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इस साल ETFs में 13,000 करोड़ लगाएगा EPFO

यूनियनों के कड़े विरोध को दरकिनार करते हुए श्रम मंत्रालय ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के एक्सचेंज टे्डेड फंड (ईटीएफ) में निवेश की सीमा बढ़ा कर दोगुना यानी 10 प्रतिशत करने की घोषणा की।

Author नई दिल्ली | September 30, 2016 5:08 AM

यूनियनों के कड़े विरोध को दरकिनार करते हुए श्रम मंत्रालय ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के एक्सचेंज टे्डेड फंड (ईटीएफ) में निवेश की सीमा बढ़ा कर दोगुना यानी 10 प्रतिशत करने की घोषणा की।

इस तरह ईपीएफओ चालू वित्त वर्ष में शेयर बाजारों में 13,000 करोड़ रुपए का निवेश कर सकेगा। 2015-16 में यह सीमा पांच प्रतिशत थी। श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने संवाददाता सम्मेलन में कहा-‘हमने ईपीएफओ की निवेश योग्य जमा का 10 प्रतिशत तक ईटीएफ में निवेश करने की सीमा के बारे में पहले ही अधिसूचना जारी कर दी है। ईपीएफओ ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ईटीएफ में 1,500 करोड़ रुपए का निवेश किया है। बाकी छह महीने में वह 11,500 करोड़ रुपए का और निवेश ईटीएफ में करेगा।


यह पूछे जाने पर कि क्या श्रम मंत्रालय ने इस बारे में ईपीएफओ न्यास की मंजूरी मांगी है, दत्तात्रेय ने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की बैठक में दो बार विचार-विमर्श हो चुका है। कुछ सदस्यों को ईटीएफ में निवेश पर आपत्ति थी। इस सवाल कि क्या सीबीटी की मंजूरी की जरूरत नहीं है, श्रम सचिव शंकर अग्रवाल ने कहा,‘सरकार बोर्ड से ऊपर है।’ उनका कहना था कि जब सीबीटी इस मुद्दे पर फैसला नहीं कर पाया, तो ईपीएफ कानून के तहत श्रम मंत्रालय श्रमिकों के लिए लाभ के लिए फैसला कर सकता है।

दत्तात्रेय ने संवाददाताआें से कहा-‘हमें इस 10 प्रतिशत करने का फैसला अच्छी आर्थिक स्थिति, जमीनी स्थिति और कैसे वैश्विक स्तर पर सामाजिक सुरक्षा कोष का निवेश किया जाता है, को देख कर किया है। हम श्रमिकों के धन के संरक्षक हैं और यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम देखें कि कैसे उन्हें अच्छा रिटर्न मिल सकता है।’ उन्होंने कहा कि 2015-16 के वित्त वर्ष में हमारा अनुभव काफी अच्छा रहा। ईपीएफओ ने ईटीएफ में 6,577 करोड़ रुपए का निवेश किया। पिछले एक साल में हमें निवेश पर 13.24 प्रतिशत का रिटर्न मिला है। वहीं अन्य प्रतिभूतियों में हमारा रिटर्न घट रहा है।
हालांकि, ट्रेड यूनियनों ने श्रम मंत्रालय द्वारा ईपीएफओ के ट्रस्टियों की मंजूरी के बिना एकतरफा फैसला लेने की आलोचना की।

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