंट प्लानिंग : कई लोग बच्चों के भविष्य पर ध्यान देते हैं लेकिन अक्सर अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग करना भूल जाते हैं। EPF, PPF और म्यूचुअल फंड जैसे विकल्पों में नियमित निवेश कर रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार कर सकते हैं।
  7. टर्म इंश्योरेंस: अपने फैमिली की आर्थिक सुरक्षा के लिए टर्म इंश्योरेंस बेहद जरूरी है।

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और रेगुलेटेड एंटिटीज द्वारा वित्तीय उत्पादों या सेवाओं की बिक्री से जुड़े नियम कड़े कर दिए। इस कदम का उद्देश्य लेंडर्स द्वारा फाइनेंशियल प्रोडक्ट की गलत बिक्री को रोकना, गलत मार्केटिंग तरीकों पर रोक लगाना और कस्टमर की सहमति, डिस्क्लोजर और बिक्री के तरीकों के नियमों को कड़ा करना है।

केंद्रीय बैंक ने टेक्निकल और ऑपरेशनल बदलावों की जरूरत को देखते हुए रिवाइज्ड गाइडलाइंस लागू करने की तारीख बढ़ा दी है। अब ये नियम जुलाई 2026 के बजाय 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। आइए समझते हैं कि मिस-सेलिंग क्या होती है…

[Disclaimer: शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या क्रिप्टोकरेंसी में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। इस लेख में दी गई जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श जरूर करें। निवेश से होने वाले किसी भी लाभ या हानि के लिए वेबसाइट जिम्मेदार नहीं होगी।]