EPFO Higher Pension: केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2022 के हायर पेंशन फैसले को समय पर लागू करने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है। सरकार का कहना है कि कोशिश यह भी है कि पात्र कर्मचारियों को EPS-2026 के तहत अधिकतम लाभ मिल सके।
यह अपडेट लोकसभा में पेंडिंग हायर-पेंशन क्लेम की संख्या, एप्लीकेशन प्रोसेस करने में देरी और प्रोसेस को तेज करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में एक सवाल के जवाब में आया।
श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि EPFO ने पहले ही मेंबर्स को जॉइंट ऑप्शंस के वैलिडेशन के लिए एप्लीकेशन जमा करने के लिए एक ऑनलाइन सुविधा दी है और लागू नियमों के अनुसार इन एप्लीकेशन को प्रोसेस कर रहा है।
सरकार ने हायर पेंशन क्लेम पर क्या कहा?
सरकार से खास तौर पर देश भर में मिले, प्रोसेस हुए, मंजूर हुए और पेंडिंग हायर-पेंशन एप्लीकेशन की संख्या और देरी के कारणों के बारे में पूछा गया था।
यह भी पूछा गया कि क्या सरकार ने रीजनल EPFO ऑफिस और एम्प्लॉयर को वेरिफिकेशन और प्रोसेसिंग में तेजी लाने के लिए निर्देश जारी किए हैं और क्या पेंडिंग केस को निपटाने और पेंशन एरियर जारी करने के लिए कोई टाइम-बाउंड सिस्टम शुरू किया जाएगा।
अपने जवाब में, सरकार ने मुख्य जवाब में आंकड़े नहीं दिए। इसके बजाय, उसने कहा कि हायर-पेंशन एप्लीकेशन के जोन-वाइज निपटान का विवरण एक एनेक्सर में दिया गया है।
यह जरूरी है क्योंकि सवाल में खास तौर पर राज्य/UT-वाइज जानकारी मांगी गई थी, जिसमें केरल की डिटेल्स भी शामिल थीं।
EPFO से क्लेम को तेजी से प्रोसेस करने के लिए कहा गया
सरकार ने देरी के मुद्दे पर कहा कि EPFO ने समय-समय पर अपने रीजनल ऑफिस को “ज्यादा सैलरी पर पेंशन से जुड़े मामलों के समय पर निपटान” के लिए निर्देश जारी किए हैं।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि हायर-पेंशन एप्लीकेशन की प्रोसेसिंग का रिव्यू करने के लिए सभी ज़ोनल और रीजनल ऑफिस के साथ रेगुलर वीडियो कॉन्फ्रेंस की गईं।
सुप्रीम कोर्ट का नवंबर 2022 का फैसला इस प्रोसेस के सेंटर में है।
ज्यादा पेंशन की यह कवायद सुप्रीम कोर्ट के 4 नवंबर, 2022 के फैसले से शुरू हुई है, जिसमें ज्यादा सैलरी के आधार पर EPS में कंट्रीब्यूट करने के ऑप्शन के बारे में बताया गया था।
सरकार ने कहा कि EPFO ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले में दिए गए निर्देशों को “समय पर” लागू करने के लिए कार्रवाई की है।
फैसले के बाद, EPFO ने मेंबर्स को जॉइंट ऑप्शन के वैलिडेशन के लिए अप्लाई करने की ऑनलाइन सुविधा दी। एप्लीकेशन को लागू नियमों के अनुसार प्रोसेस किया जा रहा है।
जिन एलिजिबल कर्मचारियों और पेंशनर्स ने ज्यादा पेंशन का ऑप्शन चुना है, उनके लिए इस प्रोसेस में वेरिफिकेशन और दूसरी फॉर्मैलिटीज शामिल हैं, इससे पहले कि बढ़ी हुई पेंशन तय की जा सके और जारी की जा सके।
पेंडिंग एप्लीकेशन और देरी का क्या?
लोकसभा के सवाल में सरकार से खास तौर पर पेंडिंग एप्लीकेशन के पीछे के कारण और क्या एम्प्लॉयर से जुड़े मुद्दों की वजह से प्रोसेस में देरी हो रही है, यह बताने के लिए कहा गया था।
हालांकि, सरकार के जवाब में मुख्य जवाब में पेंडिंग मामलों के अलग-अलग कारण नहीं बताए गए। इसके बजाय, इसने एनेक्सर में जोन-वाइज निपटान के विवरण की ओर इशारा किया और मामलों के निपटान में तेजी लाने के लिए EPFO द्वारा उठाए जा रहे उपायों पर जोर दिया।
मंत्रालय ने कहा कि रीजनल ऑफिस को रेगुलर इंस्ट्रक्शन दिए जा रहे हैं और जोनल और रीजनल ऑफिस के साथ रिव्यू मीटिंग की जा रही हैं।
एप्लीकेंट के लिए, यह जरूरी है क्योंकि हायर-पेंशन क्लेम के लिए अक्सर एम्प्लॉई, एम्प्लॉयर और EPFO के बीच कोऑर्डिनेशन की जरूरत होती है। रिकॉर्ड के वेरिफिकेशन या करेक्शन में कोई भी देरी प्रोसेस को रोक सकती है।
सरकार का कहना है कि वह ज्यादा से ज्यादा बेनिफिट्स देना चाहती है, लेकिन EPS फाइनेंस पर भी नजर रखना चाहती है। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि हायर पेंशन बेनिफिट्स को पेंशन स्कीम की फाइनेंशियल हेल्थ से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
एक अहम बयान में, मिनिस्ट्री ने कहा:
“सरकार EPS-2026 स्कीम के तहत वर्कर्स को ज्यादा से ज्यादा बेनिफिट्स पक्का करने के लिए कमिटेड है, साथ ही फंड की हेल्थ और उस पर भविष्य की लायबिलिटीज को भी ध्यान में रखती है।”
यह सरकार के जवाब का एक अहम हिस्सा
जहां एलिजिबल वर्कर और पेंशनर ज्यादा सैलरी के आधार पर ज्यादा पेंशन चाहते हैं, वहीं सरकार को एम्प्लॉई पेंशन स्कीम के लिए ज्यादा पेंशन पेमेंट से बन सकने वाली लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल लायबिलिटी पर भी विचार करना होगा।
तो, सरकार का नजरिया असल में दो तरह का है: यह पक्का करना कि पात्र वर्कर को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिले और साथ ही पेंशन फंड की फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी को भी सुरक्षित रखना।
क्या पेंडिंग हायर-पेंशन क्लेम को क्लियर करने के लिए कोई नई डेडलाइन है?
सरकार से खास तौर पर पूछा गया था कि क्या वह पेंडिंग मामलों के निपटारे और पेंशन एरियर के पेमेंट के लिए कोई टाइम-बाउंड सिस्टम लाने का प्रस्ताव रखती है।
इस जवाब में ज्यादा पेंशन वाले सभी पेंडिंग मामलों को निपटाने के लिए कोई नई डेडलाइन या बकाया रकम के भुगतान की कोई खास तारीख नहीं बताई गई है।
इसके बजाय, मंत्रालय ने कहा कि EPFO सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को “एक तय समय-सीमा में” लागू करने के लिए पहले से ही कदम उठा रहा है, जिसमें रीजनल ऑफिस को निर्देश जारी करना और रेगुलर रिव्यू करना शामिल है।
इसलिए, जो योग्य पेंशनभोगी अपनी ज्यादा पेंशन वाली क्लेम प्रोसेस होने का इंतज़ार कर रहे हैं, उनके लिए ताज़ा जवाब से पता चलता है कि सरकार EPFO ऑफिस पर मामलों को तेज़ी से निपटाने के लिए जोर दे रही है, लेकिन उसने सभी पेंडिंग मामलों को सुलझाने या बकाया रकम जारी करने के लिए कोई नई यूनिवर्सल डेडलाइन घोषित नहीं की है।
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8वां वेतन आयोग जयपुर में केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश (UT) के कर्मचारियों से जुड़े संगठनों के साथ अहम बैठक करने जा रहा है। हालांकि, इस बैठक में हर कोई शामिल नहीं हो सकेगा। आयोग ने इसके लिए कुछ पात्रता शर्तें तय की हैं।
अगर आपकी एसोसिएशन या यूनियन इस बैठक में हिस्सा लेना चाहती है, तो आवेदन से पहले यह जानना जरूरी है कि कौन पात्र है, आवेदन की आखिरी तारीख क्या है और किन नियमों का पालन करना होगा। पढ़ें पूरी खबर…
