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2015-16 में ईपीएफओ को 39,084 करोड़ कमाई का अनुमान, पर 2016-17 में पीएफ खाताधारकों को मिलेगा कम ब्याज

ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2015-16 के लिए 39, 083 करोड़ रुपये की कमाई होने का अनुमान लगाया है।

Author Updated: December 20, 2016 10:48 AM
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ)।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने 19 दिसंबर को ईपीएफ खातों में जमा राशि पर चालू वित्त वर्ष के लिए ब्याज दर को घटाकर 8.65% कर दिया था। वहीं ईपीएफओ ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपनी कमाई का आकलन किया। ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2015-16 के लिए 39, 083 करोड़ रुपये की कमाई होने का अनुमान लगाया है। 19 दिसंबर को बेंगलुरु में हुई बोर्ड की मीटिंग में श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रे भी मौजूद थे। उन्होंने कहा, ‘हमने 2016-17 के लिए ईपीएफ अंशधारकों को 8.65 प्रतिशत ब्याज देने का फैसला किया है। सभी भागीदारों के साथ व्यापक चर्चा के बाद यह फैसला किया गया है। हमने यह फैसला बहुत सोच विचार कर किया है।’ इसी बैठक में ईपीएफओ की ब्याज दर को 8.8% से घटाकर 8.65% कर दिया है।

ईपीएफओ के 31, मार्च 2016 के आकंड़ों के मुताबिक 3,76,22,440 सदस्य, ईपीएफ में अपना योगदान कर रहे हैं। राज्य के हिसाब से देखें तो दिल्ली में 24,92,295- आंध्र प्रदेश (तेलांगना सहित) में 32,92,532- कर्नाटक में 45,61,743- महाराष्ट्र में 74,99,727 – केरल में 10 लाख से ज्यादा तिमल नाडु में 45,27,43- मध्य प्रदेश में 9 लाख से ज्यादा सदस्य, उत्तर प्रदेश में 16 लाख से ज्यादा ईपीएफ में अपना योगदान कर रहे हैं। वहीं जिन राज्य में सबसे कम सदस्य योगदान कर रहे हैं वह इस प्रकार हैं। बिहार- 2 लाख से ज्यादा, छत्तीसगढ़- 3 लाख से ज्यादा, गोवा- 1 लाख से ज्यादा, उत्तराखंड- 4 लाख से ज्यादा, झारखंड- 4 लाख से ज्यादा और हिमाचल प्रदेश- 2 लाख से ज्यादा इपीएफ सदस्य अपना योगदान दे रहे हैं।

वित्त मंत्रालय ने इसी साल ईपीएफ पर ब्याज दर को 2015-16 के लिए घटाकर 8.7 प्रतिशत कर दिया था जबकि केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने 8.8 प्रतिशत को मंजूरी दी थी। ट्रेड यूनियनों के विरोध के बाद मंत्रालय ने अपना फैसला वापस ले लिया था। बीते सोमवार को हुई बैठक में ईपीएफओ के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त वी पी जाय ने कहा ‘पिछले साल ब्याज दर 8.8 प्रतिशत रखी गई थी। तब ईपीएफओ की आय के साथ पिछले साल का 1,600 करोड़ रुपय अधिशेष भी था। इस साल आय के साथ 410 करोड़ रुपए का अधिशेष उपलब्ध है।’ उन्होंने कहा कि पिछले साल की तुलना में अधिशेष में कमी को ध्यान में रखते हुए ब्याज दर में 0.15 प्रतिशत कमी की गई है।

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